रामनगरी अयोध्या में इस साल का दीपोत्सव एक बार फिर भव्यता की नई तस्वीर पेश करने की तैयारी में है. 7 नवंबर को होने वाले दीपोत्सव के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. एक तरफ दीपों के जरिए विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ सरयू नदी के घाटों को ऐसा स्वरूप देने की योजना है, जहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिकता का अलग अनुभव मिले.
अयोध्या में दीपोत्सव शहर की पहचान बन चुका है. हर साल दीपों की रोशनी में नहाई रामनगरी की तस्वीरें देश-दुनिया को अट्रैक्ट करती हैं. इस बार भी प्रशासन दीपोत्सव को भव्य बनाने के लिए अलग-अलग स्तर पर तैयारियों में जुट गया है. दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के पुल से लेकर लक्ष्मण घाट तक करीब एक किलोमीटर लंबे एरिया को सजाया जाएगा. घाटों पर रंग-बिरंगी रोशनी के साथ फूलों की सजावट की तैयारी है.

शाम ढलने के बाद जब दीपों की लौ और रंगीन लाइटें एक साथ सरयू तट को रोशन करेंगी, तो पूरा नजारा बेहद आकर्षक लगेगा. प्रशासन सरयू घाटों की इस सजावट को दीपोत्सव के प्रमुख आकर्षण में शामिल कर रहा है. घाटों पर इन दिनों रिनोवेशन का काम भी चल रहा है. कोशिश है कि दीपोत्सव से पहले घाटों को नया और भव्य स्वरूप दिया जाए, ताकि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके.
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दीपोत्सव के मुख्य आयोजन वाले दिन सरयू घाटों पर भव्य महाआरती की भी तैयारी है. वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान और हजारों दीपों की रोशनी के बीच होने वाली आरती में अवध की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी. सरयू की लहरें, घाटों पर जलते दीप और आरती की गूंज. प्रशासन इस पूरे आयोजन को श्रद्धालुओं के लिए खास आध्यात्मिक अनुभव बनाने की तैयारी कर रहा है.

तैयारियों में जुटा प्रशासन
दीपोत्सव को लेकर अलग-अलग कामों के लिए विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के मुताबिक, इस बार दीपोत्सव का आयोजन 7 नवंबर को किया जाना है और इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. उन्होंने बताया कि सरयू के घाटों पर रिनोवेशन का काम चल रहा है. काम पूरा होने के बाद घाटों को और भव्य स्वरूप दिया जाएगा.

दीपोत्सव को लेकर अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में भी उत्साह दिखाई दे रहा है. सरयू घाटों पर चल रहे काम और सजावट की तैयारियों को देखकर लोग इस बार के आयोजन के और भी भव्य होने की उम्मीद कर रहे हैं. इस बार दीपोत्सव में सिर्फ रोशनी की चमक ही नहीं, बल्कि अवध की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी खास तौर पर उभारने की तैयारी है.
अयोध्या की पहचान भगवान राम की नगरी के तौर पर है. ऐसे में दीपोत्सव के जरिए रामनगरी की आस्था, परंपरा और संस्कृति को एक साथ दिखाने की कोशिश होगी. 7 नवंबर की शाम जब सरयू के घाटों पर दीप जलेंगे, रंग-बिरंगी रोशनी फैलेगी और महाआरती की गूंज सुनाई देगी, तब अयोध्या एक बार फिर दीपों की नगरी के रूप में जगमगाती नजर आएगी.