उत्तराखंड और बिहार में मेडिकल इंटर्न और स्नातकोत्तर मेडिकल छात्रों को अब ज्यादा स्टाइपेंड मिलेगा. दोनों राज्यों के सरकारों ने इसमें बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी है. उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न के लिए मासिक स्टाइपेंड 17,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. यह फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. वहीं, बिहार के पहले साल के छात्रों का स्टाइपेंड 92,800 रुपये कर दिया गया है जबकि तीसरे साल के छात्रों को 1,12, 200 रुपये मिलेंगे.
8000 मिलेगा अधिक स्टाइपेंड
इस बढ़ोतरी से एमबीबीएस इंटर्न को हर महीने 8000 रुपये की अधिक आर्थिक मदद मिलेगी. अपडेटेड स्टाइपेंड उत्तराखंड के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत इंटर्न पर लागू होगा. ये कॉलेज श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार और अल्मोड़ा में स्थित हैं. ये कॉलेज एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं.
बिहार के मेडिकल छात्रों को भी मिलेगा फायदा
वहीं, बिहार के छात्रों के लिए अलग से सैलरी से जुड़ी घोषणा की गई है. फर्स्ट ईयर के स्नातकोत्तर मेडिकल छात्रों को अब 82,000 रुपये के बजाय 92,800 रुपये प्रति माह मिलेंगे. वहीं, दूसरे साल के छात्रों को 90,200 रुपये से बढ़कर 1,02,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा. वहीं, तीसरे वर्ष के स्नातकोत्तर छात्रों को पहले के 99,220 रुपये के मुकाबले अब 1,12,200 रुपये प्रति माह मिलेंगे. इसका मतलब है कि अंतिम वर्ष के छात्रों को हर महीने 12,980 रुपये ज्यादा मिलेंगे.
बिहार स्वास्थ्य विभाग ने 11 सितंबर को इस फैसले की घोषणा की. स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि इस वृद्धि से स्नातकोत्तर छात्रों को बेहतर आर्थिक सुविधा मिलेगी और चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन को बढ़ावा मिलेगा.
दो राज्य, एक जैसी मदद
बिहार और उत्तराखंड के इन फैसलों से मेडिकल की पढ़ाई और ट्रेनिंग कर रहे छात्रों को ज्यादा पैसे मिलेंगे जिससे उनको आर्थिक मदद भी मिलेगी. अस्पताल में काम और ट्रेनिंग के दौरान उन्हें पहले से ज्यादा आर्थिक मदद मिलेगी.
बिहार में PG मेडिकल छात्र वरिष्ठ डॉक्टरों की देखरेख में मरीजों के इलाज और अस्पताल के काम में हिस्सा लेते हैं. वहीं, उत्तराखंड में MBBS इंटर्न भी अपनी ट्रेनिंग के दौरान अस्पताल में काम करते हैं.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब अलग-अलग राज्यों में मेडिकल छात्रों को मिलने वाले स्टाइपेंड में अंतर को लेकर चिंता जताई जा रही है. हाल में कई राज्यों में मेडिकल इंटर्न और छात्रों ने कम स्टाइपेंड, ज्यादा काम के घंटे और ट्रेनिंग के दौरान पैसों की परेशानी को लेकर प्रदर्शन भी किए हैं.