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12-12 घंटे काम, वॉशरूम तक जाने की फुर्सत नहीं... महिला ने छोड़ी सरकारी बैंक नौकरी

31 साल की मधुरिमा ने 70 हजार रुपये महीने की बैंक नौकरी छोड़ने के लिए 2 लाख रुपये का बॉन्ड भरा और 35 हजार रुपये की प्राइवेट नौकरी शुरू की. उन्होंने नौकरी में लंबे काम के घंटे, छुट्टी की परेशानी और काम के दबाव का अपना अनुभव बताया.

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इस्तीफा देने के बाद मधुरिमा ने नई नौकरी तलाशनी शुरू की. ( Photo: Insta/ dear_mandy__)
इस्तीफा देने के बाद मधुरिमा ने नई नौकरी तलाशनी शुरू की. ( Photo: Insta/ dear_mandy__)

सरकारी बैंक की नौकरी पाने का सपना देश के लाखों युवा देखते हैं. इसके लिए लोग सालों तक पढ़ाई करते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और कई बार नौकरी मिलने तक लगातार कोशिश करते रहते हैं. अच्छी सैलरी, नौकरी की सुरक्षा और समाज में सम्मान, ये सब सरकारी नौकरी को खास बनाते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल की रहने वाली 31 साल की मधुरिमा की कहानी थोड़ी अलग है. उन्होंने करीब दो साल तक आईबीपीएस परीक्षा की तैयारी की और आखिरकार एक सरकारी बैंक में नौकरी हासिल कर ली. उस समय उनकी इन-हैंड सैलरी करीब 70 हजार रुपये महीना थी.

लेकिन कुछ समय बाद नौकरी उनके लिए इतनी मुश्किल हो गई कि उन्होंने इसे छोड़ने का फैसला कर लिया. नौकरी छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये का बॉन्ड पेनल्टी भी चुकाना पड़ा. इसके बाद उन्होंने सिर्फ 35 हजार रुपये महीने की सैलरी वाली प्राइवेट नौकरी से दोबारा शुरुआत की. यह वीडियो 7 सप्ताह पहले अपलोड किया गया था. लकिन अब ये वायरल हो रहा है.

दो साल पढ़ाई के बाद मिली थी बैंक की नौकरी
मधुरिमा ने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद करीब दो साल तक आईबीपीएस परीक्षा की तैयारी की थी. अक्टूबर 2022 में उनका चयन सरकारी बैंक में हुआ और उन्हें ग्रामीण कर्नाटक की एक ब्रांच में पोस्टिंग मिली. नौकरी की शुरुआत में सब कुछ अच्छा लग रहा था. उन्हें करीब 70 हजार रुपये इन-हैंड सैलरी मिल रही थी. इसके अलावा उन्हें हाउस रेंट अलाउंस भी मिलता था. यानी आर्थिक तौर पर नौकरी काफी अच्छी थी. लेकिन काम शुरू करने के कुछ समय बाद उन्हें महसूस होने लगा कि इस नौकरी की कीमत उनकी निजी जिंदगी और मानसिक शांति से चुकानी पड़ रही है.

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शादी के बाद भी नहीं मिली ज्यादा छुट्टी
मधुरिमा ने बताया कि दिसंबर 2022 में उनकी शादी हुई थी. उस समय भी वह ट्रेनिंग में थीं. उनके मुताबिक, शादी के कुछ ही दिनों बाद उन्हें दोबारा ट्रेनिंग के लिए लौटना पड़ा. उन्होंने बताया कि शादी के बाद वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ ज्यादा समय तक नहीं रह सकीं. इसके बाद बैंक में काम के दौरान छुट्टी को लेकर भी उन्हें काफी परेशानी हुई. उनके अनुसार, कई बार छुट्टी की मांग स्वीकार नहीं की जाती थी.

सुबह 8:30 बजे से रात 10:30 बजे तक काम
मधुरिमा के मुताबिक, उनकी नौकरी सिर्फ 9 से 5 बजे वाली नौकरी नहीं थी. उनका दिन कई बार सुबह करीब 8:30 बजे शुरू होता था और काम रात 10:30 बजे के बाद तक चलता था. उनके मुताबिक, शाम 7 बजे तक काम करना भी सामान्य बात थी और कई बार रविवार को भी काम करना पड़ता था. यानी ऑफिस का काम खत्म होने के बाद भी उन्हें कई दूसरे काम करने पड़ते थे. उनका कहना था कि बैंक में कैशियर की जिम्मेदारी के साथ-साथ उन्हें नए ग्राहक जोड़ने और बैंक के लिए दूसरे टारगेट पूरे करने का काम भी दिया जाता था.

कैश काउंटर पर घंटों बैठना पड़ा
मधुरिमा ने अपनी नौकरी के दौरान एक और गंभीर समस्या का जिक्र किया. उनके मुताबिक, कैशियर के तौर पर उन्हें लंबे समय तक लगातार काउंटर पर बैठना पड़ता था. उन्होंने बताया कि सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक कई बार उन्हें ब्रेक लेने का मौका नहीं मिलता था. यानी इस दौरान वह ठीक से वॉशरूम तक नहीं जा पाती थीं.

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मधुरिमा का कहना है कि लगातार कई घंटों तक ब्रेक न मिलने की वजह से उन्हें गंभीर यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो गया. उन्होंने दावा किया कि यह परेशानी करीब 2 से 3 महीने तक रही और इस दौरान ब्लीडिंग भी हुई. उनके मुताबिक, तबीयत खराब होने के बावजूद वह छुट्टी नहीं ले पा रही थीं और उन्हें ऑफिस जाना पड़ता था.

ऑफिस के बाद भी मिलता था नया टारगेट
मधुरिमा के मुताबिक, बैंक में काम सिर्फ ब्रांच के अंदर तक सीमित नहीं था. उन्होंने बताया कि कैश काउंटर का काम खत्म करने के बाद उन्हें ग्रामीण इलाके में जाकर नए ग्राहकों से संपर्क करने और नए अकाउंट खुलवाने जैसे काम करने पड़ते थे. उनकी पोस्टिंग जिस इलाके में थी, वहां वह कन्नड़ भाषा नहीं बोलती थीं. इसलिए ग्राहकों से बात करना भी उनके लिए मुश्किल था. इसके अलावा उन्होंने बताया कि एक महिला के तौर पर शाम के बाद गांव में अकेले घूमकर ग्राहकों से संपर्क करना उन्हें असुरक्षित भी लगता था.

'मैं रोज ऑफिस के बाद रोती थी'
लगातार काम और दबाव का असर मधुरिमा की निजी जिंदगी पर भी पड़ा. उन्होंने बताया कि वह ऑफिस से घर लौटने के बाद रोज रोती थीं. काम से इतनी थक जाती थीं कि अपने माता-पिता से भी ठीक से बात नहीं कर पाती थीं. उनके मुताबिक, उनके माता-पिता उनसे मिलने भी आए थे, लेकिन काम की वजह से वह उनसे ज्यादा बातचीत नहीं कर पाईं.

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मधुरिमा ने एक सीनियर कर्मचारी पर कथित तौर पर वर्बल एब्यूज का भी आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि उस सीनियर ने महिलाओं के बैंक में काम करने को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. मधुरिमा के मुताबिक, उन्होंने इस मामले की शिकायत एचआर से की, जिसके बाद संबंधित सीनियर को बुलाया गया और उसका व्यवहार बदल गया.

दोस्त की शादी में जाना भी पड़ा भारी
करीब दो साल तक इस तरह काम करने के बाद फरवरी 2024 में एक घटना ने मधुरिमा को नौकरी छोड़ने के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए करीब तीन महीने पहले छुट्टी के लिए आवेदन किया था. लेकिन शादी से सिर्फ तीन दिन पहले उन्हें बताया गया कि बैंक में ऑडिट चल रहा है और वह छुट्टी नहीं ले सकतीं. इसके बाद उन्होंने मार्च 2024 में इस्तीफा देने का फैसला कर लिया. उस समय वह प्रोबेशन पर थीं, इसलिए उन्हें एक महीने का नोटिस पीरियड पूरा करना पड़ा.

नौकरी छोड़ने के लिए भरने पड़े 2 लाख रुपये 
सरकारी बैंक की नौकरी छोड़ना भी उनके लिए आसान नहीं था. मधुरिमा के मुताबिक, नौकरी छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये की बॉन्ड पेनल्टी देनी पड़ी. यानी जिस नौकरी को पाने के लिए उन्होंने दो साल तक तैयारी की थी, उसे छोड़ने के फैसले में उन्हें सीधे 2 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. लेकिन उन्होंने फिर भी नौकरी छोड़ने का फैसला किया.

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नई नौकरी मिली, लेकिन सैलरी आधी हो गई
इस्तीफा देने के बाद मधुरिमा ने नई नौकरी तलाशनी शुरू की. उन्होंने लिंक्डइन पर रिक्रूटर्स से संपर्क किया और कई जगह आवेदन भेजे. वह ऐसी नौकरी चाहती थीं, जहां वर्क फ्रॉम होम का विकल्प मिल सके. आखिरकार उन्हें बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी में नौकरी मिल गई. लेकिन यहां उन्हें एक बड़ा समझौता करना पड़ा. सरकारी बैंक में जहां उन्हें 70 हजार रुपये महीना मिल रहा था, वहीं नई नौकरी में उनकी सैलरी सिर्फ 35 हजार रुपये थी. यानी उनकी कमाई सीधे आधी हो गई.

पैसों के लिहाज से यह फैसला भले ही बड़ा नुकसान लग रहा था, लेकिन मधुरिमा के मुताबिक नई नौकरी में उन्हें पहले से काफी बेहतर माहौल मिला. उन्होंने बताया कि उनके नए मैनेजर काफी मददगार हैं और कंपनी में उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला. सबसे बड़ी बात, उन्हें छुट्टी और काम को लेकर पहले जैसी परेशानी नहीं थी. यानी 35 हजार रुपये की नौकरी में उनकी कमाई कम थी, लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी पर ज्यादा कंट्रोल महसूस हुआ.

मधुरिमा की कहानी का एक और दिलचस्प हिस्सा यह है कि 35 हजार रुपये से शुरू हुई उनकी नई नौकरी की सैलरी अब बढ़ चुकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो साल बाद वह अब वह 60 हजार रुपया महीना कमा रही हैं. वह वर्क फ्रॉम होम करती हैं और अपने पति के साथ हैदराबाद में रहती हैं. यानी जिस समय उन्होंने 70 हजार रुपये की नौकरी छोड़कर 35 हजार रुपये की नौकरी स्वीकार की थी, उस समय उनकी कमाई लगभग आधी हो गई थी. लेकिन बाद में उनकी सैलरी फिर बढ़कर 60 हजार रुपये तक पहुंच गई.

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मधुरिमा ने अपनी पुरानी नौकरी के बारे में बताया कि वहां उन्हें अच्छी सैलरी और कई फायदे मिल रहे थे, लेकिन उन्हें मानसिक शांति नहीं मिल रही थी. उनके मुताबिक, उस समय वह बहुत ज्यादा तनाव में थीं और उनकी मानसिक स्थिति भी काफी खराब हो गई थी. नई नौकरी में कम सैलरी के बावजूद उन्हें छुट्टी लेने की आजादी और काम में ज्यादा पारदर्शिता महसूस हुई. उन्होंने बताया कि अब वह जरूरत पड़ने पर अपने घर भी जा सकती हैं और वहां से काम कर सकती हैं.

हर किसी के लिए एक जैसा फैसला नहीं
मधुरिमा की कहानी का मतलब यह नहीं है कि सरकारी नौकरी खराब है या प्राइवेट नौकरी हमेशा बेहतर होती है. हर व्यक्ति के लिए नौकरी का अनुभव अलग हो सकता है. किसी के लिए नौकरी की सुरक्षा और अच्छी सैलरी ज्यादा जरूरी हो सकती है, तो किसी के लिए काम के घंटे, वर्क प्लेस का माहौल और निजी जिंदगी के लिए समय ज्यादा मायने रख सकता है. मधुरिमा के मामले में उन्होंने अपनी नौकरी और वहां के कामकाजी माहौल को लेकर जो अनुभव बताया, उसके आधार पर इस्तीफा देने का फैसला किया.

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