हर महीने सैलरी आते ही ऐसा लगता है कि इस बार कुछ पैसे जरूर बचेंगे. लेकिन महीने के आखिर तक बैंक अकाउंट फिर लगभग खाली हो जाता है. कई लोगों को लगता है कि उनकी कमाई कम है, इसलिए बचत नहीं हो पा रही. लेकिन बेंगलुरु के एक शख्स का कहना है कि परेशानी सिर्फ कम सैलरी नहीं, बल्कि रोजमर्रा के कुछ ऐसे छोटे-छोटे खर्च हैं जो बिना एहसास के आपकी जेब खाली कर देते हैं.उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हजारों लोग इससे खुद को जोड़कर देख रहे हैं.
उसने बताया कि उसने अपनी मासिक खर्चों की लिस्ट बनाई तो पता चला कि बड़े खर्चों से ज्यादा नुकसान उन छोटी-छोटी आदतों से हो रहा था, जिन पर वह कभी ध्यान ही नहीं देता था. आइए जानते हैं वे 5 खर्च कौन से हैं.
1. बार-बार फूड डिलीवरी और इंस्टेंट सर्विस लेना
आज के समय में खाना ऑर्डर करना, 10 मिनट में सामान मंगाना या हर छोटी चीज के लिए डिलीवरी ऐप का इस्तेमाल करना आम बात हो गई है. लेकिन यही सुविधा हर महीने हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च करा देती है. डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस और टिप मिलाकर बिल काफी बढ़ जाता है. अगर जरूरत होने पर ही इन सेवाओं का इस्तेमाल किया जाए तो अच्छी-खासी बचत हो सकती है.
2. छोटी-छोटी ऑनलाइन शॉपिंग
कई लोग सोचते हैं कि 200 या 500 रुपये की खरीदारी से क्या फर्क पड़ेगा. लेकिन जब पूरे महीने का हिसाब लगाया जाता है तो यही छोटी-छोटी खरीदारी हजारों रुपये में बदल जाती है. डिस्काउंट और सेल के नाम पर लोग ऐसी चीजें भी खरीद लेते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती.
3. बिना प्लान के वीकेंड बिताना
वीकेंड आते ही कैफे, मॉल, पब या बाहर घूमने का प्लान बन जाता है. अगर पहले से कोई बजट तय न हो तो खर्च तेजी से बढ़ जाता है. कई बार सिर्फ दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए भी जरूरत से ज्यादा पैसे खर्च हो जाते हैं. इसलिए पहले से योजना बनाकर चलने से फिजूल खर्च कम किया जा सकता है.
4. दूसरों को देखकर गैजेट बदलना
हर साल नया मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट वॉच खरीदने की आदत भी बचत कम कर देती है. कई लोग सिर्फ इसलिए नया गैजेट खरीद लेते हैं क्योंकि उनके दोस्त या ऑफिस के लोग नया मॉडल इस्तेमाल कर रहे होते हैं. जबकि पुराना डिवाइस पूरी तरह ठीक काम कर रहा होता है. ऐसी आदत लंबे समय में आर्थिक बोझ बन सकती है.
5. हर दिन बाहर खाना
अगर रोज ऑफिस के बाहर लंच या डिनर किया जाए तो महीने का खर्च काफी बढ़ जाता है. घर का खाना न सिर्फ सस्ता पड़ता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर होता है. बेंगलुरु के इस शख्स ने बताया कि जब उसने हफ्ते में कुछ दिन घर का बना खाना खाना शुरू किया तो उसकी बचत भी बढ़ी और सेहत में भी सुधार आया.
सिर्फ ज्यादा कमाई से नहीं बनती बचत
उसका कहना है कि कई लोग सोचते हैं कि सैलरी बढ़ जाएगी तो बचत अपने आप होने लगेगी. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. अगर आय बढ़ने के साथ-साथ खर्च भी बढ़ जाएं तो बैंक बैलेंस में कोई खास फर्क नहीं पड़ता. इसे एक्सपर्ट 'लाइफस्टाइल इंफ्लेशन' कहते हैं, यानी कमाई बढ़ने के साथ खर्च भी बढ़ जाता है.
कैसे करें बेहतर बचत?
अगर आप हर महीने कुछ पैसे बचाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने सभी खर्चों का रिकॉर्ड रखे. यह देखें कि कौन-से खर्च जरूरी हैं और कौन-से सिर्फ आदत बन चुके हैं. ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी और बिना प्लान के होने वाले खर्चों को थोड़ा कम कर हर महीने अच्छी बचत की जा सकती है.
बेंगलुरु के इस शख्स का कहना है कि अमीर बनने के लिए सिर्फ बड़ी सैलरी नहीं, बल्कि सही वित्तीय आदतें भी जरूरी हैं. जब तक आप अपने छोटे-छोटे खर्चों पर ध्यान नहीं देंगे, तब तक अच्छी कमाई होने के बाद भी पैसे बचाना मुश्किल रहेगा. यही वजह है कि कई लोग अच्छी सैलरी मिलने के बावजूद महीने के आखिर में पैसों की कमी महसूस करते हैं.