नेपाल में आए जल सैलाब ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी. कहीं घर बह गए, कहीं परिवार के लोग लापता हैं और कहीं लोग मलबे के बीच अपनों की तलाश कर रहे हैं. इस तबाही के बीच कई वीडियो एक और दर्दनाक कहानी दिखा रहे हैं. ये कहानी उन कुत्तों की है, जो अपने घर, अपने मालिक और उन लोगों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके साथ उन्होंने जिंदगी का बड़ा हिस्सा बिताया था.
कहीं कोई कुत्ता उस जगह से हटने को तैयार नहीं है, जहां कभी उसका घर हुआ करता था. कहीं कोई मलबे के बीच अपने मालिक को तलाश रहा है तो कहीं कोई कीचड़ में फंसने के बाद जिंदगी की जंग लड़ता नजर आया.
इन तस्वीरों ने नेपाल की त्रासदी के मानवीय पहलू के साथ-साथ इंसान और जानवर के बीच के उस रिश्ते को भी सामने ला दिया है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं.
घर उजड़ गया, लेकिन लिली ने जगह नहीं छोड़ी
नेपाल में फ्लैश फ्लड की तबाही के बीच आजतक संवाददाता आशुतोष मिश्रा ने ग्राउंड रिपोर्ट में लिली नाम की एक डॉगी की दर्दनाक कहानी बताई, जिसका नाम लिली बताया जा रहा है. उनके मुताबिक, नेपाल में मौत का आंकड़ा करीब 1000 तक पहुंच चुका है और हजारों लोग अब भी लापता हैं.
रेस्क्यू एजेंसियां मलबे में बचे लोगों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं. इसी तबाही के बीच लिली पिछले करीब 4-5 दिनों से लगातार किसी को तलाश रही है. संवाददाता ने बताया कि लिली के साथ ये दो बच्चे तब से हैं, जब वह छोटी थी. लिली शाम के वक्त एक होटल में रहती थी, जहां लोग उसे खाना खिलाते और उसका ख्याल रखते थे. लेकिन बाढ़ की तबाही के बाद होटल और आसपास का इलाका उजड़ गया. लिली की देखभाल करने वाले कई लोग या तो लापता हैं या उस इलाके से जा चुके हैं.
आशुतोष मिश्रा के मुताबिक, लिली बेहद शांत है, लेकिन पिछले कई दिनों से एक सीमित इलाके में लगातार घूम रही है, जैसे वह उन लोगों को खोज रही हो, जिन्हें उसने अपने आसपास देखा और जिनके साथ वह बड़ी हुई. उन्होंने कहा कि पालतू जानवरों को इंसान का सबसे वफादार साथी कहा जाता है और लिली की कहानी इस आपदा के बीच उस रिश्ते की गहराई दिखाती है. नेपाल में यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक बड़ा मानवीय संकट भी है, जिसका असर इंसानों के साथ-साथ उनके पालतू जानवरों पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
मलबे के बीच घर में बैठा रहा कुत्ता
सोशल मीडिया पर एक और वीडियो सामने आया, जिसमें एक कुत्ता बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके घर के अंदर चुपचाप बैठा दिखाई देता है.घर का काफी हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह चुका था. चारों तरफ कीचड़ और मलबा दिखाई दे रहा था. इसके बावजूद कुत्ता उस जगह से बाहर नहीं निकला. उसके आसपास उसका कोई मालिक नजर नहीं आया.वह बस उसी घर के बचे हुए हिस्से में बैठा रहा. जिस जगह कभी उसके लिए सुरक्षित ठिकाना हुआ करता था, अब वही जगह तबाही की तस्वीर बन चुकी थी.
कीचड़ में फंसा था, लोगों ने बचाकर निकाला
एक दूसरे कुत्ते की कहानी थोड़ी अलग है. उसके पास इंतजार करने का भी मौका नहीं था.बाढ़ का तेज बहाव उसे अपने साथ बहा ले गया था. बाद में वह भारी और गहरे कीचड़ में फंस गया. सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में एक स्थानीय व्यक्ति उसे बचाने के लिए कीचड़ में उतरता दिखाई देता है.
उसने काफी कोशिश की, लेकिन अकेले कुत्ते को बाहर निकालना आसान नहीं था. इसके बाद एक और व्यक्ति मदद के लिए पहुंचा. दोनों ने मिलकर कीचड़ हटाया और काफी मशक्कत के बाद कुत्ते को बाहर निकाल लिया.थका हुआ और कीचड़ से पूरी तरह लथपथ यह कुत्ता आखिरकार सुरक्षित जमीन पर पहुंच सका.
मालिक के लौटने का इंतजार करता रहा कुत्ता
रसुवा में भोटे कोशी नदी की बाढ़ ने एक घर को बहा दिया. एक कुत्ते को उसके मालिक से अलग कर दिया.वायरल वीडियो में सफेद रंग का यह कुत्ता एक जर्जर हो चुके घर के बाहर बैठा नजर आया. आसपास तबाही का मंजर था, लेकिन वह उस जगह से हटता नहीं दिखा.
ऐसा लग रहा था जैसे वह वहीं बैठकर अपने मालिक के लौटने का इंतजार कर रहा हो. जिस जगह उसने आखिरी बार अपने मालिक को देखा था, शायद उसके लिए वही जगह अब भी सबसे परिचित थी.
तबाही के बीच हुई एक भावुक मुलाकात
इन दर्दनाक कहानियों के बीच एक ऐसा भी वीडियो आया, जिसने थोड़ी तसल्ली दी. बाढ़ के दौरान एक महिला अपने कुत्ते से अलग हो गई थी. दोनों करीब तीन से चार दिनों तक एक-दूसरे से दूर रहे. आखिरकार जब बचाव के बाद कुत्ते को उसकी मालकिन के पास लाया गया, तो महिला ने उसे कसकर गले लगा लिया.
नेपाल में कुत्तों के लिए खास है एक त्योहार
इन तस्वीरों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि नेपाल में कुत्तों को खास इज्जत दी जाती है. हर साल मनाए जाने वाले फेस्टिवल कुकुर तिहार में कुत्तों को फूलों की माला पहनाई जाती है, कुत्ते के माथे पर टीका लगाया जाता है. उन्हें खाना खिलाया जाता है.यह त्योहार इंसान और कुत्ते के बीच वफादारी और साथ के रिश्ते को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है.