वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (The World Economic Forum 2023) एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जो स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है (WEF, Switzerland, Geneva). इसकी स्थापना 24 जनवरी 1971 को जर्मन इंजीनियर और अर्थशास्त्री क्लॉस श्वाब ने की थी (Foundation of WEF). WEF के 1,000 सदस्य कंपनियां है जो लगभग पांच अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक सार्वजनिक सब्सिडी के साथ काम करती है. इसका मिशन है- "व्यापार, राजनीतिक, अकादमिक, और समाज के अन्य नेताओं को वैश्विक, क्षेत्रीय और उद्योग एजेंडे को संलग्न करके दुनिया की स्थिति में सुधार करना".
WEF की वार्षिक बैठक ज्यादातर जनवरी के अंत में स्विट्जरलैंड के रिसॉर्ट दावोस में की जाती है. इस बैठक में लगभग 3,000 भुगतान करने वाले सदस्यों और चयनित प्रतिभागी को एक साथ जुटते हैं. इनमें निवेशक, व्यापारिक नेता, राजनीतिक नेता, अर्थशास्त्री, मशहूर हस्तियां और पत्रकार शामिल होते हैं. यह बैठक, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए पांच दिनों तक चलती है.
ब्रेंडे के इस्तीफे के बाद डब्ल्यूईएफ के प्रबंध निदेशक एलोइस ज़्विंगगी अंतरिम अध्यक्ष और सीईओ के रूप में कार्यभार संभालेंगे. ट्रस्टी बोर्ड स्थायी उत्तराधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया की निगरानी करेगा. ब्रेंडे 2017 से डब्ल्यूईएफ के प्रमुख थे.
रिपोर्ट बताती है कि स्मार्ट सिटी मिशन के भी 90% से ज्यादा काम पूरे हो चुके हैं, जिससे शहरों में सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं. अब सरकार का अगला लक्ष्य ऐसे शहर बसाना है जो न केवल आधुनिक हों, बल्कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार हों.
ब्रेमर ने यूक्रेन और गाजा में जारी युद्धों और वैश्विक शासन के भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बीच कहा कि भारत जैसे देशों को अमेरिका से संवाद और बहुपक्षीय व्यवस्था की रक्षा के बीच संतुलन साधना होगा.
पीस बोर्ड पर साइन करने वाले देशों में अमेरिका, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बेल्जियम, बुल्गारिया, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, मंगोलिया, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और उज्बेकिस्तान हैं. इस तरह बोर्ड में आठ इस्लामिक देश शामिल हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मार्क और उन्होंने ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र पर एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तय करने पर सहमति बना ली है इसलिए अब यूरोपीय देशों पर वह टैरिफ नहीं लगाएंगे.
व्हाइट हाउस का कहना है कि बोर्ड ऑफ पीस के एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हर सदस्य गाजा में शांति बहाली पर प्रमुखता से काम करेगा. इसके साथ ही एक तय पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभालेगा. इसके अलावा बोर्ड का काम क्षेत्रीय संबंधों में सुधार, पुनर्निर्माण और फंडिंग पर भी रहेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावोस से रवाना होने से पहले मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि कल अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पीस बोर्ड की साइनिंग सेरेमनी में हिस्सा लेते हुए कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक है. यह गाजा पीस बोर्ड के आधिकारिक गठन का मौका है. मिडिल ईस्ट में शांति है लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा होगा. हमने आठ युद्ध रुकवाए हैं और मुझे लगता है कि एक और युद्ध जल्द ही सुलझने जा रहा है.
ग्रीनलैंड पर जारी तनातनी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड दिया लेकिन अब वो ग्रीनलैंड पर आनाकानी कर रहा है. ट्रंप ने फिर दोहराया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है और वो उसे लेकर रहेंगे. ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड बर्फ का एक टुकड़ा है, जो उनकी बहुत छोटी सी मांग है. साथ ही ट्रंप ने कहा कि मुझे यूरोप से प्यार हैं. मैं चाहता हूं कि यूरोप भी तरक्की करे. लेकिन यूरोप सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है.
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.
पिछले साल जून में जब अमेरिका ने तेरहान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला किया था तो नाटो के महासचिव मार्क रुत्ते ने ट्रंप को डैडी कहा था.
मजबूत विकास दर, गहरे होते सुधार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब कड़े फैसलों और तेज क्रियान्वयन की जरूरत है. इसी विषय पर इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों दावोस में नीला चश्मा पहनकर पहुंचे थे. उनका ये लुक सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. अब उनके इसी चश्मे पर ट्रंप ने अपने संबोधन में चुटकी ली है.
स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.
दावोस में चल रहे WEF 2026 में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी आज एक अहम सत्र में संबोधन देंगी. "क्या भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है?" विषय पर होने वाली इस चर्चा में भारत की तेज ग्रोथ, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर बात होगी. सत्र का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा.
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने वैश्विक व्यवस्था को लेकर तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय सिस्टम अब समाप्त हो चुका है और दुनिया एक नई, अस्थिर और टकराव भरी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां आर्थिक ताकत को हथियार बनाया जा रहा है.
US Vs EU: अमेरिका किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड को कब्जे में लेना चाहते हैं और इसे लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं. हाल ही में उन्होंने 8 उन देशों को 10% टैरिफ की धमकी दी है, जो उनके इस कदम का विरोध कर रहे हैं. इसे लेकर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के चेयरमैन ने अपनी राय रखी है.
भारत का चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ना वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है. लेकिन अंदर देखें तो तस्वीर इतनी भी गुलाबी नहीं है. नॉमिनल जीडीपी के मामले में हम भले ही जापान को पीछे छोड़ने के कगार पर हैं लेकिन प्रति व्यक्ति आय, जीवन प्रत्याशा, मैन्युफैक्चरिंग, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार, और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में जापान भारत से बहुत आगे है.
भारत करने वाला है कमाल, देखता रह जाएगा जापान, IMF ने कहा- 'सबसे तेज इकोनॉमी...'
लंबे वक्त से आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को राहत मिलती नज़र आ रही है.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पाकिस्तान को कर्जा देने का फैसला किया है
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 25 की तीसरी तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े जारी कर दिए हैं. चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की विकास दर 6.2 फीसदी रही है.