CBSE Class 12 re-evaluation portal 2026: Students report login issues, board denies glitch CBSE Re-Evaluation Live: सीबीएसई कक्षा 12वीं के बोर्ड परीक्षा परिणाम आने के बाद खुशियों के बीच एक बड़ा तबका ऐसा भी है, जो इस वक्त गहरे मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है. यह तनाव किसी प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी बोर्ड परीक्षा प्रणाली की कथित खामियों के खिलाफ उपजा है. सीबीएसई को इस वजह से हर तरफ से घेरा भी गया है, फिर भी सीबीएसई छात्रों की समस्याओं को सहजता से हल नहीं कर पाया है.
फिलहाल बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर पुनर्मूल्यांकन और कॉपियों के वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल तो खोल दिया है, लेकिन शुरुआत से ही यह पोर्टल भारी तकनीकी दिक्कतों और ग्लिच का शिकार हो गया है. वैसे तो ये पोर्टल एक जून को शुरू किया जाना था, कल पूरे दिन छात्र इसमें परेशान रहे. सीबीएसई ने कल कोई जवाब नहीं दिया और आज सुबह 4.42 मिनट पर बोर्ड ने एक्स पर ट्वीट के जरिए पोर्टल लॉन्च की जानकारी दी. सुबह से हजारों छात्र समय सीमा नजदीक होने के बावजूद फीस भुगतान और फॉर्म सबमिशन के लिए घंटों स्क्रीन के सामने बैठने को मजबूर हैं.
बता दें कि इस साल का पुनर्मूल्यांकन सिर्फ एक सामान्य प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि इसने 'सीबीएसई ओएसएम कंट्रोवर्सी' का रूप ले लिया है. देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्रों और शिक्षकों ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं. छात्रों का आरोप है कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान कई जगहों पर पूरे-पूरे पैराग्राफ और कई महत्वपूर्ण सवाल बिना जांचे ही छोड़ दिए गए हैं, जिससे उनके कुल प्राप्तांकों में भारी गिरावट आई है. एक-एक नंबर के लिए यूनिवर्सिटी एडिकशन की रेस में पिछड़ रहे इन युवाओं का दर्द अब सोशल मीडिया पर 'डिजिटल विरोध' के रूप में फूट रहा है.
देखा जाए तो ये सिर्फ नंबरों को दोबारा गिनने की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उन होनहारों के भविष्य और उनकी सालभर की मेहनत पर लगे उस कथित सिस्टम के ग्रहण के खिलाफ आक्रोश है, जो तकनीकी आधुनिकता के नाम पर मानवीय संवेदनशीलता को भूल बैठा है. देश के अग्रणी कॉलेजों में दाखिले की दहलीज पर खड़े इन छात्रों के लिए हर एक मिनट कीमती है. सीबीएसई री-इवैल्युएशन से जुड़ी हर प्रामाणिक रिपोर्ट, पोर्टल की स्थिति और शिक्षा मंत्रालय के रुख पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है.
सीबीएसई की एक छात्रा की मां ने बताया कि उनकी बेटी कॉमर्स की छात्रा है. उन्होंने 10 से 12 बार लॉगिन करने की कोशिश की, कैप्चा कोर्ड भरने के बाद पेज क्रैश हो जाता है.
सीबीएसई 12वीं पुनर्मूल्यांकन का फॉर्म भरते समय छात्रों के सामने एक नया तकनीकी असमंजस खड़ा हो गया है. छात्र लगातार पूछ रहे हैं कि री-इवैल्युएशन फॉर्म में उन्हें 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' का पेज नंबर लिखना है या उनकी 'मूल (फिजिकल) उत्तर पुस्तिका' का? उदाहरण के लिए, यदि कोई उत्तर डिजिटल कॉपी में पेज 7 पर है और असल कॉपी में पेज 4 पर, तो क्या भरें?
सीबीएसई के नियमों और पूर्व मूल्यांकन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छात्रों को फॉर्म में स्कैन की गई डिजिटल कॉपी (Scanned Copy Page Number) का ही पेज नंबर लिखना चाहिए. इसकी वजह यह है कि जो परीक्षक आपकी कॉपी की दोबारा जांच करेगा, उसके सामने आपकी फिजिकल कॉपी नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर वही 'स्कैन की गई डिजिटल कॉपी' होगी. अगर आप स्कैन कॉपी के अनुसार पेज नंबर (जैसे- पेज 7) लिखेंगे, तो परीक्षक को उस विवादित उत्तर या 'अनचेक्ड सवाल' तक तुरंत पहुंचने में आसानी होगी. छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी गफलत से बचने के लिए स्कैन की गई पीडीएफ (PDF) के पेज नंबर को ही आधार बनाएं.
कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए यह पुनर्मूल्यांकन कोई मामूली प्रक्रिया नहीं है. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) सहित देश के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए दशमलव के अंकों की भी भारी अहमियत होती है. ऐसे में सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ियों या परीक्षकों की लापरवाही के कारण जिन छात्रों के 5 से 10 नंबर कम हुए हैं, उनका पूरा साल और करियर दांव पर लग गया है. छात्र बोर्ड से त्वरित न्याय की गुहार लगा रहे हैं.
अभी भी री-वैल्यूएशन पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा. सोशल मीडिया पर छात्र लगातार स्क्रीन शॉट शेयर कर रहे . एक छात्र ने एक्स पर लिखा कि सीबीएसई अब क्या करें?
ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर इन दिनों सीबीएसई परीक्षा के छात्रों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है. दर्जनों छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल कॉपियों के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं, जिनमें साफ दिख रहा है कि सही उत्तर लिखे होने के बावजूद उन पर परीक्षक के पेन का कोई निशान नहीं है. 'Unchecked Questions' के इस नए विवाद ने बोर्ड की मूल्यांकन की गोपनीयता और सटीकता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है.
इस साल सीबीएसई द्वारा लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है. कई वरिष्ठ शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने यह स्वीकार किया है कि डिजिटल स्क्रीन पर कॉपियां जांचते समय कई परीक्षकों से चूक हुई है. छात्रों का आरोप है कि जल्दबाजी में कई कॉपियों के मुख्य पृष्ठ पर तो नंबर चढ़ा दिए गए, लेकिन अंदर के पन्नों पर लिखे उत्तरों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है.
सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के पुनर्मूल्यांकन और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए अपना आधिकारिक डिजिटल लिंक सक्रिय कर दिया है. हालांकि, पोर्टल लाइव होते ही देश भर से छात्रों ने सर्वर डाउन होने और ओटीपी (OTP) न आने की शिकायतें दर्ज कराई हैं. कॉलेज एडमिशंस की डेडलाइन नजदीक होने के कारण छात्रों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है. साइबर कैफे और घरों में बैठे छात्र लगातार पेज रीफ्रेश कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी खामी दूर होने का नाम नहीं ले रही.