इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, देश के शहरों में रहने वाले 96 लाख से ज्यादा परिवारों का अपने घर का सपना अब सच हो गया है. पिछले 10 सालों में घर खरीदने के लिए बैंक से लोन लेने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है और होम लोन का कुल आंकड़ा ₹37 लाख करोड़ तक पहुंच गया है.
इकोनॉमिक सर्वे 2025-2026 के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में आवास की कमी को दूर करने के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की प्रमुख योजना 'प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी' (PMAY-U) ने प्रभावी प्रगति दर्ज की है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 24 नवंबर 2025 तक योजना के दोनों चरणों के तहत कुल 122.06 लाख घरों को मंजूरी दी गई थी, जिनमें से 96.02 लाख घर पूरे कर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं.
सरकार ने किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिनमें प्रत्यक्ष कर में छूट और GST लाभ के साथ-साथ इस क्षेत्र को 'प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग' में शामिल करना प्रमुख है. इससे लोगों के लिए कम डाउन पेमेंट पर लोन लेना आसान हुआ है. इसके अतिरिक्त, किफायती आवास को 'इंफ्रास्ट्रक्चर' का दर्जा देने जैसे हस्तक्षेपों ने भी शहरी भारत में अपना घर चाहने वाले लाखों परिवारों की राह आसान की है.
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इकोनॉमिक सर्वे में क्या?
इकोनॉमिक सर्वे में यह भी बताया गया कि स्मार्ट सिटी मिशन (SCM) के तहत शहरों ने अपने तय प्रोजेक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है. 9 मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, कुल 8,067 प्रोजेक्ट्स में से 90% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. इन प्रोजेक्ट्स में स्मार्ट सड़कें, साइकिल ट्रैक, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, बेहतर पानी और सीवरेज नेटवर्क के साथ-साथ शानदार सार्वजनिक स्थल शामिल हैं. इस पूरे मिशन में अब तक लगभग ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश किया जा चुका है.
इकोनॉमिक सर्वे 2025-2026 में इस बात पर जोर दिया गया है कि भविष्य की शहरी नीति में केवल अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के बजाय पूरे सिस्टम के प्रदर्शन को प्राथमिकता देनी होगी, इसका मतलब है कि अब आवास (housing), आवाजाही (mobility), स्वच्छता, जलवायु लचीलापन और वित्त को एक साथ जोड़कर देखा जाएगा. लक्ष्य ऐसे रहने योग्य और 'क्लाइमेट-रेडी' शहर बनाने का है जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलें और लंबे समय तक आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हों.
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₹37 लाख करोड़ पर पहुंचा होम लोन का आंकड़ा
सर्वे में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि भारत का हाउसिंग मार्केट अब तेजी से वित्तीय रूप से सशक्त हो रहा है. पिछले एक दशक में व्यक्तिगत होम लोन की बकाया राशि तीन गुना से अधिक बढ़ गई है. मार्च 2015 में जहां यह आंकड़ा करीब ₹10 लाख करोड़ था, वहीं मार्च 2025 तक यह बढ़कर ₹37 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है. वर्तमान में, कुल जीडीपी (GDP) में होम लोन की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो एक दशक पहले मात्र 8 प्रतिशत थी. यह बदलाव स्पष्ट करता है कि अब घरों की मांग को बढ़ाने में औपचारिक ऋण और बैंकिंग सिस्टम की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.