शत्रुघ्न (प्रसाद) सिन्हा(Shatrughan Sinha) की पहचान एक महान अभिनेता की रही है, लेकिन बतौर एक मुखर राजनेता, वे चर्चा में रहते हैं. वह अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्य के रूप में आसनसोल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं. इससे पहले बिहार के वह पटना साहिब से लोकसभा सांसद चुने गए थे. वह 1996-2002 और 2002-2008 के दौरान राज्यसभा के सांसद भी रहे.
शत्रुघ्न सिन्हा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और जहाजरानी मंत्री थे. वह 2014 से 2019 तक परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर स्थायी समिति के सदस्य और विदेश मंत्रालय और प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय में सलाहकार समिति के सदस्य रहे थे. 2016 में, उनकी जीवनी, एनीथिंग बट खामोश जारी की गई थी.
सिन्हा का जन्म 15 जुलाई 1946 को पटना में हुआ था. उनके तीन भाई हैं- राम, लक्ष्मण, और भरत. वह वह चार भाइयों में सबसे छोटे हैं. उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से विज्ञान स्नातक की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे से अभिनय में डिप्लोमा भी किया था.
टीएमसी में अभिषेक बनर्जी के नाम पर शुरू हुआ विरोध काफी आगे बढ़ चुका है. ममता बनर्जी के सामने सवाल उठने लगा है कि या तो वो अभिषेक बनर्जी को चुनें, या औरों को. अब तो ममता बनर्जी को ही तय करना है कि अभिषेक बनर्जी को लेकर क्या फैसला लेती हैं?
पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी के साथ सियासी खेला हो गया है. टीएमसी के विधायकों के बाद सांसद भी साथ छोड़ते जा रहे हैं. इसी सियासी संकट के बीच ममता बनर्जी के साथ कोई ढाल बनकर खड़ा है तो वो दो बिहारी नेता है, जिसमें एक शत्रुघ्न सिन्हा तो दूसरे कीर्ति आजाद हैं.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद Shatrughan Sinha ने पार्टी के कथित बागी खेमे से अपने जुड़ाव की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, न किसी बागी नेता ने उनसे संपर्क किया है।
टीएमसी के बागी गुट के नेता काकोली घोष ने एनडीए के साथ गठबंधन करने का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके साथ 20 सांसद हैं. वहीं, कल्याण बनर्जी में भी बगावती मूड दिखा. हालांकि, शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कहा कि वे ममता बनर्जी के साथ हैं.
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि इस कठिन समय में ममता जी ने जब हमारी मदद की थी, तब हम उनके साथ थे. अब जब वे मुश्किल दौर से गुजर रही हैं, तो हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम उनका साथ छोड़ें नहीं. ममता जी ने अपनी नेतृत्व क्षमता से हम सबका विश्वास जीता है. इसलिए इस मुसीबत की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ा रहना हमारा फर्ज है.
आसनसोल सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि बागियों की लिस्ट में यूसुफ पठान और सयानी घोष का नाम सुनकर उन्हें ताज्जुब हुआ. बागियों को उन्होंने कहा कि TMC छोड़ने से पहले उन्हें सांसदी से इस्तीफा देना चाहिए और फिर चुनाव जीतना चाहिए.
बंगाल की आसनसोल सीट से टीएमसी सांसद ने शत्रुघ्न सिन्हा कहा कि ममता बनर्जी के साथ थे और आगे भी रहेंगे. आजतक के साथ खास बातचीत में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उन्होंने न तो किसी पेपर पर हस्ताक्षर किया और न ही हामी भरी और न ही बागियों ने उनसे संपर्क किया है. देखें पूरा विडियो
टीएमसी सांसद Shatrughan Sinha ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के 12 साल पूरे होने पर उनकी खुलकर तारीफ की, जिससे उनके टीएमसी के बागी खेमे में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वह Mamata Banerjee का साथ नहीं छोड़ेंगे।
TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा है कि वे स्वभाव से बेबाक रहे हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर सच बोलना बगावत है, तो मैं भी बागी हूं. मैंने हमेशा साफ-साफ बात की है और सच को सच कहा है. लेकिन मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि मुश्किल समय में ममता मेरे साथ खड़ी थीं.
टीएमसी पार्टी के अंदर इन दिनों बवाल मचा हुआ है. विधानसभा चुनाव में टीएमसी की करारी हार के बाद विधायक और सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलते ही टीएमसी पूरी तरह बिखर गई है. ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा, सयानी घोष और युसुफ पठान को सियासत के पिच पर खड़ा किया, लेकिन अब बागी खेमे के साथ खड़े हैं. टीएमसी के बागी सांसदों में इन तीनों ही नेताओं के नाम है, लेकिन उसके बाद भी खामोश हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही टीएमसी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है. एक-एक कर टीएमसी के विधायक और सांसद सियासी पाला बदलते जा रहे हैं. ममता बनर्जी के तमाम मजबूत सिपहसलार और बड़े सितारी भी बगावत की राह पर चल पड़े हैं.
ममता बनर्जी की पार्टी में कथित तौर पर असंतोष बढ़ने की चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार, 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिनमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस में बगावत की अटकलों के बीच 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम शामिल हैं. दावा है कि इन सांसदों ने अलग संसदीय गुट के गठन के समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं. सूची सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से टीएमसी के एक के बाद एक नेता ममता बनर्जी का साथ छोड़ते जा रहे हैं. टीएमसी टूट की कगार पर खड़ी, लेकिन अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा पूरी तरह खामोशी अख्तियार किए हुए हैं. शत्रुघ्न की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है?
फिल्म निर्माता और CBFC के पूर्व प्रमुख पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है. वह लिवर से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे और मुंबई के नानावती अस्पताल में भर्ती थे, जहां गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली.
सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी फिल्म 'सिस्टम' के प्रमोशन के दौरान पिता शत्रुघ्न सिन्हा के करियर में दखल और अपनी स्वतंत्रता पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उनके पिता राजनीति में व्यस्त हैं और फिल्मों में वापसी का कोई इरादा नहीं रखते.
बॉलीवुड डीवा सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी नई घरेलू नुस्खों की सीरीज शुरू की है, जिसमें उन्होंने कर्ली बालों के लिए बिना केमिकल और हीट के नेचुरल उपाय शेयर किए हैं.
शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि आज बंगाल में बहुत सारे टीएमसी के दोस्त जो भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे थे, वे साफ होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. भ्रष्टाचार की बातें और आरोपों के बाद यह स्थिति बनी है. यह एक ऐसा मामला है जहां वाशिंग मशीन की तरह धोकर दोस्तों को बीजेपी में स्वागत किया गया. इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की गूंज साफ सुनाई दे रही है और सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक ऐसा तमाशा चलता रहेगा.
शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी इसलिए छोड़ दी क्योंकि उनकी नजरों में अटल बिहारी वाजपेयी के समय में जहां लोकतंत्र था, अब तानाशाही का बोलबाला हो गया है. जब लालकृष्ण अडवाणी के दौर में पार्टी में असली लोकतंत्र देखा गया, तब से अब स्थिति बदल गई है. वर्तमान में ऐसा महसूस होता है कि पार्टी में तानाशाही बढ़ रही है और यह वह माहौल नहीं रहा जो कभी था. इसलिए मैंने भाजपा को छोड़ना सही समझा.
शत्रुघ्न सिन्हा बंगाल के वोटर बने.