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कुत्ते

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राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों (Street Dogs) को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. कुत्तों के काटने की घटनाएं, सार्वजनिक स्थलों पर डर का माहौल और प्रशासनिक नीतियों को लेकर बढ़ते विवाद ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क तक बहस का केंद्र बना दिया. बीते कुछ महीनों में आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं की संख्या सुप्रीम कोर्ट में तेजी से बढ़ी. अदालत ने भी टिप्पणी की है कि इस मुद्दे पर दायर याचिकाएं कई बार मानव मामलों से भी ज्यादा हो गई हैं, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाता है. कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन, स्टेरिलाइजेशन और पुनर्वास को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों से ठोस नीति की मांग की.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन भी तेज हो गए. पशु प्रेमी संगठनों और नागरिक समूहों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर “आवारा नहीं, हमारा है” जैसे नारों के साथ कुत्तों को हटाने के बजाय Animal Birth Control (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की. उनका कहना है कि सामूहिक हटाने या शेल्टर में बंद करने से समस्या का समाधान नहीं होगा.

इसी बीच सोशल मीडिया पर कुत्तों की गिनती और शिक्षकों को इसमें लगाने जैसी खबरें वायरल हुईं, जिन्हें दिल्ली सरकार और प्रशासन ने भ्रामक बताया. दिल्ली पुलिस ने अफवाह फैलाने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR दर्ज कर कंटेंट हटाने की कार्रवाई की. सरकार ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों को इस तरह के किसी काम में नहीं लगाया जा रहा है.

6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा के बाहर भाजपा के विधायकों ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ प्रदर्शन किया और उनसे माफी मांगने की मांग की. उधर आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को आवारा कुत्तों की निगरानी कराने के आदेश का विरोध करने वाले एक शिक्षक के निलंबन को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की.

 

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