मटर (Peas) एक प्रमुख दलहनी फसल है, जिसका वैज्ञानिक नाम Pisum sativum है. यह फैबेसी (Fabaceae) कुल का पौधा है और दुनिया के कई देशों में इसकी खेती की जाती है. भारत में मटर का उपयोग सब्जी और दाल दोनों रूपों में किया जाता है. इसकी हरी फलियों और दानों की बाजार में पूरे वर्ष मांग रहती है, जबकि सर्दियों के मौसम में ताजी मटर सबसे अधिक उपलब्ध होती है.
मटर की उत्पत्ति भूमध्यसागरीय क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में मानी जाती है. समय के साथ इसकी खेती यूरोप, एशिया और अन्य महाद्वीपों में फैल गई. भारत में मटर की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर होती है.
मटर एक वार्षिक (Annual) पौधा है, जिसकी ऊंचाई किस्म के अनुसार लगभग 30 सेंटीमीटर से लेकर 2 मीटर तक हो सकती है. इसकी बेलनुमा शाखाएं सहारे के साथ बढ़ती हैं. पौधे में सफेद, गुलाबी या बैंगनी रंग के फूल आते हैं, जिनसे बाद में हरी फलियां विकसित होती हैं. प्रत्येक फली में कई गोल दाने होते हैं, जिन्हें भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है.
भारत में मटर की बुवाई सामान्यतः अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है. यह ठंडे मौसम की फसल है और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में बेहतर उत्पादन देती है. फसल लगभग 60 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है, हालांकि यह अवधि किस्म और मौसम पर निर्भर करती है.
बाजार में मटर कई रूपों में उपलब्ध होती है. ताजी हरी मटर के अलावा फ्रोजन मटर, सूखी मटर और डिब्बाबंद (कैन्ड) मटर भी बेची जाती है. खाद्य उद्योग में इसका उपयोग मिक्स वेजिटेबल, सूप, स्नैक्स, तैयार खाद्य पदार्थ और विभिन्न प्रोसेस्ड उत्पादों के निर्माण में किया जाता है.
भारत में मटर की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग जलवायु और खेती की परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है. कृषि वैज्ञानिक लगातार ऐसी किस्मों पर काम कर रहे हैं, जो अधिक उत्पादन देने के साथ विभिन्न रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता रखती हैं.
लखनवी गोल समोसा एक शाही और क्रिस्पी स्नैक है, जिसे गेहूं के आटे, सूजी और ड्राई फ्रूट्स युक्त आलू-मटर मसाले से तैयार किया जाता है. पोटली के आकार में बना यह गोल समोसा शाम की चाय का मजा दोगुना कर देता है, इसे चाट स्टाइल में दही-चटनी के साथ भी परोसा जा सकता है. आइए आपको इसे बनाने का आसान तरीका बताते हैं.
Matar Makhana Sabji: अगर आप भी रोज एक जैसी दाल या सब्जी खाकर थक चुके हैं तो यहां हम आपको शादी वाली मटर-मखाने की सब्जी की रेसिपी बता रहे हैं. लेकिन खास बात है कि इसके लिए आपको किसी क्रीम, बटर या फिर काजू की जरूरत नहीं है.
शाम को चाय के साथ कुछ चटपटा खाने को मिल जाए तो मजा ही आ जाता है. दोपहर और रात के खाने के बीच का जो समय होता है, उसमें लगने वाली हल्की भूख में आप घर पर ही मटर चाट बनाकर खा सकते हैं. यह एक आसान और टेस्टी रेसिपी है.
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में खांगसर और शुगू गांव की पहाड़ियों पर बादल फटने से भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे आ गया. बाढ़ जैसे हालात में खेत, सड़कें और कृषि भूमि प्रभावित हुई. मटर, गोभी समेत नकदी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं. एक कार भी मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हुई, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई.