scorecardresearch
 

बारिश कम, तापमान ज्यादा! फरवरी में फसलों पर पड़ेगा असर... मौसम विभाग ने दी जानकारी

फरवरी के महीने में देश के कई हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है. इसका सीधा असर फसलों पर देखने को मिलने वाला है. सामान्य से अधिक तापमान रबी फसलों पर प्रभाव डाल सकता है. मौसम विभाग ने कई हिस्सों में कम बारिश होने की संभावना भी जताई है.

Advertisement
X
फरवरी का मौसम फसलों पर असर डाल सकता है. (Photo: PTI)
फरवरी का मौसम फसलों पर असर डाल सकता है. (Photo: PTI)

फरवरी में गर्मी सामान्य से अधिक रहने वाली है. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक फरवरी 2026 के दौरान देश के अधिकांश भागों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है. हालांकि, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत और मध्य भारत के कुछ इलाकों में तापमान सामान्य के आसपास रहने की संभावना जताई गई है. उत्तर-पश्चिम और उससे सटे मध्य भारत के कुछ हिस्सों में शीतलहर वाले दिनों की संख्या सामान्य से कम हो सकती है.

मौसम विभाग के मुताबिक, सामान्य से अधिक तापमान रबी फसलों की बढ़ोतरी को तेज कर सकता है और फसल अवधि को कम कर सकता है, खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में जिससे गेहूं और जौ जैसी फसलों में समय से पहले पकने की समस्या हो सकती है, जिससे बाली में दाने नहीं बनेंगे और दाने हल्के हो जाएंगे और पैदावार कम हो जाएगी.

वहीं सरसों, मसूर और मटर जैसी तिलहन और दलहनों में जल्दी फूल आ सकते हैं और वे समय से पहले पक सकती हैं, जिससे फली का विकास ठीक से नहीं होगा. बीज का आकार छोटा हो जाएगा और पैदावार कम होगी. इसी तरह सब्जियों से ले करके दूसरी फसलों पर भी बढ़ते तापमान का असर पड़ेगा. जो नकारात्मक प्रभाव उत्पादन पर डालेगा.

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक फरवरी में सामान्य से अधिक तापमान के चलते आम जैसी दूसरी फसलों की बागवानी पर भी असर पड़ सकता है.

Advertisement

कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने फरवरी 2026 के लिए जारी मासिक पूर्वानुमान में बताया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में इस दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत जारी इस आकलन के अनुसार, पूरे भारत में फरवरी महीने की औसत बारिश दीर्घावधि औसत (LPA) से कम, लगभग 81 प्रतिशत से नीचे रह सकती है.

IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों जिनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं. वहां बारिश सामान्य से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है. यह क्षेत्र आमतौर पर जनवरी से मार्च के बीच अपनी वार्षिक बारिश का महत्वपूर्ण हिस्सा प्राप्त करता है, जो रबी फसलों और जल संसाधन प्रबंधन के लिए बेहद अहम माना जाता है.

IMD ने बताया कि फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ला नीना की स्थिति बनी हुई है, लेकिन फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच इसके ENSO-न्यूट्रल अवस्था में बदलने की संभावना है. वहीं, हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति तटस्थ बनी रहने के संकेत हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement