scorecardresearch
 

बोल नहीं सकता था शख्स, दिमाग में लगी चिप और पार्टनर से कहा I Love You, मस्क ने शेयर किया वीडियो

एलॉन मस्क की कंपनी Nuralink काफी समय से ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस चिप बना रही है. फिलहाल इसका क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है. इसी दौरान एक वीडियो आया है. वीडियो में ना बोलने वाला शख्स भी I love you एक्सप्रेस करता हुआ दिख रहा है.

Advertisement
X
न्यूरालिंक चिप दिमाग में लगने के बाद एक्सप्रेस कर पाया शख्स
न्यूरालिंक चिप दिमाग में लगने के बाद एक्सप्रेस कर पाया शख्स

सोचिए, कोई इंसान बोल नहीं सकता, लेकिन अपने दिमाग में सोची बात सामने वाले तक आवाज के जरिए पहुंचा सकता है. Elon Musk की कंपनी Neuralink ने हाल ही में ऐसा ही एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक शख्स बिना मुंह खोले अपने पार्टनर से बात करता दिखाई देता है. वीडियो में कंप्यूटर से आवाज आती है और उसमें कहा जाता है, 'I love you'

Neuralink ने इस वीडियो को सिर्फ 23 सेकंड का रखा है और इसे A beautiful surprise कैप्शन के साथ शेयर किया. वीडियो तेजी से चर्चा में है और वायरल हो रहा है. दरअसल एलॉन मस्क की न्यूरालिंक नाम की कंपनी काफी सालों से ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस बना रही है. ये डिवाइस बाल से भी बारीक होता है जिसे दिमाग में इंजेक्ट किया जाता है. 

यह भी पढ़ें: 25 साल की उम्र में बड़ा कारनामा, AI ऐप बना कर कमाए 50 हजार करोड़ रुपये! एलॉन मस्क ने खरीदा

इस चिप और टेक से ऐसे लोग भी एक्सप्रेस कर पाएंगे जो किसी बिमारी की वजह से बोल नहीं पाते. काफी समय से इसाक क्लिनिकल ट्रायल भी चल रहा है. 

Neuralink ने इस शख्स की पहचान या उसकी बीमारी के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उसकी आवाज पूरी तरह वापस आ गई है. असल में तकनीक दिमाग में पैदा होने वाले संकेतों को पढ़कर उन्हें कंप्यूटर के जरिए शब्दों और आवाज में बदल रही है. 

Advertisement

दिमाग में लगी चिप आखिर करती क्या है?

Neuralink का N1 एक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस है. आसान भाषा में समझें तो यह दिमाग और कंप्यूटर के बीच एक रास्ता बनाता है. जब कोई व्यक्ति बोलने के बारे में सोचता है, तो दिमाग के कुछ हिस्सों में खास तरह के संकेत बनते हैं. सामान्य स्थिति में ये साइन मुंह, जीभ और वोकल कॉर्ड तक पहुंचते हैं और इंसान बोल पाता है. लेकिन ALS, स्ट्रोक या रीढ़ की गंभीर चोट जैसी स्थितियों में दिमाग का यह सिग्नल सिस्टम काम नहीं कर पाता, जबकि व्यक्ति के पास बोलने की इच्छा और सोचने की क्षमता बनी रह सकती है.

Neuralink का VOICE ट्रायल इसी समस्या पर काम कर रहा है. कंपनी के मुताबिक N1 इम्प्लांट दिमाग से आने वाले इन संकेतों को पकड़कर उन्हें टेक्स्ट या सीधे आवाज में बदलने की कोशिश करता है.

यानी इसे ऐसे समझिए कि इंसान बोल नहीं पा रहा, लेकिन दिमाग में शब्द बनाने की कोशिश कर रहा है. चिप उन संकेतों को पढ़ती है और सॉफ्टवेयर उन्हें आवाज में बदल देता है.

यह भी पढ़ें: iPhone 18 Pro बिक्री के दिन सैमसंग ने दिया झटका, 20 हज़ार तक महंगे किए फोन

ये पहली बार नहीं है Neuralink पिछले कुछ समय से अपने ब्रेन इम्प्लांट के अलग-अलग इस्तेमाल दिखाता रहा है. कंपनी के क्लिनिकल ट्रायल में लोग सिर्फ सोचकर कंप्यूटर कर्सर और दूसरे डिवाइस कंट्रोल कर चुके हैं.

Advertisement

अब फोकस बातचीत पर है. Neuralink के मुताबिक उसके VOICE प्रोग्राम में गंभीर रूप से बोलने में असमर्थ लोगों के लिए N1 इम्प्लांट की मदद से बातचीत संभव बनाने की जांच की जा रही है. इस ट्रायल में ALS, स्ट्रोक और रीढ़ की चोट जैसी स्थितियों से जूझ रहे लोगों को शामिल किया जा रहा है. 

इससे पहले भी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के जरिए लोगों को बोलने में मदद मिली है. अमेरिका में साइंटिस्ट्स ने ऐसे सिस्टम बनाए हैं जो दिमाग के संकेतों को शब्दों में बदल सकते हैं. जुलाई 2026 में NIH ने भी ऐसे ब्रेन-कंप्यूटर सिस्टम के बारे में बताया था, जिसके जरिए लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति घर पर रहते हुए बोल पाया. 

अब दिमाग से सिर्फ आवाज नहीं, हाव-भाव भी समझे जा रहे हैं

Neuralink के वीडियो के बीच एक और बड़ी रिसर्च सामने आई है. वैज्ञानिकों ने ऐसा ब्रेन इम्प्लांट सिस्टम दिखाया है जो व्यक्ति के इरादे से जुड़े शब्दों के साथ-साथ हाथों के इशारों को भी समझ सकता है.

इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दिमाग की ऐक्टिविटीज को पढ़कर शब्दों को स्क्रीन पर दिखाती है और एक डिजिटल अवतार के जरिए इशारे भी करवाती है. रिसर्च 14 सितंबर को नेचर न्यूरोसाइंस जर्नल में पब्लिश हुई. 

इसका मतलब आने वाले समय में ऐसी तकनीक सिर्फ क्या कहना है समझने तक के लिए नहीं होगी, बल्कि यह यह भी समझने की कोशिश कर सकती है कि इंसान किस तरह अपनी बात कहना चाहता है. लेकिन इसे इंसान की आवाज वापस आना कहना जल्दबाजी होगी

Advertisement

Neuralink का वीडियो निश्चित तौर पर बड़ा संकेत है, लेकिन इसे लेकर बहुत बड़े दावे करना अभी सही नहीं होगा. कंपनी खुद N1 को जांच के दौर में मौजूद तकनीक बताती है. इसके क्लिनिकल ट्रायल अभी चल रहे हैं और Neuralink की वेबसाइट के मुताबिक यह सिस्टम अभी जांच के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. 

इस वीडियो की अहमियत कम नहीं है. जिन लोगों के लिए बोलना, हाथ-पैर चलाना या सामान्य तरीके से बातचीत करना मुश्किल हो चुका है, उनके लिए दिमाग और कंप्यूटर के बीच सीधा कनेक्शन एक नया रास्ता खोल सकता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement