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25 साल की उम्र में बड़ा कारनामा, AI ऐप बना कर कमाए 50 हजार करोड़ रुपये! एलॉन मस्क ने खरीदा

पॉपुलर ऐप प्लेटफॉर्म कर्सर को Space X खरीद रहा है. ये एलॉन मस्क की कंपनी है. कर्सर ऐप को चार लड़कों ने मिल कर बनाया था. महज 18 साल की उम्र में माइकल MIT में फर्स्ट ईयर कंपलीट कर चुके थे और बाद में कॉलेज छोड़ दिया.

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कर्सर खरीद रहे हैं एलॉन मस्क
कर्सर खरीद रहे हैं एलॉन मस्क

25 साल की उम्र में कोई क्या करता है? नौकरी ढूंढता है, करियर बनाने की सोचता है. कुछ लोग पढ़ाई भी कर रहे होते हैं. लेकिन माइकल ट्रुएल ने इस उम्र में अपनी कंपनी को 60 अरब डॉलर यानी करीब 5 लाख करोड़ रुपये में बेच दिया.

इस कंपनी के खरीदार हैं दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क. दरअसल Space X ने एआई कंपनी Cursor को खरीदने का ऐलान किया है. 

SpaceX के साथ हुई इस डील ने उन्हें रातों-रात टेक दुनिया का नया स्टार बना दिया है. लेकिन यह कहानी रातों-रात नहीं बनी. दरअसल माइकल ट्रुएल का सफर बहुत पहले शुरू हो गया था, जब वो सिर्फ एक स्टूडेंट थे और कोडिंग उनके लिए सिर्फ पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि जुनून बन चुकी थी. चार दोस्तों ने मिल कर एख कंपनी बनाई जिसके तहत Cursor ऐप आता है. 

छोटी उम्र से ही करते थे कोडिंग

माइकल ने बहुत छोटी उम्र में ही कंप्यूटर के साथ खेलना शुरू कर दिया था. जहां बाकी लोग ऐप्स यूज करते थे, माइकल यह समझने में लगे रहते थे कि ऐप्स बनते कैसे हैं. यही क्यूरियोसिटी धीरे-धीरे स्किल में बदल गई.

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पढ़ाई के दौरान उन्हें Google जैसी बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप का मौका मिला. यहां उन्होंने देखा कि बड़ी कंपनियां कैसे काम करती हैं, कैसे प्रोडक्ट बनते हैं और कैसे टेक्नोलॉजी दुनिया बदलती है.

स्कूल के दिनों में ही उन्होंने कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे यह सिर्फ एक स्किल नहीं रही, बल्कि उनका पैशन बन गई. जब वह कॉलेज पहुंचे, तब तक उनके पास बेसिक कोडिंग की समझ काफी मजबूत हो चुकी थी. उन्होंने MIT जैसे बड़े संस्थान में एडमिशन लिया, जो दुनिया के सबसे बड़े टेक यूनिवर्सिटीज में से एक माना जाता है.

MIT छोड़ कर लिया बड़ा रिस्क

MIT में पढ़ाई के दौरान माइकल को यह समझ आने लगा कि वह जिस स्पीड से सीखना चाहते हैं, वह ट्रेडिशनल पढ़ाई के सिस्टम में मुमकिन नहीं है. क्लासरूम से ज्यादा उन्हें रियल वर्ल्ड प्रॉब्लम्स में दिलचस्पी थी.

इसी दौरान उन्हें Google में इंटर्नशिप का मौका मिला. वहां उन्होंने पहली बार बड़े स्तर पर प्रोडक्ट डेवलपमेंट को देखा. लेकिन यही वह समय था जब उन्होंने कॉलेज बीच में ही छोड़ने का फैसला किया. 

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यह फैसला आसान नहीं था. MIT जैसी यूनिवर्सिटी छोड़ना मतलब एक सुरक्षित फ्यूचर को छोड़ना. लेकिन माइकल को यकीन था कि अगर उन्हें कुछ बड़ा करना है, तो उन्हें अपने आइडिया पर पूरा फोकस करना होगा. और यहीं से शुरू हुई Cursor की कहानी.

माइकल ने ट्रेडिशनल रास्ता छोड़कर रिस्क लिया. उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अपना प्रोडक्ट बनाने पर फोकस किया. यही प्रोडक्ट आगे चलकर Cursor बना.

कर्सर को सिर्फ माइकल ने अकेले नहीं बनाया था, बल्कि यहां भारतीय मूल के अमन सेंगर भी इस ऐप के को-फाउंडर हैं. दूसरे को फाउंडर का नाम आसिफ है जो पाकिस्तानी मूल के हैं. टोटोल चार लड़कों ने इसे मिल कर बनाया था और चार से साल में वो अरबति भी बन गए. चारों ही फिलहाल 20s में हैं यानी काफी यंग हैं.

Cursor और AI

शुरुआत आसान नहीं थी. Cursor एक छोटा AI टूल था, जिसे बहुत कम लोग जानते थे. लेकिन माइकल का फोक डेवलपर्स की सबसे बड़ी समस्या को हल करने का था.  कोडिंग में समय लगता है, गलतियां होती हैं, और काम धीमा होता है. माइकल ने सोचा कि अगर AI को इसमें जोड़ दिया जाए, तो यह पूरा प्रोसेस बदल सकता है.

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जेनेरेटिव AI के समय में कर्सर यूज करके दुनिया भर में करोड़ों ऐप्स बनाए जाते हैं. दो तीन साल तक वाइब कोडिंग में कर्सर बड़ा नाम रहा है. हालांकि धीरे धीरे मार्केट में कर्सर जैसे और भी प्लेटफॉर्म आए, लेकिन कर्सर डेवेलपर्स का चहीता बना रहा. 

ये चारों दोस्त MIT से पढ़े हैं और AI बूम से पहले से ही वो AI पर काम कर रहे थे. 2022 में ChatGPT लॉन्च हुआ था, लेकिन ये चारों दोस्त 2021 से AI ऐप पर काम कर रहे थे. 2022 में उन्होंने Cursor तैयार किया.

AI टूल और Space X

धीरे-धीरे यह टूल डेवलपर्स के लिए एक असिस्टेंट बन गया. यह कोड समझता था, सुझाव देता था और काम को तेज कर देता था. जैसे-जैसे AI का ट्रेंड बढ़ा, Cursor की वैल्यू भी बढ़ती गई. बड़ी कंपनियां इसे अपनाने लगीं और स्टार्टअप तेजी से स्केल होने लगा. कुछ ही सालों में यह छोटा आइडिया एक मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी में बदल गया. और फिर आया वो मोमेंट जिसने सब बदल दिया.

SpaceX की नजर Cursor पर पड़ी. एलन मस्क पहले ही AI को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बता चुके हैं. SpaceX अपने सिस्टम को और स्मार्ट बनाना चाहती थी, और Cursor इसके लिए एक परफेक्ट फिट था. करीब 60 अरब डॉलर की इस डील के साथ माइकल ट्रुएल का नाम दुनिया के सबसे युवा अरबपतियों में शामिल हो गया.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील के बाद उनकी नेटवर्थ करीब 3 से 5 अरब डॉलर यानी 25,000 करोड़ से 40,000 करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकती है यह सिर्फ शुरुआत है. क्योंकि यह डील स्टॉक में भी है, यानी अगर SpaceX आगे और बढ़ती है, तो माइकल की दौलत भी बढ़ती रहेगी.

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