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Amazon पर 'राम मंदिर प्रसाद' के नाम पर धोखा, लगा भारी जुर्माना

अयोध्या के राम मंदिर के प्रसाद का हवाला ऑनलाइन प्रसास बेचने वाले प्लेटफॉर्म को पैनल्टी का सामना करना पड़ा है. भारत सरकार की एजेंसी केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ऐमेजॉन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. आइए इसके बारे में डिटेल्स में जानते हैं.

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ऐमेजॉन पर राम मंदिर प्रसाद केस में लगा जुर्माना. (Photo: Unsplash)
ऐमेजॉन पर राम मंदिर प्रसाद केस में लगा जुर्माना. (Photo: Unsplash)

Amazon India पर राम मंदिर प्रसाद के नाम पर लोगों को धोखा दिया जा रहा है, जिसके बाद भारत सरकार की एजेंसी केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ऐमेजॉन सेलर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड पर भारी जुर्माना लगाया है. एजेंसी ने पाया है कि ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर साधारण मिठाई को राम मंदिर प्रसाद के नाम पर सेल किया जा रहा था. 

ऐमेजॉन के सेलर ने राम मंदिर ट्रस्ट से भी इसको लेकर कोई अप्रूवल नहीं लिया था. ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म एक मिठाई सेल कर रहा था, जिसपर 'राम मंदिर प्रसाद' का टैग इस्तेमाल किया था.  

ऑनलाइन दुनिया में कई ऐसे सेलर हैं, जो दावा करते हैं कि वह  अयोध्या राम मंदिर का प्रसाद सेल कर रहे हैं. इसके लिए वह अलग-अलग दावे भी करते हैं. 

अमेजन पर सामान्य मिठाइयों को अयोध्या राम मंदिर का असली प्रसाद बताकर बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण यानी CCPA ने अमेजन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण ने कंपनी को 15 दिनों के भीतर यह रकम जमा करने का आदेश दिया है.

क्या है पूरा मामला

मामला उन मिठाइयों से जुड़ा है, जिन्हें अमेजन पर ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के नाम से बेचा जा रहा था. इन उत्पादों को ‘चंडू ट्रेडिंग कंपनी’ ने ‘बिहारी ब्रदर्स’ ब्रांड के तहत बेचा था. इनमें घी के लड्डू, खोया लड्डू, बूंदी लड्डू और गाय के दूध के पेड़े शामिल थे.

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इन उत्पादों की पैकेजिंग और बिक्री में ‘श्री राम मंदिर अयोध्या प्रसाद’ के साथ ‘भगवान राम के आशीर्वाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. लेकिन इन मिठाइयों को बेचने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से कोई प्रमाणित अनुमति नहीं ली गई थी.

भक्तों को असली प्रसाद होने का हो सकता था भ्रम

CCPA ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है. प्राधिकरण के मुताबिक, जब किसी उत्पाद पर अयोध्या राम मंदिर का प्रसाद लिखा हो तो भक्त स्वाभाविक रूप से उसे मंदिर का असली प्रसाद मान सकते हैं.

यही वजह है कि बिना अनुमति मंदिर के नाम और प्रसाद से जुड़े शब्दों का व्यावसायिक इस्तेमाल गंभीर मामला माना गया. प्राधिकरण ने कहा कि इस तरह की बिक्री से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं. यह कार्रवाई कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की जनवरी 2024 में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुई.

सिर्फ राम मंदिर नहीं, दूसरे मंदिरों पर भी लागू होगा आदेश

प्राधिकरण ने अपने निर्देश का दायरा देश के 10 प्रमुख धार्मिक संस्थानों तक बढ़ा दिया है.अब इन संस्थानों की प्रमाणित अनुमति के बिना उनके नाम से ‘प्रसाद’, ‘महाप्रसाद’ या ‘भोग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके कोई उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं किया जा सकेगा.

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इसमें राम जन्मभूमि, तिरुपति देवस्थानम, माता वैष्णो देवी और जगन्नाथ मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक संस्थान भी शामिल हैं. रिपोर्ट में काशी विश्वनाथ मंदिर का भी नाम दिया गया है.

यानी कोई सेलर सामान्य मिठाई या दूसरा उत्पाद बनाकर उसे किसी बड़े मंदिर का प्रसाद बताकर ऑनलाइन बेचता है तो सिर्फ उत्पाद के नाम या पैकेजिंग में मंदिर का नाम जोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा. उसके पास संबंधित धार्मिक संस्था की प्रमाणित परमिशन होनी जरूरी होगी.

अमेजन सिर्फ बिचौलिया कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकता

CCPA ने अमेजन की भूमिका को लेकर भी अहम बात कही है. प्राधिकरण के मुताबिक, कंपनी केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती कि वह सिर्फ विक्रेता और ग्राहक के बीच एक मध्यस्थ है.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अपने यहां बिकने वाले ऐसे उत्पादों को लेकर जरूरी जानकारी स्पष्ट रखनी होगी. अमेजन को विक्रेताओं और शिकायत अधिकारी की पूरी जानकारी भी अपने प्लेटफॉर्म पर साफ तौर पर दिखाने का निर्देश दिया गया है.

 

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