एशियन गेम्स की टेनिस टीम को लेकर विवाद अब और गहरा गया है. भारतीय टेनिस के पांच खिलाड़ी मानस धामने, वैष्णवी अडकर, सहज यमलापल्ली, वैदेही चौधरी और प्रार्थना थोंबारे को एशियाई खेलों की टीम में जगह नहीं मिली. अब खेल मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने साफ किया है कि इन खिलाड़ियों के नाम ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) की ओर से भेजी गई लंबी सूची में ही नहीं थे.
SAI के एक सूत्र ने PTI से कहा, 'इनके नाम मंत्रालय को IOA की ओर से भेजी गई अंतिम सूची में नहीं मिले. दरअसल, AITA ने IOA को जो लंबी सूची भेजी थी, उसमें भी इनके नाम नहीं थे.'
नियमों की कैंची, पांच खिलाड़ियों पर चला वार
मंत्रालय ने एशियन गेम्स के लिए चयन का पैमाना पहले ही तय कर रखा था. सिंगल्स में खिलाड़ियों का एशिया की रैंकिंग में टॉप-6 में होना जरूरी था, जबकि डबल्स के लिए टॉप-8 का मानदंड रखा गया था. इसके लिए पिछले 12 महीनों के प्रदर्शन को आधार बनाया गया.
मंत्रालय का तर्क है कि इन खिलाड़ियों की हालिया अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग और प्रदर्शन पदक जीतने की पर्याप्त संभावना नहीं दिखाते. ऐसे में तय मानदंड से बाहर जाकर उन्हें टीम में शामिल करना चयन प्रक्रिया की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर सकता है.
बोपन्ना ने उठाया सवाल, मंत्रालय ने दिया जवाब
दो बार के एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट रोहन बोपन्ना ने खिलाड़ियों को बाहर किए जाने पर तीखी नाराजगी जताई थी. उनका कहना था कि जो लोग खुद उस स्तर पर नहीं खेले, उन्होंने कागज पर बैठकर खिलाड़ियों का भाग्य तय कर दिया.
बोपन्ना ने कहा था कि इस तरह खिलाड़ियों को मौका देने से इनकार करना खेल राष्ट्र बनाने के सिद्धांतों के खिलाफ है.
लेकिन SAI सूत्र ने पलटवार करते हुए कहा, 'एक्सपोजर ट्रिप ITF और Challenger सर्किट के लिए होते हैं, एशियन गेम्स के लिए नहीं.'
सूत्र ने यह भी कहा कि अगर एशिया में 25 से 40 के बीच रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के लिए नियमों में मनमानी छूट दी गई तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता खत्म होगी और दूसरे खेल महासंघ भी ऐसे फैसलों को चुनौती दे सकते हैं.
सहज भारत की नंबर-1, फिर भी टीम से बाहर
सहज यमलापल्ली फिलहाल भारत की नंबर-1 महिला सिंगल्स खिलाड़ी हैं और उनकी विश्व रैंकिंग 344 बताई गई है. वैष्णवी अडकर 388वीं रैंकिंग के साथ भारत की नंबर-2 महिला सिंगल्स खिलाड़ी हैं.
दूसरी ओर प्रार्थना थोंबारे 2014 एशियन गेम्स की कांस्य पदक विजेता रह चुकी हैं. वैदेही चौधरी दो बार की राष्ट्रीय चैम्पियन हैं, जबकि 18 साल के मानस धामने Challenger स्तर पर फाइनल खेल चुके हैं.
यानी मामला सिर्फ रैंकिंग का नहीं है- अनुभव, राष्ट्रीय रैंकिंग और भविष्य की संभावनाओं के बावजूद इन पांच खिलाड़ियों के नाम टीम में नहीं हैं.
डबल्स पर भी उठे सवाल
प्रार्थना थोंबारे और वैदेही चौधरी को संभावित रूप से महिला डबल्स में जोड़ी बनानी थी. लेकिन मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने इस पर भी सवाल उठाया कि दोनों ने अब तक साथ में कोई मैच नहीं खेला है.
सूत्र के मुताबिक, ऐसे में एशियन गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में उनके बीच प्रतिस्पर्धी साझेदारी की तैयारी और वास्तविक पदक संभावना पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
एशियन गेम्स टीम में सिर्फ नागल सिंगल्स खिलाड़ी
भारत की अंतिम टेनिस टीम में पुरुष सिंगल्स के लिए सुमित नागल को जगह मिली है. रामकुमार रामनाथन, साकेत माइनेनी, यूकी भांबरी, ऋतुजा भोसले और अंकिता रैना डबल्स टीमों का हिस्सा हैं.
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि खिलाड़ियों के दबाव के बावजूद तय चयन मानदंड में कोई ढील नहीं दी जाएगी.
टेनिस को 2026-27 के Annual Competition and Training Calendar (ACTC) में 10.05 करोड़ रुपये का बजट मिला है. इसमें दो करोड़ रुपये से ज्यादा रकम विदेशी ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर खर्च की जानी है.
यानी सरकार का संदेश साफ है- एशियन गेम्स को ‘एक्सपोजर’ का मंच नहीं, पदक की लड़ाई माना जाएगा. लेकिन इस सख्त नीति ने चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के मौके को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है.