चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 5-3 से हराकर दूसरे दौर में पहुंची भारतीय पुरुष हॉकी टीम के सामने अब असली परीक्षा है. नए प्रारूप के दूसरे चरण में 22 अगस्त को भारत का सामना पेरिस ओलंपिक चैम्पियन नीदरलैंड से होने की संभावना है. दुनिया की नंबर-2 टीम के खिलाफ उसके घरेलू मैदान पर होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए ऐसा होगा, जहां छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है.
पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने शुरुआत में 3-0 और फिर 4-1 की बढ़त बनाकर दबदबा कायम किया, लेकिन इसके बाद खेल पर उसकी पकड़ ढीली पड़ गई और पाकिस्तान को वापसी का मौका मिला. यही कमजोरी नीदरलैंड जैसी टीम के खिलाफ खतरनाक साबित हो सकती है.
भारत ने पूल डी में वेल्स को 3-1 और पाकिस्तान को 5-3 से हराया, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ उसे 2-4 से हार मिली. नए प्रारूप के तहत पूल डी की शीर्ष दो और पूल ए की शीर्ष दो टीमें मिलकर पूल ई बनाएंगी. इस पूल की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. इसी तरह पूल बी और सी की शीर्ष दो-दो टीमें पूल एफ में खेलेंगी और वहां से भी दो टीमें अंतिम चार में जाएंगी.
भारत के लिए मुश्किल यह है कि पहले चरण में इंग्लैंड से हार के कारण वह दूसरे दौर में उसके खिलाफ दोबारा नहीं खेलेगा, जबकि इंग्लैंड अपने साथ पहले चरण के तीन अंक लेकर पहुंचेगा. ऐसे में भारत को आगे बढ़ने के लिए बाकी दोनों मुकाबलों में जीत हासिल करनी होगी.
पूल ए में दुनिया की नंबर-2 टीम नीदरलैंड फिलहाल शीर्ष पर है और गुरुवार को अपने आखिरी ग्रुप मैच में उसका सामना जापान से होगा. जापान अपने दोनों मुकाबले हारकर पहले ही दौड़ से बाहर हो चुका है, इसलिए नीदरलैंड का शीर्ष पर बने रहना लगभग तय माना जा रहा है.
दूसरे मैच में विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर मौजूद अर्जेंटीना का सामना 11वें नंबर की न्यूजीलैंड से होगा. दोनों टीमें नीदरलैंड से हार चुकी हैं और तीन-तीन अंक पर हैं. बेहतर गोल अंतर के कारण फिलहाल अर्जेंटीना दूसरे स्थान पर है. इस मुकाबले से दूसरे दौर में पहुंचने वाली दूसरी टीम तय होगी.
घर में नीदरलैंड को हराना बड़ी चुनौती
तीन ओलंपिक और तीन विश्व कप खिताब जीत चुकी नीदरलैंड को उसके गढ़ में हराना भारत के लिए आसान नहीं होगा. इसी मैदान पर 1973 में नीदरलैंड ने पहली बार विश्व कप जीता था. इसके बाद 1990 और 1998 में भी उसने विश्व खिताब अपने नाम किया. पिछले चार विश्व कप में भी डच टीम दो रजत और दो कांस्य पदक जीत चुकी है.
नीदरलैंड सिर्फ एक मजबूत टीम नहीं, बल्कि हॉकी की गहरी संस्कृति वाला देश है. हर मुकाबले में 10 हजार दर्शकों की क्षमता वाला स्टेडियम लगभग पूरी तरह भरा रहता है और चारों ओर नारंगी रंग नजर आता है. इस बार उस नारंगी सैलाब के बीच भारतीय टीम को अपने खेल की असली परीक्षा देनी होगी.
हरमनप्रीत की चेतावनी, डिफेंस सुधारना होगा
पाकिस्तान पर जीत के बावजूद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने साफ माना था कि टीम को अपने डिफेंस में सुधार करना होगा. उन्होंने कहा था कि 25 मीटर के दायरे में गेंद मिलने पर उसे अपने कब्जे में रखना होगा और पाकिस्तान को मिले मौकों से सबक लेना होगा.
दरअसल, अच्छी शुरुआत के बाद तीसरे या चौथे क्वार्टर में भारत की रफ्तार और एकाग्रता में गिरावट इंग्लैंड और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ दिखाई दी. इंग्लैंड के खिलाफ भारत हाफटाइम तक 2-1 से आगे था, लेकिन तीसरे क्वार्टर में दो गोल गंवा बैठा. पाकिस्तान के खिलाफ भी दूसरे क्वार्टर में महज चार मिनट के भीतर भारत ने उसे दो गोल करने के मौके दे दिए.
कोच क्रेग फुल्टन ने भी पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे क्वार्टर को टीम का कमजोर दौर माना था. हालांकि उनका कहना था कि इतने बड़े मुकाबलों में कई बार भावनाएं खेल पर हावी हो जाती हैं.
अब नीदरलैंड के खिलाफ भारत को इसी कमजोरी से पार पाना होगा. यहां बढ़त बनाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पूरे 60 मिनट तक दबाव और संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा.
जून की जीत से बढ़ा आत्मविश्वास
भारत के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बात यह है कि उसे नीदरलैंड के खिलाफ हालिया जीत का आत्मविश्वास हासिल है. जून में रोटरडम में एफआईएच प्रो लीग 2025-26 के आखिरी मैच में भारत ने नीदरलैंड को 3-2 से हराया था. पहला मुकाबला इसी अंतर से गंवाने के बाद भारत ने जुगराज सिंह, अभिषेक और राजिंदर सिंह के गोलों की मदद से शानदार वापसी की थी.
इन तीनों में अभिषेक इस समय शानदार फॉर्म में हैं. पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने दो बेहतरीन फील्ड गोल करके भारत की जीत की नींव मजबूत की थी. कप्तान हरमनप्रीत भी टूर्नामेंट में अब तक 5 गोल के साथ सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों में हैं और नीदरलैंड के खिलाफ उनसे एक बार फिर बड़ी भूमिका की उम्मीद होगी.
इसके अलावा 420 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह और 291 मैचों का अनुभव रखने वाले फॉरवर्ड मनदीप सिंह पर भी जिम्मेदारी होगी.