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सावधान! बॉस बनकर रुपये ठग रहे स्कैमर्स, ऐसे बना रहे हैं लोगों को शिकार

साइबर ठगों के बैंक खाते में सेंधमारी करने का एक नया तरीका खोज निकाला है, जिसका नाम बॉस स्कैम है. इस तरह के स्कैम में विक्टिम को मैसेज किया जाता है, जिसके बाद किसी इमरजेंसी का झांसा दिया जाता है. इसके बाद एक रकम मांगी जाती है, बॉस का नाम सुनकर कई लोग रुपये आसानी से दे देते हैं.

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बॉस स्कैम के तहत कई मोटी रकम भी मांग ली जाती है. (Photo: AI Generated)
बॉस स्कैम के तहत कई मोटी रकम भी मांग ली जाती है. (Photo: AI Generated)

साइबर ठगी के एक नए और बेहद खतरनाक तरीके ने देशभर में कंपनियों के सीनियर ऑफिसर्स, चार्टेर्ड अकाउंटेंट्स, सीएफओ और वित्तीय विभाग से जुड़े कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है. साइबर ठग अब WhatsApp, SMS और ई-मेल के जरिए अकाउंट स्टेटमेंट या सरकारी एजेंसी के नाम पर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही कंप्यूटर और वॉट्सऐप अकाउंट उनके कंट्रोल में जा सकता है.

इस पूरे खेल को साइबर सुरक्षा एजेंसियां ‘Boss Scam’ या CEO Fraud के नाम से जाना जाता है. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी I4C, गृह मंत्रालय की साइबर अपराध नियंत्रण इकाई ने इस खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है.

हाल के दिनों में दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों से इस तरह के एक जैसे मामले सामने आए है. I4C के मुताबिक नैशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस तरह की शिकायतों में इजाफा हुआ है. 

एक Zip फाइल और पूरा वॉट्सऐप अकाउंट खतरे में

इस साइबर ठगी की शुरुआत बेहद सामान्य दिखाई देने वाले मैसेज से होती है. पीड़ित को WhatsApp, SMS या ई-मेल पर ‘Statement of Account.zip’, तारीख के साथ ‘0714 Statement of Account.zip’, ‘RBI.zip’ या ‘MCA.zip’ जैसी फाइल भेजी जाती है.

कई मामलों में मैसेज इस तरह तैयार किया जाता है कि वह किसी कंपनी के नियमित अकाउंट स्टेटमेंट जैसा लगे. वहीं कई मैसेज में RBI यानी भारतीय रिजर्व बैंक या MCA यानी कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से तत्काल अनुपालन करने का दावा किया जाता है.  साइबर अपराधी जानबूझकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति बिना ज्यादा सोच-विचार किए फाइल खोल दे. 

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I4C के मुताबिक इन ZIP फाइलों के भीतर एक खतरनाक विंडोज एक्जिक्यूटेबल यानी .exe फाइल और उसके साथ एक.dll फाइल होती है. जैसे ही पीड़ित इसे Windows कंप्यूटर या लैपटॉप पर एक्सट्रैक्ट करके खोलता है, सिस्टम में Trojan प्रकार का मैलवेयर सक्रिय हो जाता है.

WhatsApp Web को बनाया जा रहा निशाना

इस हमले की सबसे गंभीर बात यह है कि मैलवेयर सिर्फ कंप्यूटर को संक्रमित करने तक सीमित नहीं रहता. यह पीड़ित के सक्रिय वॉट्सऐप वेब सेशन को हाईजैक कर सकता है. इसके बाद साइबर अपराधी पीड़ित के WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल उसी व्यक्ति के कॉन्टैक्ट्स और ग्रुपों तक पहुंचने के लिए करते हैं.संक्रमित वॉट्सऐप अकाउंट से वही मैलिशियस फाइल आगे दूसरे लोगों को भेजी जाती है.

कई बार संदेश में लिखा होता है कि फाइल को कंपनी के Finance Manager से वेरिफिकेशन के लिए साझा करें और कंप्यूटर पर खोलें. इस तरह एक संक्रमित कंप्यूटर से शुरू हुआ हमला धीरे-धीरे पूरी कंपनी के नेटवर्क और कर्मचारियों तक पहुंच सकता है. यानी जिस व्यक्ति को फाइल भेजी गई, उसके भरोसेमंद वॉट्सऐप अकाउंट से वही फाइल आगे भेजे जाने के कारण दूसरे लोग भी इसे असली समझकर खोल सकते हैं. यही इस पूरे अभियान को बेहद खतरनाक बनाता है.

‘बॉस’ बनकर होती है पैसे की मांग

साइबर ठगों का अंतिम लक्ष्य अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी होता है. I4C के मुताबिक, इस चरण में अपराधी किसी बड़े अधिकारी या कंपनी के CEO के वास्तविक वॉट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं. कुछ मामलों में हमलावर अपने कंट्रोल वाले नंबर को मोबाइल में ‘CEO’ के नाम से सेव कर देते हैं.

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इसके बाद कंपनी के अकाउंट्स या फाइनेंस कर्मचारियों को बेहद जरूरी और तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है.मैसेज में कहा जा सकता है कि किसी खाते में तुरंत रकम ट्रांसफर करनी है या किसी विशेष बैंक अकाउंट में भुगतान करना है.

कंपनी का कर्मचारी जब मैसेज को अपने वरिष्ठ अधिकारी का समझकर निर्देश का पालन करता है तो रकम साइबर अपराधियों के म्यूल बैंक अकाउंट्स में पहुंच जाती है. इसीलिए इसे ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है. क्योंकि अपराधी कंपनी के ‘बॉस’ या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का फायदा उठाकर कर्मचारियों को ठगी का शिकार बनाते हैं.

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