भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट कोलंबो के एसएससी मैदान में 23 अगस्त (रविवार) से होना है. लेकिन इस मुकाबले से पहले यशस्वी जायसवाल अपनी एक खास कमजोरी पर जोरदार मेहनत कर रहे हैं.
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में खेला जाना है. मुकाबले से दो दिन पहले यशस्वी जायसवाल ने नेट्स में अपनी उस कमजोरी पर खास तौर पर काम किया, जो गॉल टेस्ट में फिर सामने आई थी. ऑफ स्टंप के बाहर तेज गेंदबाजों की गेंद पर कट शॉट खेलने की उनकी आदत इन दिनों परेशानी बनती दिख रही है.
भारत के युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल अब तक 30 टेस्ट मैच खेल चुके हैं और उन्होंने हर टेस्ट अलग-अलग मैदान पर खेला है. टेस्ट डेब्यू से लेकर अब तक उनका सफर कैरेबियाई देशों, साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, इंग्लैंड और अब श्रीलंका तक पहुंच चुका है.
सिर्फ तीन साल के टेस्ट करियर में ही जायसवाल भारतीय बल्लेबाजी की अहम कड़ी बन चुके हैं. सफेद गेंद क्रिकेट वाली उनकी आक्रामकता टेस्ट क्रिकेट में भी नजर आती है. यही वजह है कि उनका टेस्ट स्ट्राइक रेट 66.24 का है.
लेकिन गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में उनकी बल्लेबाजी का एक पुराना पैटर्न फिर सामने आया. अब कोलंबो टेस्ट से पहले जायसवाल ने उसी कमजोरी को सुधारने के लिए नेट्स में जमकर मेहनत की.
Colombo nets mein bada khulasa! 🤫 Team India ne Yashasvi Jaiswal ko di ek STRIKT instruction. Konsi shot hai jo unhe chhodne ko kaha gaya? 🤔 Janiye poora sach yahan! 👇https://t.co/qSIu6d4cJg#YashasviJaiswal #TeamIndia #CricketNews #IndianCricket #Cricket pic.twitter.com/Zo0Sx7y5AK
— Guru Gyan (@TheGuruGyanAI) August 21, 2026
कट शॉट बना परेशानी की वजह?
गॉल टेस्ट में श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो (Asitha Fernando) ने जायसवाल को ऑफ स्टंप के बाहर की लेंथ गेंद पर फंसाया. जायसवाल गेंद को कट करने के लिए गए, लेकिन किनारा लगा और गेंद विकेटकीपर निरोशन डिकेवाला के पास चली गई. आंकड़े बताते हैं कि तेज गेंदबाजों के खिलाफ कट शॉट खेलते हुए आउट होने का पैटर्न हाल के महीनों में बढ़ा है.
पिछले साल अक्टूबर में भारतीय घरेलू टेस्ट सीजन शुरू होने के बाद से जायसवाल सिर्फ 27 गेंदों में तेज गेंदबाजों के खिलाफ कट शॉट खेलने के प्रयास में चार बार आउट हो चुके हैं. वहीं टेस्ट डेब्यू से लेकर पिछले साल इंग्लैंड दौरे तक, करीब दो साल के दौरान वह 190 गेंदों में सिर्फ चार बार इस शॉट पर आउट हुए थे. यानी हाल के समय में यह कमजोरी ज्यादा साफ होकर सामने आई है.
नेट्स में शुरू हुआ सुधार का काम
क्रिकबज की खबर के मुताबिक- जायसवाल के गलत शॉट खेलने का प्रतिशत भी बढ़ा है. पहले यह आंकड़ा 31.1 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 48.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यही वजह रही कि शुक्रवार को कोलंबो के SSC मैदान पर भारत के तेज गेंदबाजों ने नेट्स में उन्हें लगातार इस एरिया में परखने की कोशिश की. आकिब नबी के सबसे पहले गेंदबाजी के लिए आए. उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर वही गेंद डाली, जिसे देखकर कोई भी बल्लेबाज कट शॉट खेलने के लिए ललचा सकता था. लेकिन जायसवाल इस बार सतर्क थे. उन्होंने गेंद को ध्यान से देखा और उसे छोड़ दिया.
इसके बाद गुरनूर बरार ने भी लगभग उसी लाइन पर गेंदबाजी की, हालांकि उन्होंने लेंथ थोड़ी आगे रखी. इस बार जायसवाल ने कवर ड्राइव खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद मिस कर गए. इसके बाद उनकी नाराजगी भी सुनाई दी. जायसवाल ने जोर से 'हट' कहा, जिसकी आवाज खाली स्टेडियम में गूंज गई.
फिर नहीं फंसे जाल में...
दिलचस्प बात यह रही कि उस एक गेंद के बाद जायसवाल ने ऑफ स्टंप के बाहर की उस जगह पर जाती किसी गेंद को खेलने के लिए पीछा नहीं किया. नेट्स में वह देवदत्त पडिक्कल के साथ 10-10 गेंदों के स्पेल में बल्लेबाजी कर रहे थे. इसी दौरान उनकी टीम के हेड कोच गौतम गंभीर से भी बातचीत हुई. इसके बाद जब जायसवाल दोबारा नेट्स पर लौटे तो प्रसिद्ध कृष्णा ने भी ऑफ स्टंप के बाहर लगातार गेंदें डालीं. लेकिन जायसवाल ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. वह गेंदों को छोड़ते रहे.
आकिब नबी और गुरनूर बरार ने राउंड द विकेट आकर भी उन्हें इसी तरह की गेंदों से फंसाने की कोशिश की, लेकिन जायसवाल ने अपने संयम को नहीं तोड़ा. इसके बाद भारत के तेज गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल भी इस अभ्यास में शामिल हुए, लेकिन जायसवाल को बाहर की गेंद पर शॉट खेलने के लिए मजबूर नहीं कर सके.
पहले तेज गेंदबाज, फिर स्पिनर्स का सामना
करीब 30 मिनट तक तेज गेंदबाजों के खिलाफ इस खास कमजोरी पर काम करने के बाद जायसवाल ने नेट सेशन खत्म किया. वह सीधे आइस बॉक्स के पास पहुंचे और पानी की बोतलें लेकर खुद को ठंडा किया. लेकिन उनका अभ्यास यहीं खत्म नहीं हुआ. सिर्फ पांच मिनट बाद ही जायसवाल दूसरे नेट्स में पहुंच गए, जहां उन्होंने स्पिन गेंदबाजों का सामना किया. यानी कोलंबो टेस्ट से पहले जायसवाल ने बल्लेबाजी की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी.
31वां टेस्ट, 31वां अलग मैदान
जायसवाल के टेस्ट करियर की एक दिलचस्प बात यह भी है कि वह अब तक अपने सभी 30 टेस्ट अलग-अलग मैदानों पर खेल चुके हैं.उनका 31वां टेस्ट भी एक नए मैदान पर होगा. यानी SSC उनका 31वां टेस्ट वेन्यू बन सकता है.
अब इस मैदान पर उनका धैर्य सबसे ज्यादा अहम होगा. SSC की पिचें आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं. ऐसे में श्रीलंका के तेज गेंदबाज भी इस बात को अच्छी तरह जानते होंगे कि जायसवाल को किस इलाके में गेंद डालकर परेशान किया जा सकता है.
जब जायसवाल बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे तो असिथा फर्नांडो और अन्य श्रीलंकाई तेज गेंदबाज ऑफ स्टंप के बाहर की उस लाइन पर जरूर उनका धैर्य टेस्ट करने की कोशिश करेंगे.
अब असली सवाल यही है कि नेट्स में दिखाई गई यह नई सावधानी क्या मैच में भी कायम रहेगी?