वैभव सूर्यवंशी इन दिनों एक अजीब इंतजार में हैं. बल्ला तैयार है, नाम चर्चा में है, फैन्स मैदान पर उनका धमाका देखने को बेताब हैं, लेकिन प्लेइंग इलेवन में जगह अभी भी इंतजार में है. वेस्टइंडीज के खिलाफ लखनऊ में खेले गए पहले टी20 में वैभव को बाहर बैठना पड़ा. संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने पारी शुरू की और टीम ने वही पुराना ओपनिंग कॉम्बिनेशन बरकरार रखा.
अब बारी रांची की है. 9 अक्टूबर को होने वाले दूसरे टी20 के लिए फैन्स का उत्साह अलग ही कहानी बता रहा है. टिकटों के लिए रात से कतारें लगीं और इंतजार सिर्फ टीम इंडिया को देखने का नहीं है. लोगों को उम्मीद है कि इस बार 15 साल का 'बेबी बॉस' मैदान पर उतरेगा और बल्ले से कुछ ऐसा करेगा, जिसके लिए वह लंबे समय से चर्चा में है.
VVS ने भरोसा किया, GG का फॉर्मूला अलग
एशियन गेम्स की कहानी अब पुरानी हो चुकी है, लेकिन इस बहस को समझने के लिए उसका एक छोटा-सा संदर्भ जरूरी है. वीवीएस लक्ष्मण की कोचिंग में वैभव को पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल मैच जैसे बड़े मुकाबले में प्लेइंग इलेवन में जगह मिली थी. उसी टीम में संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन भी थे. यानी तब वैभव को सिर्फ उम्र के तराजू पर नहीं तौला गया.
अब टीम गौतम गंभीर के हाथ में है और कहानी बदल गई है. गंभीर की सोच साफ है- जब संजू और अभिषेक की ओपनिंग जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत दे सकती है तो उसे क्यों बदला जाए? टी20 में तय कॉम्बिनेशन को बार-बार छेड़ने की जरूरत नहीं. यह तर्क अपनी जगह मजबूत है. आखिर लखनऊ में भारत ने आसानी से जीत भी दर्ज की.
लेकिन यही वह जगह है जहां एक सवाल खड़ा होता है. क्या टीम में जगह बनाने के लिए सिर्फ मौजूदा कॉम्बिनेशन का सही चलना ही काफी है? या कभी-कभी किसी खास खिलाड़ी की क्षमता को परखने के लिए कॉम्बिनेशन में थोड़ा बदलाव भी जरूरी होता है?
वैभव अब सिर्फ 15 साल का नाम नहीं
वैभव को अब सिर्फ '15 साल के बच्चे' की तरह देखना शायद सही तस्वीर नहीं होगी. आईपीएल में उन्होंने जिस अंदाज में रन बनाए, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जिस तेजी से खुद को साबित किया और जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में अर्धशतक लगाया, उसके बाद उनकी उम्र उनकी पहचान का सिर्फ एक हिस्सा है. असली पहचान उनका बल्ला है. ऐसा बल्ला, जो कुछ गेंदें देखने के बाद गेंदबाज से सवाल पूछना शुरू कर देता है.
लखनऊ में भारत जीत गया, इसलिए यह कहना गलत होगा कि वैभव के बाहर रहने से टीम को नुकसान हुआ. संजू और अभिषेक बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मैच को आसानी से मंजिल तक पहुंचा दिया. टीम जीत गई, लेकिन वैभव का सवाल नहीं जीता. वह सवाल अब लखनऊ से रांची पहुंच चुका है.
यही वजह है कि मामला सिर्फ फैन्स की भावनाओं का नहीं है. टीम मैनेजमेंट को लोकप्रियता के दबाव में फैसला नहीं लेना चाहिए. लेकिन किसी खिलाड़ी को लगातार यह कहकर भी इंतजार नहीं कराया जा सकता कि 'अभी समय नहीं आया'. सवाल सीधा है- अगर मौका ही नहीं मिलेगा तो टीम यह जानेगी कैसे कि वैभव बड़े मंच पर क्या कर सकते हैं?
रांची में खत्म होगा इंतजार या बढ़ेगी कहानी?
रांची के फैन्स वैभव को देखने के लिए इसलिए भी बेताब हैं क्योंकि कभी झारखंड और बिहार एक ही थे. वैभव बिहार से आते हैं, इसलिए रांची के दर्शकों को इस 15 साल के सितारे में अपना कनेक्शन नजर आता है. टिकट के लिए रात से कतार इसी उत्साह की झलक है. अब फैन्स की नजर सिर्फ टीम इंडिया पर नहीं, बिहार के 'बेबी बॉस' पर भी है.
माही के शहर में अब वैभव के जलवे का इंतजार है. रांची यानी महेंद्र सिंह धोनी का शहर, जहां क्रिकेट को लेकर जुनून की अपनी अलग कहानी है. वर्ल्ड चैम्पियन धोनी के शहर में अब फैन्स एक और युवा सितारे का धमाका देखना चाहते हैं. सवाल बस इतना है- क्या 'बेबी बॉस' को इस बार मैदान में उतरने का मौका मिलेगा?
रांची में अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या गंभीर फिर संजू-अभिषेक की जोड़ी पर भरोसा करेंगे या वैभव के लिए दरवाजा खुलेगा? अगर मौजूदा कॉम्बिनेशन अच्छा चल रहा है तो उसे बनाए रखना समझदारी है. लेकिन वैभव जैसा खिलाड़ी टीम में सिर्फ एक और बल्लेबाज नहीं है. वह मैच का टेम्पो बदलने की क्षमता रखने वाला एक्स-फैक्टर है.
एक-दो मैच बाहर बैठना कोई बड़ी बात नहीं. करियर की शुरुआत में इंतजार भी खेल का हिस्सा है. लेकिन अगर हर मैच के बाद जवाब सिर्फ यही हो कि 'अभी इंतजार करो', तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह इंतजार खत्म कब होगा?
वीवीएस लक्ष्मण ने वैभव पर भरोसा करके उन्हें बड़े मंच पर उतारा था. अब गौतम गंभीर के सामने सवाल यह है कि वैभव को रोकने की वजह ज्यादा मजबूत है या उसे आजमाने का तर्क. फैसला जो भी हो, यह सिर्फ एक 15 साल के खिलाड़ी की प्लेइंग इलेवन का सवाल नहीं है. यह उस सोच का सवाल है कि भारतीय क्रिकेट अपने सबसे रोमांचक युवा बल्लेबाज को कब और कैसे आजमाना चाहता है.
फिलहाल वैभव तैयार हैं, रांची के फैन्स तैयार हैं और उम्मीदें भी तैयार हैं. बस सवाल एक है- इस बार प्लेइंग इलेवन की पर्ची में वैभव का नाम होगा या इंतजार की कहानी एक मैच और आगे बढ़ेगी?