टीम इंडिया में जगह बनाना मुश्किल है, लेकिन टीम में शामिल होने के बाद भी प्लेइंग इलेवन में मौका न मिलना किसी युवा खिलाड़ी के लिए उससे कम चुनौती नहीं. वैभव सूर्यवंशी इन दिनों इसी दौर से गुजर रहे हैं. अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले वैभव न्यूजीलैंड दौरे पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हर मैच के साथ यह इंतजार लंबा होता जा रहा है.
अफगानिस्तान सीरीज हो, वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले हों या अब न्यूजीलैंड का दौरा... वैभव को लगातार बेंच पर बैठना पड़ रहा है. सवाल यह नहीं कि संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को हटाकर वैभव को ओपनिंग में उतार दिया जाए. सवाल यह है कि अगर टीम मैनेजमेंट फिलहाल इस जोड़ी को तोड़ना ही नहीं चाहता, तो क्या वैभव के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं निकाला जा सकता?
ईशान किशन बाहर, फिर भी वैभव के लिए रास्ता मुश्किल
न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले से पहले भारतीय टीम को झटका लगा है. विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन दाहिनी जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण मुकाबले से बाहर हो गए हैं. उन्हें यह चोट सीरीज के पहले टी20 मैच के दौरान लगी थी.
ईशान की चोट के बाद वैभव के खेलने की संभावना पर चर्चा होना स्वाभाविक है. आखिर टीम में एक बल्लेबाज की जगह खाली हुई है. लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि वैभव को सीधे प्लेइंग इलेवन में उतार दिया जाएगा? फिलहाल ऐसा मानने की ठोस वजह नजर नहीं आती.
टीम मैनेजमेंट ईशान की जगह किसी दूसरे उपलब्ध खिलाड़ी को मौका दे सकता है. संजू और अभिषेक की ओपनिंग जोड़ी ने पहले टी20 में 226 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की चार विकेट से जीत में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में इस जोड़ी को तोड़ने का फैसला करना आसान नहीं होगा.
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है. क्या वैभव को मौका देने का एकमात्र रास्ता ओपनिंग ही है?
ओपनिंग नहीं तो तीसरे-चौथे नंबर पर क्यों नहीं?
वैभव को लेकर टीम मैनेजमेंट की रणनीति समझी जा सकती है. संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा दोनों फॉर्म में हैं. दोनों ने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनी उपयोगिता साबित की है. ऐसे में सिर्फ एक युवा खिलाड़ी को मौका देने के लिए सफल संयोजन बदलना जोखिम भरा हो सकता है.
लेकिन टीम संयोजन का मतलब यह भी नहीं कि किसी युवा बल्लेबाज के लिए सारे रास्ते बंद कर दिए जाएं. अगर वैभव को भविष्य की योजना का हिस्सा माना जा रहा है, तो उन्हें तीसरे या चौथे नंबर पर आजमाने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है.
बेशक, ओपनिंग और मध्यक्रम की बल्लेबाजी में फर्क है. नई गेंद का सामना करना और पारी के बीच में बल्लेबाजी के लिए उतरना अलग-अलग तरह की चुनौतियां हैं. वैभव को इस भूमिका के लिए तैयार करना भी एक प्रक्रिया होगी. लेकिन जब तक उन्हें मौका ही नहीं मिलेगा, तब तक उनकी बहुमुखी प्रतिभा को परखने का सवाल भी नहीं उठेगा.
टीम मैनेजमेंट को यह स्पष्ट करना होगा कि वैभव सिर्फ भविष्य के ओपनर हैं या टीम उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल करने की योजना भी बना रही है.
बेंच पर बैठने से बेहतर रणजी खेलना?
वैभव के सामने एक दूसरा विकल्प भी है. भारत में रणजी ट्रॉफी के मुकाबले चल रहे हैं. अगर न्यूजीलैंड सीरीज में उन्हें खेलने का वास्तविक मौका नहीं दिख रहा, तो टीम प्रबंधन के लिए यह विचार करना जरूरी है कि उन्हें लगातार बेंच पर रखने से कितना फायदा होगा.
रणजी ट्रॉफी में बिहार का प्रतिनिधित्व करने से वैभव को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में खेलने का मौका मिल सकता है. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बल्लेबाजी करना, लंबी पारियां खेलना और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी तकनीक को परखना उनके विकास के लिए उपयोगी होगा.
हालांकि, उन्हें बीच सीरीज में भारत वापस भेजना अपने आप में सीधा फैसला नहीं है. इसके लिए टीम की जरूरत, चयनकर्ताओं की योजना और बिहार के मुकाबलों के कार्यक्रम को देखना होगा. लेकिन व्यापक सवाल अपनी जगह कायम है- क्या सिर्फ टीम के साथ बने रहना, बिना खेले ड्रेसिंग रूम में बैठने से बेहतर है?
वैभव जैसे युवा खिलाड़ी के लिए मैच अभ्यास बेहद अहम है. प्रतिभा को निखारने के लिए नेट्स में बल्लेबाजी करना पर्याप्त नहीं होता. असली परीक्षा मैदान पर होती है, जहां हर गेंद के साथ फैसला लेना पड़ता है और दबाव में पारी को आगे बढ़ाना होता है.
गंभीर के सामने असली परीक्षा
वैभव को लगातार मौका नहीं मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि टीम मैनेजमेंट उनके खिलाफ है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह प्रदर्शन, टीम की जरूरत और संयोजन के आधार पर तय होती है. संजू और अभिषेक का अच्छा प्रदर्शन उन्हें प्लेइंग इलेवन में बनाए रखने का मजबूत आधार देता है.
लेकिन युवा खिलाड़ी को टीम में शामिल करने के बाद उसकी भूमिका और आगे की योजना भी स्पष्ट होनी चाहिए. अगर वैभव को फिलहाल ओपनिंग में जगह नहीं मिल सकती, तो क्या उन्हें मध्यक्रम में तैयार किया जाएगा? और अगर निकट भविष्य में भी मौका नहीं है, तो क्या उन्हें प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने के लिए रिलीज करने पर विचार होगा?
ईशान किशन की चोट के बाद अब सबकी नजर टीम मैनेजमेंट के फैसले पर होगी. वैभव को मौका मिलता है या नहीं, यह तो आगे पता चलेगा. लेकिन टीम को यह बताना होगा कि उनकी प्रतिभा का इस्तेमाल कब और कैसे किया जाएगा.
किसी युवा खिलाड़ी को लंबे समय तक इंतजार कराना तभी सही है, जब उसके पीछे कोई योजना हो. वरना सवाल उठना लाजिमी है कि वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह कब मिलेगी.