साउथ अफ्रीका के पूर्व विकेटकीपर थामी सोलेकिले का क्रिकेट सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. केपटाउन की गलियों से निकलकर स्कूल क्रिकेट के रिकॉर्ड तोड़ने वाले इस खिलाड़ी ने साउथ अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला और घरेलू स्तर पर दमदार प्रदर्शन किया. लेकिन जिस करियर को लंबी उड़ान भरनी थी, उसका अंत एक ऐसे विवाद के साथ हुआ जिसने उनकी पहचान ही बदल दी.
थामी सोलेकिले 9 अक्टूबर (शुक्रवार) को 46 साल के हो गए. सोलेकिले को 2016 में क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने 12 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था. उन पर रैम स्लैम टी20 चैलेंज 2015 में मैच फिक्सिंग की साजिश रचने और उनसे किए गए संपर्क की पूरी जानकारी नहीं देने का आरोप साबित हुआ था.
केपटाउन की लांगा टाउनशिप में पले-बढ़े सोलेकिले बचपन में फुटबॉल के भी बेहतरीन खिलाड़ी थे. दोस्त उन्हें 'मारा' के नाम से बुलाते थे. लेकिन पिनलैंड्स स्कूल में मिली स्कॉलरशिप ने उनके क्रिकेट करियर की नींव रख दी. स्कूल पहुंचते ही सोलेकिले ने अपनी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से तहलका मचा दिया. उन्होंने केपटाउन स्कूल क्रिकेट के लगभग सभी प्रमुख रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. इनमें से कई रिकॉर्ड तो साउथ अफ्रीका के महान बल्लेबाज जैक्स कैलिस ने बनाए थे.
साउथ अफ्रीका के लिए हॉकी भी खेला
कमाल की बात यह थी कि क्रिकेट के अलावा हॉकी में भी थामी सोलेकिले का प्रदर्शन शानदार था. उन्होंने साउथ अफ्रीका की सीनियर हॉकी टीम तक का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर गोल भी दागा. हालांकि, उन्होंने आखिरकार क्रिकेट को अपना पेशा बनाने का फैसला किया.
थामी सोलेकिले ने 2000 में सिर्फ 19 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू किया. अगले ही साल उन्हें साउथ अफ्रीका की अंडर-19 टीम की कप्तानी का मौका मिल गया. विकेट के पीछे उनकी तकनीक और शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा. 2003 में साउथ अफ्रीका-ए के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने खुद को सीनियर टीम के लिए तैयार साबित किया. इसके बाद उन्हें इंग्लैंड दौरे के लिए साउथ अफ्रीका की टेस्ट टीम में शामिल किया गया.
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थामी सोलेकिले को 2004 में भारत के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला. उस समय मार्क बाउचर को टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्हें विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी मिली थी. उन्होंने साउथ अफ्रीका के लिए कुल तीन टेस्ट मैच खेलकर 47 रन बनाए. इंटरनेशनल क्रिकेट में बल्ले से वह अपनी छाप नहीं छोड़ सके और जल्द ही टीम से बाहर हो गए. इसके बाद उनका करियर कुछ समय के लिए ठहर गया. लेकिन सोलेकिले ने घरेलू क्रिकेट में वापसी की और 2009 में लायंस से जुड़ने के बाद लगातार अच्छा प्रदर्शन किया.
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साउथ अफ्रीका-ए टीम में जगह बनाने के साथ उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिली. 2012 में मार्क बाउचर की आंख में गंभीर चोट लगी. इसके बाद साउथ अफ्रीका की टेस्ट टीम में बैकअप विकेटकीपर के तौर पर थामी सोलेकिले की वापसी हुई. यह उनके लिए दोबारा खुद को साबित करने का मौका था, लेकिन वह इस बार भी टेस्ट प्लेइंग-11 में जगह नहीं बना सके. इसके बाद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग समाप्त हो गया.
बैन के बाद थम गया करियर
थामी सोलेकिले के करियर का सबसे काला अध्याय 2016 में सामने आया. क्रिकेट साउथ अफ्रीका ने उन्हें रैम स्लैम टी20 चैलेंज 2015 में मैच फिक्सिंग से जुड़े मामले में दोषी पाए जाने के बाद 12 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया. उन पर मैच को प्रभावित करने की साजिश में शामिल होने और फिक्सिंग के लिए किए गए संपर्क की पूरी जानकारी नहीं देने का आरोप था. इस कार्रवाई ने उनके क्रिकेट करियर पर पूर्ण विराम लगा दिया.
साउथ अफ्रीका के लिए सिर्फ तीन टेस्ट खेलने के बावजूद थामी सोलेकिले का घरेलू करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा. उन्होंने वेस्टर्न प्रोविंस, केप कोबरा और लायंस जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया. 160 मैचों के फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने 5844 रन बनाए और विकेटकीपर के तौर पर 500 से ज्यादा डिस्मिसल भी किए. उन्हें दक्षिण साउथ अफ्रीका के लिए टेस्ट क्रिकेट में खेलने वाले पहले अश्वेत अफ्रीकी विशेषज्ञ विकेटकीपर के तौर पर भी याद किया जाता है.