भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को लेकर बड़ा और बेहद ईमानदार खुलासा किया है. जडेजा ने बताया कि भारतीय टीम में उन्हें लगातार निचले क्रम में बल्लेबाजी के लिए भेजे जाने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ था.
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले ब्रॉडकास्टर्स के साथ बातचीत में जडेजा ने बताया कि घरेलू क्रिकेट में उनका बल्लेबाजी रिकॉर्ड मजबूत था.
रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी में उनका औसत 60 से ज्यादा रहा था और उन्हें खुद पर भरोसा था कि वह अच्छी बल्लेबाजी कर सकते हैं. लेकिन भारतीय टीम में आने के बाद उन्हें कई बार नंबर 8 और 9 पर बल्लेबाजी करनी पड़ती थी.
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उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूम में जब वह पैड पहनकर अपनी बारी का इंतजार करते थे और उनके बगल में तेज गेंदबाज बल्लेबाजी के लिए तैयारी कर रहा होता था, तो इससे उनका मनोबल गिरता था. उन्हें लगता था कि शायद टीम को उनकी बल्लेबाजी पर पूरा भरोसा नहीं है.
जडेजा ने कहा कि कई बार उन्हें रविचंद्रन अश्विन से भी नीचे बल्लेबाजी के लिए भेजा गया. ऐसी परिस्थितियों ने उन्हें काफी परेशान किया और उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ. हालांकि, समय के साथ उन्होंने मानसिक मजबूती विकसित की और टेस्ट क्रिकेट में लंबी पारियां खेलने का मिजाज बनाया.
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यह खुलासा श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान सामने आया है. भारत ने गॉल में पहले दिन 288/2 का मजबूत स्कोर बनाया था. फिर दूसरे दिन भी भारतीय बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया. भारत ने दूसरे दिन स्टम्प तक 9 विकेट पर 460 रन बनाए. देवदत्त पडिक्कल ने शानदार 167 रनों का योगदान दिया.