पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने पाकिस्तान सूचना आयोग (Pakistan Information Commission: PIC) के उस आदेश को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें बोर्ड को अपने वित्तीय रिकॉर्ड, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट, कर्मचारियों की सैलरी और अन्य गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था.
PIC ने 9 जुलाई को राइट ऑफ एक्सेस टू इंफॉरमेशन एक्ट 2017 के तहत PCB को आदेश जारी किया था. आयोग ने बोर्ड से वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के वार्षिक बजट, खर्च का पूरा ब्योरा, खिलाड़ियों और कर्मचारियों के कॉन्ट्रैक्ट तथा उनकी सैलरी से जुड़ी जानकारी मांगी थी.
आयोग ने इसके अलावा इस साल हुए टी20 वर्ल्ड कप 2024 में टीम के साथ यात्रा करने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों की सूची, पूरे दौरे पर हुए खर्च, साथ ही फैसलाबाद के इकबाल स्टेडियम के अपग्रेडेशन पर किए गए खर्च और उठाए गए कदमों का भी विवरण मांगा था.
PCB से जुड़े सूत्र ने पीटीआई को बताया- बोर्ड के सामने 'कैच-22' जैसी स्थिति बन गई है. यदि वह PIC के आदेश का पालन करता है तो भविष्य में अन्य संस्थान और समितियां भी बोर्ड से उसके वित्तीय लेन-देन, यहां तक कि पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) से जुड़े आर्थिक दस्तावेजों की मांग कर सकती हैं.
हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में PCB ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बेहद प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करता है. बोर्ड ने दलील दी कि वह सरकारी विभागों की तरह सरकार या कंसोलिडेटड फंड ( Consolidated Fund) से वित्तीय सहायता नहीं लेता, इसलिए उसकी स्थिति सरकारी संस्थानों से अलग है.
PCB का कहना है कि खिलाड़ियों और कर्मचारियों की सैलरी, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें और अन्य वित्तीय जानकारी सार्वजनिक होने से उसके व्यावसायिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे भविष्य में होने वाली कॉन्ट्रैक्ट बातचीत और व्यावसायिक समझौतों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा.
बोर्ड ने अदालत से अंतरिम राहत की भी मांग की है. PCB का तर्क है कि यदि गोपनीय कॉन्ट्रैक्ट और व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी एक बार सार्वजनिक हो गई तो इससे उसके व्यावसायिक हितों, संविदात्मक संबंधों और तीसरे पक्ष की निजता को होने वाला नुकसान अपूरणीय होगा.