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ऋचा को सिर्फ 1 गेंद, गेंदबाजों का गलत इस्तेमाल... ऐसे बिखर गया भारत का वर्ल्ड कप ड्रीम, हरमनप्रीत कौर की कप्तानी पर उठे सवाल

भारतीय टीम की फील्डिंग इस विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में औसत दर्जे की रही. कप्तानी और टीम सेलेक्शन भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा. ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ग्रुप की दो सबसे मजबूत टीमें थीं, लेकिन भारत अपनी रणनीतिक गलतियों के चलते मुकाबले से बाहर होता चला गया.

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भाारतीय टीम टी20 वर्ल्ड से आउट हुई. (Photo: Getty Images)
भाारतीय टीम टी20 वर्ल्ड से आउट हुई. (Photo: Getty Images)

भारतीय टीम का आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 अभियान ग्रुप स्टेज में ही खत्म हो गया. रविवार (28 जून) को लॉर्ड्स मे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 170 रन बनाने के बावजूद भारत को 6 विकेट से हार झेलनी पड़ी. इस हार के साथ ही भारत टूर्नामेंट से बाहर हो गया, जबकि ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ने ग्रुप-ए से सेमीफाइनल में जगह बना ली.

स्कोरबोर्ड पर 170 रन किसी भी बड़े मुकाबले में चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं, लेकिन भारत की हार सिर्फ मैदान पर हुए प्रदर्शन की कहानी नहीं थी. टीम सेलेक्शन, गेंदबाजी में बदलाव, बल्लेबाजी क्रम और कप्तानी- इन चारों मोर्चों पर भारत ने ऐसी गलतियां कीं, जिसने मैच हाथ से छीन लिया.

भारत ने शानदार शुरुआत करते हुए दूसरी ही गेंद पर जॉर्जिया वॉल का विकेट झटक लिया. इसके बाद फोएबे लिचफील्ड और बेथ मूनी भी पवेलियन लौट गईं. 9.1 ओवर में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 68/3 था और मुकाबला पूरी तरह भारत के नियंत्रण में दिखाई दे रहा था. यहीं से कप्तान हरमनप्रीत कौर की रणनीति सवालों के घेरे में आ गई.

हरमन ने यहां कर दी बड़ी चूक
श्री चरणी ने दो ओवर में सिर्फ 10 रन देकर एक विकेट लिया था और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बना रखा था. लेकिन उन्हें लगातार गेंदबाजी कराने के बजाय कप्तान ने राधा यादव और शेफाली वर्मा को गेंद थमा दी. इस फैसले का एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने पूरा फायदा उठाया. राधा यादव के एक ओवर में 17 रन बटोरकर दोनों ने मैच का रुख ही बदल दिया. जब तक श्री चरणी और दीप्ति शर्मा को दोबारा गेंद मिली, तब तक ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह मैच पर हावी हो चुका था.

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यास्तिका-क्रांति को खिलाया?
टीम चयन भी सवालों से घिर गया. तेज गेंदबाज नंदनी शर्मा की जगह क्रांति गौड़ को प्लेइंग इलेवन में मौका मिला, लेकिन उन्हें पूरे मैच में सिर्फ एक ओवर फेंकने दिया गया. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि कप्तान और टीम मैनेजमेंट को उन पर भरोसा ही नहीं था, तो उन्हें प्लेइंग-11 में शामिल करने का क्या औचित्य था? उनकी जगह अतिरिक्त बल्लेबाज या ऑलराउंडर खिलाया जा सकता था.

भारती फुलमाली जैसी आक्रामक बल्लेबाज को बाहर बैठाकर यास्तिका भाटिया को मौका दिया गया. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि यास्तिका को बल्लेबाजी के लिए भेजा ही नहीं गया. अगर बल्लेबाजी तक नहीं करानी थी, तो प्लेइंग इलेवन में उनका चयन किस रणनीति का हिस्सा था? यह फैसला भी टीम मैनेजमेंट पर सवाल खड़े करता है.

ऋचा को पहले उतारा जा सकता था
भारत की सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शामिल ऋचा घोष को 20वें ओवर तक इंतजार कराना शायद मैच का सबसे चौंकाने वाला फैसला रहा. जेमिमा रोड्रिग्स को हरमनप्रीत कौर से पहले भेजा गया, जबकि ऋचा को सिर्फ आखिरी ओवर में बल्लेबाजी का मौका मिला और वह सिर्फ एक गेंद ही खेल सकीं.

जब टीम को तेज रन चाहिए थे, तब अपने सबसे बड़े फिनिशर को आखिरी ओवर तक रोककर रखना रणनीतिक रूप से समझ से परे रहा. यह पहली बार नहीं है जब भारतीय टीम की रणनीति पर सवाल उठे हैं. पिछले कुछ महीनों में कप्तान हरमनप्रीत कौर और मुख्य कोच अमोल मजूमदार के फैसलों की आलोचना होती रही है.

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