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जा रहा मॉनसून, देश में बारिश की 15% कमी... 218 जिले सूखे की स्थिति में

मॉनसून 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से लौटना शुरू होगा. पूरे देश में 15% बारिश की कमी है. पंजाब, हरियाणा, बिहार, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में घाटा भरने की संभावना कम है जिससे सूखे का खतरा बना हुआ है.

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राजस्थान के करौली में पूर्व दस्यु सम्राट की पत्नी संपत्ति देवी तालाब को चौड़ा करते हुए ताकि पानी की कमी दूर हो सके. (Photo: PTI)
राजस्थान के करौली में पूर्व दस्यु सम्राट की पत्नी संपत्ति देवी तालाब को चौड़ा करते हुए ताकि पानी की कमी दूर हो सके. (Photo: PTI)

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने सोमवार को बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौटना शुरू कर सकता है. सामान्य रूप से यह प्रक्रिया 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है लेकिन इस साल थोड़ी देर से हो रही है. पिछले साल 14 सितंबर को वापसी शुरू हुई थी. 

देशभर में 13 सितंबर तक मॉनसून में 15% की कमी दर्ज की गई है. जून में यह कमी 40% तक पहुंच गई थी जो जुलाई की अच्छी बारिश से घटकर 13% रह गई. अगस्त अंत में 14% और अब 15% पर स्थिर है. इस सीजन में अल-नीनो का असर साफ दिख रहा है जिसने कई क्षेत्रों में बारिश को कमजोर रखा. 

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दक्षिण प्रायद्वीप में 28% और पूर्व-उत्तर पूर्व में 25% की कमी है. मध्य भारत में 6% तथा उत्तर-पश्चिम में 10% घाटा है. कई प्रमुख कृषि राज्य ऐसे हैं जहां अब घाटा पूरा होने की उम्मीद बहुत कम है. इनमें पंजाब में 40%, हरियाणा में 23%, राजस्थान में 25%, बिहार में 35%, कर्नाटक में 29%, केरल में 27%, तेलंगाना में 20%, आंध्र प्रदेश में 43%, तमिलनाडु में 26%, अरुणाचल प्रदेश में 42% और मेघालय में 59% की कमी दर्ज है.

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किन राज्यों और जिलों में सूखे का खतरा ज्यादा

मॉनसून की शुरुआत में सरकार ने कमजोर बारिश की आशंका को देखते हुए 315 जिलों के लिए आकस्मिक योजनाएं एक्टिव थीं. इनमें 111 जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील माने गए क्योंकि वहां सिंचाई कवरेज 25% से कम है. 76 जिले मध्यम जोखिम वाले और 128 जिले अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई वाले थे. 

rainfall deficit

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में फैले हैं. अगस्त के आंकड़ों में देश के कई सौ जिले बारिश की कमी वाले थे. एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 310 जिले कमी से और 38 जिले भारी कमी कैटेगरी में दर्ज हुए थे. हाल के चार हफ्तों के आंकड़ों में 218 जिले सूखे जैसी स्थिति दिखा रहे हैं. 

बिहार में कई जिले, आंध्र प्रदेश के 24 से ज्यादा जिले, कर्नाटक के करीब 20 जिले, पंजाब के 14 से अधिक जिले और राजस्थान के कई जिले घाटे वाले हैं. मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्से गंभीर कमी से जूझ रहे हैं. इन जिलों में खरीफ फसलों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है.

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अगले कुछ दिनों में कहां होगी बारिश

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मॉनसून पूरी तरह लौटने से पहले कुछ इलाकों में बारिश जारी रहेगी. 15 से 17 सितंबर तक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में काफी व्यापक बारिश की संभावना है. पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 16-17 सितंबर को व्यापक बारिश हो सकती है. राजस्थान में छिटपुट तथा उत्तर प्रदेश में बिखरी बारिश 18 सितंबर तक रह सकती है. 

दक्षिण में तमिलनाडु, पुडुचेरी में 20 सितंबर तक अलग-अलग जगह भारी बारिश तथा केरल में 16 सितंबर तक बारिश का अनुमान है. मध्य भारत और पूर्व में भी कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश हो सकती है. ये बारिशें स्थानीय राहत दे सकती हैं लेकिन बड़े स्तर पर घाटा पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. मौसम विभाग ने अगस्त के अंत में सितंबर की बारिश सामान्य से कम यानी लंबी अवधि के औसत के 91% से कम रहने का पूर्वानुमान दिया था.

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बारिश की कमी से खरीफ फसलों खासकर धान, मक्का, कपास और दालों पर दबाव बढ़ सकता है. जिन जिलों में सिंचाई कम है वहां स्थिति और गंभीर है. किसान छोटे अवधि वाली फसलें और कम पानी वाली फसलें लगाने की सलाह पर अमल कर रहे हैं. पानी की उपलब्धता, भूजल स्तर और बिजली की मांग पर भी असर पड़ सकता है. 

अल-नीनो के कारण इस साल मॉनसून कमजोर रहा और कई क्षेत्रों में असमान वितरण रहा. कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई तो कई जिले सूखे की चपेट में आ गए. मॉनसून की वापसी के साथ तापमान बढ़ने की संभावना है. 

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आने वाले दिनों में स्थानीय बारिश पर नजर रखने की जरूरत है. सरकार और राज्य प्रशासन आकस्मिक योजनाओं के तहत राहत कार्य जारी रख सकते हैं. कुल मिलाकर यह सीजन कई कृषि राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है जहां घाटा अब आसानी से नहीं भरा जा सकेगा.

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