जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में लगातार भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड ने भयानक तबाही मचा रखी है. अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग लापता हैं. फ्लैश फ्लड, नदियों का उफान और पहाड़ों का भरभराकर गिरना आम बात हो गई है. यह क्षेत्र क्यों बार-बार ऐसी आपदाओं का शिकार हो रहा है? इसके पीछे भौगोलिक, मौसमी और मानवीय कारण हैं. यह इलाका हिमालय की युवा पहाड़ों में है, जहां जमीन कमजोर है.
राजौरी जिला पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के दक्षिणी ढलान पर स्थित है. यह हिमालय की तीसरी सबसे युवा पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है. यहां की चट्टानें अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई हैं. भूकंप की गतिविधियां, टेक्टोनिक प्लेट्स का टकराव और कमजोर चट्टानों की वजह से छोटी-छोटी कंपन से भी बड़े लैंडस्लाइड हो जाते हैं.
यह भी पढ़ें: मॉनसून का राइट टिक, जापान तक फैले बादलों का कमाल, बारिश होगी बेहिसाब!
जिले में कई नदियां और नाले हैं जैसे दारहाली, खंडाली और सुक्तोह. ये नदियां ऊपरी इलाकों से तेज पानी लेकर आती हैं. भारी बारिश में पानी की मात्रा अचानक बढ़ जाती है, जिससे फ्लैश फ्लड आ जाता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यहां की मिट्टी में ज्यादा मिट्टी और कम जड़ों वाला जंगल होने से पानी को रोकने की क्षमता कम है.

मॉनसून और मौसम का वैज्ञानिक कारण
इस बार मॉनसून की ट्रफ लाइन उत्तर भारत में सक्रिय है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी वाली हवाएं लगातार आ रही हैं. पूर्वी मध्य भारत में लो प्रेशर बनने से नम हवाएं राजौरी जैसे क्षेत्रों की ओर मुड़ रही हैं.
जापान तक फैले बादलों के विशाल जोन ने मॉनसून को और मजबूत किया है. नतीजा यह कि राजौरी जैसे पहाड़ी इलाकों में 100 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश एक दिन में हो रही है. वैज्ञानिक इसे ओरोग्राफिक लिफ्ट कहते हैं यानी जब नम हवाएं पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं तो ठंडी होकर भारी बारिश करती हैं. राजौरी की ऊंचाई और ढलान इसे और बढ़ा देते हैं.
यह भी पढ़ें: मॉनसून का रिवर्स गियर... जानिए आने वाले दिनों में मौसम में कैसा बदलाव होगा
लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड के वैज्ञानिक कारण

अब तक का नुकसान और स्थिति
राजौरी में 12 मौतें हो चुकी हैं. कई इलाकों में घर क्षतिग्रस्त हुए, सड़कें बंद हैं और गाड़ियां बह गईं. भारतीय सेना, SDRF और NDRF ने मिलकर 12 लोगों को बचाया है. लेकिन अब भी कई लोग लापता हैं. पुंछ जिले में भी स्थिति खराब है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से बात कर पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया. भारतीय सेना के व्हाइट नाइट कोर ने फ्लड रेस्क्यू में बेहतरीन काम किया. हेलिकॉप्टर, बोट और जवान लगातार काम कर रहे हैं. स्थानीय प्रशासन राहत शिविर चला रहा है और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
राजौरी की तबाही केवल बारिश की वजह से नहीं बल्कि भौगोलिक संवेदनशीलता, जलवायु परिवर्तन और मानवीय गलतियों का मिला-जुला परिणाम है. अगर समय रहते वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए तो भविष्य में नुकसान कम किया जा सकता है. प्रकृति हमें चेतावनी दे रही है. हमें पर्यावरण संरक्षण और सतर्कता बढ़ानी होगी.