नासा ने बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट को फिर से क्रू मिशन में इस्तेमाल करने का प्लान बताया है. स्टारलाइनर की अगली उड़ान दिसंबर 2026 से पहले नहीं होगी. इस फ्लाइट में कोई एस्ट्रोनॉट नहीं होगा. अगर यह टेस्ट सफल रहा, तो 2028 में स्टारलाइनर से एस्ट्रोनॉट्स को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा जा सकता है. इस मिशन की कमान नासा के एस्ट्रोनॉट वुडी हॉबर्ग संभालेंगे.
यह प्लान जून 2024 की उस फ्लाइट के बाद आया है, जिसमें नासा के एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर स्टारलाइनर से ISS गए थे. उन्हें करीब एक हफ्ते बाद वापस आना था. लेकिन रास्ते में स्टारलाइनर में हीलियम लीक और थ्रस्टर्स में खराबी आ गई. इसके बाद नासा ने दोनों को स्टारलाइनर से वापस लाने का फैसला बदल दिया.
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दोनों एस्ट्रोनॉट्स को बाद में स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन से धरती पर लाया गया. इस वजह से उनका मिशन करीब नौ महीने से ज्यादा लंबा हो गया. अब नासा स्टारलाइनर में कुछ बदलाव करके इसे फिर क्रू मिशन के लिए तैयार कर रहा है.
पहले बिना एस्ट्रोनॉट के होगी टेस्ट फ्लाइट
नासा सबसे पहले स्टारलाइनर को बिना एस्ट्रोनॉट के अंतरिक्ष भेजेगा. यह टेस्ट दिसंबर 2026 से पहले नहीं होगा. इसमें देखा जाएगा कि बदलावों के बाद स्टारलाइनर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं. नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड इसाकमैन ने बताया कि एस्ट्रोनॉट्स को भेजने से पहले कुछ थ्रस्टर्स के डिजाइन में बदलाव करना होगा. थ्रस्टर्स स्टारलाइनर को दिशा बदलने और अंतरिक्ष में उसकी स्थिति कंट्रोल करने में मदद करते हैं. अगर 2026 की टेस्ट फ्लाइट सफल रहती है, तभी स्टारलाइनर को एस्ट्रोनॉट्स के साथ उड़ाने की अगली तैयारी होगी.

एटलस की जगह वल्कन रॉकेट
स्टारलाइनर को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए अब नया रॉकेट भी इस्तेमाल किया जाएगा. अभी तक स्टारलाइनर को एटलस रॉकेट से लॉन्च किया जाता था. लेकिन एटलस रॉकेट जल्द रिटायर होने वाले हैं. अब नासा, बोइंग और यूनाइटेड लॉन्च अलायंस मिलकर वल्कन सेंटॉर रॉकेट को क्रू मिशन के लिए तैयार कर रहे हैं.
इसके लिए रॉकेट की सुरक्षा और दूसरी जरूरी चीजों की जांच की जाएगी. नासा के मुताबिक, स्टारलाइनर में बदलाव और वल्कन सेंटॉर को क्रू मिशन के लिए तैयार करने पर करीब 359 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च होगा.
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2028 में फिर एस्ट्रोनॉट्स जाएंगे
अगर 2026 की बिना क्रू वाली टेस्ट फ्लाइट सफल रहती है, तो स्टारलाइनर की अगली क्रू फ्लाइट 2028 के बीच से पहले नहीं होगी. इस मिशन की कमान नासा के एस्ट्रोनॉट वुडी हॉबर्ग संभालेंगे. हॉबर्ग ने सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ने पूरे मिशन के दौरान बहुत अच्छे तरीके से काम किया. उन्होंने दोनों को अमेरिकी हीरो भी बताया.
2024 की फ्लाइट में क्या हुआ था?
स्टारलाइनर जून 2024 में सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को लेकर ISS पहुंचा था. यह नासा और बोइंग का पहला क्रू टेस्ट मिशन था. दोनों को करीब एक हफ्ते बाद वापस आना था. लेकिन आईएसएस पहुंचने से पहले स्टारलाइनर में हीलियम लीक हुआ. कुछ थ्रस्टर्स ने भी काम करना बंद कर दिया. नासा ने जांच के बाद फैसला किया कि दोनों एस्ट्रोनॉट्स को स्टारलाइनर से वापस लाना सुरक्षित नहीं है.
इसके बाद स्टारलाइनर को बिना एस्ट्रोनॉट्स के धरती पर वापस भेज दिया गया. सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर आईएसएस पर ही रुके रहे. बाद में दोनों क्रू ड्रैगन से धरती पर लौटे. इस वजह से उनका मिशन नौ महीने से ज्यादा लंबा हो गया.
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नासा के लिए स्टारलाइनर क्यों जरूरी है?
अभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स को ISS तक ले जाने और वापस लाने के लिए स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन इस्तेमाल हो रहा है. नासा ने हाल में स्पेसएक्स से तीन और क्रू मिशन के लिए करीब 946 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया है. नासा सिर्फ एक ही क्रू स्पेसक्राफ्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहता.
ISS को 2030 के दशक की शुरुआत में बंद करने की योजना है. तब तक वहां एस्ट्रोनॉट्स की आवाजाही जारी रहेगी. इसी वजह से नासा स्टारलाइनर को फिर तैयार कर रहा है. हालांकि एस्ट्रोनॉट्स को भेजने से पहले 2026 की टेस्ट फ्लाइट और स्टारलाइनर में किए जा रहे बदलावों का सफल होना जरूरी होगा.