scorecardresearch
 

इजरायल में वोटिंग से पहले नेतन्याहू ने दिखाया ट्रंप का समर्थन, ईरान के खिलाफ फिर जंग छेड़ने के दिए संकेत

इजरायल में संसदीय चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खुलकर समर्थन किया है. ट्रंप ने मतदाताओं से नेतन्याहू को वोट देने की अपील की, जिससे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावनाएं तेज हो गई हैं.

Advertisement
X
A drone view of an election campaign display for Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu's Likud party, depicting Netanyahu and US President Donald Trump with the words in Hebrew "we have one opportunity to win!" ( Photo- Reuters)
A drone view of an election campaign display for Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu's Likud party, depicting Netanyahu and US President Donald Trump with the words in Hebrew "we have one opportunity to win!" ( Photo- Reuters)

इजरायल में मंगलवार को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुलकर समर्थन दिया है. ट्रंप ने इजरायली मतदाताओं से नेतन्याहू को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें वह काम पूरा करना है, जो दोनों नेताओं ने मिलकर शुरू किया था. ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा, 'प्रधानमंत्री पद के लिए बीबी नेतन्याहू को वोट दें. हमें वह काम पूरा करना है, जो हमने शुरू किया था.'

दरअसल, अमेरिका और इजरायल ने इसी साल फरवरी में ईरान के खिलाफ संयुक्त रूप से युद्ध शुरू किया था. अब चुनाव से ठीक पहले ट्रंप ने नेतन्याहू का समर्थन दोहराया है. वहीं, नेतन्याहू ने भी संकेत दिए हैं कि अगर वह सत्ता में बने रहते हैं तो ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है.

नेतन्याहू बोले- ट्रंप जैसा दोस्त अमेरिका में फिर मिलना मुश्किल

रविवार को टेलीविजन पर दिए एक बयान में नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को अभूतपूर्व बताया.

उन्होंने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हमारी ऐसी दोस्ती है, जो इससे पहले किसी इजरायली प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच नहीं रही. यह भी संदेह है कि भविष्य में हमें अमेरिका में इतना मित्रवत राष्ट्रपति फिर कभी मिलेगा.'

Advertisement

नेतन्याहू ने आगे कहा, 'ट्रंप का कार्यकाल अभी दो साल और बाकी है और वह आप लोगों से मुझे वोट देने की अपील कर रहे हैं.'

इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि ट्रंप ईरान से पैदा होने वाले खतरे को समाप्त करने के लिए आगे की कार्रवाई करने को तैयार हैं.

मोसाद और सेना को ईरान की सरकार गिराने के निर्देश

नेतन्याहू ने दावा किया कि उन्होंने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद और इजरायली रक्षा बलों (IDF) को ईरान की मौजूदा सरकार को गिराने के निर्देश दिए हैं.

उन्होंने कहा, 'मैंने मोसाद और आईडीएफ को पहले ही इस शासन को गिराने का निर्देश दे दिया है. इस शासन को गिराना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इस खतरे को समाप्त करने का यही एकमात्र तरीका है.'

हालांकि, नेतन्याहू के इन बयानों के बीच व्हाइट हाउस ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट की है.

व्हाइट हाउस की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली ने कहा कि ईरान आर्थिक और सैन्य, दोनों ही दृष्टि से बेहद खराब स्थिति में है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से लगाई गई नाकाबंदी जारी रहेगी.

केली ने ईमेल के जरिए दिए बयान में कहा, 'अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले किसी भी समय ईरान पर हमला नहीं करेगा.'

Advertisement

ट्रंप ने दो बार किया नेतन्याहू का समर्थन

डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार 18 अक्टूबर को नेतन्याहू का समर्थन किया था. इसके बाद रविवार को उन्होंने एक बार फिर इजरायली प्रधानमंत्री के पक्ष में बयान दिया.

सोमवार को पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या नेतन्याहू ने उनसे दूसरी बार समर्थन देने की अपील की थी?

इस पर ट्रंप ने कहा, 'मैंने इस बारे में कभी बात नहीं की. दोनों बार मैंने खुद समर्थन दिया. मुझे लगता है कि नेतन्याहू ने बेहद कठिन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के रूप में बहुत अच्छा काम किया है.'

विपक्ष का आरोप- लोगों को डराकर चुनाव जीतना चाहते हैं नेतन्याहू

इजरायल के प्रमुख विपक्षी नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट ने नेतन्याहू पर चुनाव जीतने के लिए डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया है.

आइजनकोट ने ट्रंप को इजरायल का सच्चा मित्र बताया, लेकिन साथ ही कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इजरायल की जनता द्वारा चुने गए किसी भी नेता के साथ काम करेंगे.

उन्होंने आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनाव प्रचार में ईरान के खतरों और परमाणु हमले की आशंका का इस्तेमाल कर रहे हैं.

आइजनकोट ने कहा, 'डर फैलाने, झूठ और धमकियों के अभियान पर भरोसा किया जा रहा है. इसमें तेल अवीव के बीचोंबीच परमाणु बम विस्फोट की तस्वीरें भी शामिल हैं. लेकिन इस बार यह तरीका काम नहीं करेगा.'

Advertisement

नेतन्याहू ने शेयर किया ईरान के सुप्रीम लीडर का AI वीडियो

चुनाव से ठीक पहले नेतन्याहू ने सोमवार को सोशल मीडिया पर AI से तैयार एक वीडियो शेयर किया. इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को अस्पताल के बिस्तर पर दिखाया गया.

वीडियो के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की गई कि नेतन्याहू का एक और कार्यकाल मोजतबा खामेनेई को उनके दिवंगत पिता अली खामेनेई के करीब पहुंचा सकता है.

अली खामेनेई फरवरी में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों की पहली रात मारे गए थे.

इससे पहले रविवार को भी नेतन्याहू ने कंप्यूटर से तैयार एक तस्वीर शेयर की थी. इसमें तेल अवीव के ऊपर परमाणु विस्फोट के बाद बनने वाला मशरूम क्लाउड दिखाया गया था. इस तस्वीर के जरिए नेतन्याहू ने ईरान से इजरायल के अस्तित्व को खतरा होने की चेतावनी दी थी.

7 अक्टूबर के हमले के बाद इजरायल में पहला चुनाव

इजरायल में मंगलवार को होने वाला चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है. उस हमले ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी कमजोरियों को उजागर किया था और उसके बाद कई मोर्चों पर युद्ध शुरू हो गए थे.

77 वर्षीय नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, इस बार उन्हें देश में बढ़ते राजनीतिक मतभेदों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

Advertisement

चुनावी सर्वेक्षणों के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की सीटें कम हो सकती हैं. इससे दक्षिणपंथी, अति-दक्षिणपंथी और कट्टर धार्मिक दलों के समर्थन से चल रहे उनके गठबंधन का मामूली संसदीय बहुमत खतरे में पड़ सकता है. हालांकि, विपक्ष के सामने भी नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए मजबूत गठबंधन बनाने की चुनौती है.

इजरायल की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में और अधिक दक्षिणपंथ की ओर बढ़ी है. आइजनकोट की पार्टी समेत लगभग सभी यहूदी नेतृत्व वाले राजनीतिक दल फिलिस्तीन के साथ दो-राष्ट्र समाधान का विरोध कर रहे हैं.

अमेरिका में भी ईरान युद्ध को लेकर नाराजगी

नेतन्याहू के समर्थन में ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में भी 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी इन चुनावों में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर अमेरिका में असंतोष है. ईंधन की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की नाराजगी बढ़ाई है. हालांकि, युद्धविराम वार्ताओं के बाद पिछले कई महीनों से बड़े पैमाने पर लड़ाई रुकी हुई है. इन वार्ताओं में इजरायल शामिल नहीं था.

ऐसे में नेतन्याहू के बयान और ट्रंप की ओर से 'अधूरा काम पूरा करने' की अपील ने ईरान के साथ नए टकराव की आशंका बढ़ा दी है. अब इजरायल के मतदाताओं को तय करना है कि नेतन्याहू को एक बार फिर सत्ता में रहने का मौका मिलेगा या देश में नया राजनीतिक नेतृत्व सामने आएगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement