scorecardresearch
 

आसमान की बिजली करेगी धरती का एक्स-रे, 'थंडरक्वेक' बताएगा क्या है जमीन के नीचे

बिजली गिरने के बाद पैदा होने वाली 'थंडरक्वेक' तरंगों में धरती के अंदर की तस्वीर छिपी हो सकती है. नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि इन संकेतों को पढ़कर जमीन के नीचे मौजूद परतों और संरचनाओं की जानकारी जुटाई जा सकती है.

Advertisement
X
आसमान से गिरने वाली बिजली के जरिए वैज्ञानिक अब धरती को स्कैन करेंगे. (Photo: Getty)
आसमान से गिरने वाली बिजली के जरिए वैज्ञानिक अब धरती को स्कैन करेंगे. (Photo: Getty)

धरती के नीचे क्या है, इसका पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों को अब तक भूकंप जैसी घटनाओं से मिलने वाली तरंगों पर काफी निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन नई स्टडी ने एक अलग रास्ता दिखाया है. इसमें बताया गया है कि बिजली गिरने के बाद पैदा होने वाली तरंगों का इस्तेमाल भी जमीन के नीचे की परतों और चट्टानों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने इन तरंगों को 'थंडरक्वेक' नाम दिया है. इनके संकेतों को सही तरीके से पढ़कर यह पता लगाया जा सकता है कि वे जमीन के अंदर से गुजरते समय कैसे बदलते हैं. इसी बदलाव से वैज्ञानिकों को नीचे मौजूद चट्टानों और दूसरी संरचनाओं के बारे में सुराग मिल सकता है. यह तरीका कुछ हद तक एक्स-रे जैसा काम कर सकता है.

यह भी पढ़ें: "जंग कैसी भी हो, कम नहीं पड़ेंगी मिसाइलें... रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया बड़ा ऐलान

बिजली गिरने से बनता हैं 'थंडरक्वेक'

जब बिजली जमीन पर गिरती है तो उसकी बहुत ज्यादा एनर्जी एक साथ जमीन तक पहुंचती है. इससे जमीन के अंदर कंपन जैसी तरंगें पैदा होती हैं. इन्हीं तरंगों को 'थंडरक्वेक' कहा जाता है. यह सामान्य भूकंप से अलग है. भूकंप में जमीन के अंदर होने वाली हलचल से तरंगें बनती हैं, जबकि 'थंडरक्वेक' बिजली गिरने की वजह से पैदा होती हैं.

Advertisement

Lightning Thunderquakes

जब ये तरंगें जमीन के अंदर आगे बढ़ती हैं तो रास्ते में अलग-अलग चट्टानें और परतें आती हैं. इनसे गुजरते समय तरंगों की गति और दिशा बदल सकती है. वैज्ञानिक इसी बदलाव को रिकॉर्ड करके जमीन के नीचे की जानकारी हासिल कर सकते हैं.

एक्स-रे की तरह कैसे काम करेगी?

एक्स-रे शरीर के अंदर से गुजरता है और अलग-अलग हिस्सों की जानकारी देता है. इसी तरह 'थंडरक्वेक' की तरंगें जमीन के अंदर से गुजरते समय वहां मौजूद अलग-अलग चट्टानों और परतों के बारे में संकेत दे सकती हैं. अगर किसी जगह जमीन के नीचे अलग तरह की चट्टान है तो तरंग का व्यवहार भी बदल सकता है. वैज्ञानिक इन बदलावों का अध्ययन करके अंदाजा लगा सकते हैं कि जमीन के नीचे किस तरह की संरचना मौजूद है.

यह भी पढ़ें:  "हवा चली, आग बेकाबू... अमेरिकी शहर में 15 हजार एकड़ जंगल राख, 24 हजार लोग बेघर

भूकंप के बिना भी मिल सकता है डेटा

धरती के अंदर की परतों को समझने के लिए वैज्ञानिक भूकंप की तरंगों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन भूकंप हर जगह और हर समय नहीं आते. ऐसे में बिजली से पैदा होने वाली तरंगें एक अतिरिक्त तरीका दे सकती हैं. दुनिया के कई हिस्सों में बिजली गिरने की घटनाएं होती हैं. अगर इन घटनाओं से पैदा होने वाले 'थंडरक्वेक' संकेतों को रिकॉर्ड किया जाए तो वैज्ञानिक उन्हें जमीन के नीचे की जानकारी से जोड़ सकते हैं.

Advertisement

Lightning Thunderquakes

अभी शुरुआती दौर में है तकनीक

हालांकि, इस तरीके को अभी सीधे धरती का एक्स-रे कहना सही नहीं होगा. वैज्ञानिकों को अलग-अलग जगहों से और ज्यादा डेटा जुटाना होगा. साथ ही यह भी देखना होगा कि बिजली गिरने से बनने वाली तरंगें अलग-अलग जमीन और चट्टानों में कितनी सही जानकारी देती हैं.

फिलहाल नई स्टडी ने इतना जरूर दिखाया है कि बिजली गिरने से पैदा होने वाली 'थंडरक्वेक' तरंगों में जमीन के नीचे की जानकारी हासिल करने की क्षमता हो सकती है. अगर इस तरीके को आगे और बेहतर किया गया तो भविष्य में यह धरती के अंदर की परतों को समझने का एक नया साधन बन सकता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement