भारत अंतरिक्ष में अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख वी. नारायणन ने कहा है कि 2029 तक देश में चार लॉन्च पैड काम करने लगेंगे. इसके लिए तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में करीब 2,000 एकड़ में एक नया स्पेसपोर्ट बनाया जा रहा है. यहां छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने वाले रॉकेट तैयार किए जाएंगे. इस कदम से भारत को देश और दुनिया में सैटेलाइट लॉन्च करने की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
नारायणन ने 25 अक्टूबर को चेन्नई में एक निजी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसरो गगनयान मिशन के तहत जल्द ही पहला बिना इंसान वाला टेस्ट करने की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा, जापान की अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर चंद्रयान-5 मिशन पर भी काम किया जाएगा. इसरो अपने काम में निजी कंपनियों की मदद भी लेगा, लेकिन इसका निजीकरण नहीं होगा.
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2029 तक चार लॉन्च पैड बनाने की तैयारी
लॉन्च पैड वह जगह होती है, जहां से रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजा जाता है. लॉन्च पैड की संख्या बढ़ने से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने में मदद मिल सकती है. इससे इसरो को अलग-अलग अंतरिक्ष मिशनों के लिए ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी. नारायणन के मुताबिक, तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में बनने वाले नए स्पेसपोर्ट में रॉकेट और सैटेलाइट तैयार करने के लिए इमारतें बनाई जाएंगी.
यहां लॉन्च पैड और रेल ट्रैक सिस्टम भी होगा. इसके अलावा, रॉकेट की उड़ान पर नजर रखने और उससे जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए जरूरी सिस्टम लगाए जाएंगे. इसरो की योजना में आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्च पैड बनाना भी शामिल है. हालांकि, चारों लॉन्च पैड कहां होंगे और उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.

निजी कंपनियों को भी जोड़ेगा इसरो
इसरो प्रमुख ने साफ किया कि संगठन का निजीकरण नहीं किया जाएगा. यानी इसरो सरकारी संगठन ही रहेगा. हालांकि, सैटेलाइट लॉन्च करने की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए निजी कंपनियों और स्टार्टअप की मदद ली जाएगी. इसरो इन कंपनियों को तकनीकी जानकारी देगा और उनके काम में मदद करेगा. इससे देश में स्पेस से जुड़े कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है. साथ ही, इस क्षेत्र में हजारों नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है.
गगनयान के लिए होंगे तीन बिना इंसान वाले टेस्ट
गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है. इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है. इंसानों को भेजने से पहले इसरो तीन ऐसे टेस्ट करेगा, जिनमें कोई अंतरिक्ष यात्री नहीं होगा. नारायणन ने बताया कि पहला टेस्ट अगले दो महीनों में करने की योजना है. इसके बाद दो और टेस्ट किए जाएंगे. इन परीक्षणों में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बनाए गए मॉड्यूल के अंदर की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े सिस्टम की जांच होगी.
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इसके अलावा, तापमान, दबाव और नमी में बदलाव के दौरान भी इन सिस्टम को परखा जाएगा. किसी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की भी जांच होगी. नारायणन के मुताबिक, गगनयान मिशन के लिए जमीन पर करीब 8,000 प्रयोग किए जा चुके हैं. इस मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री भी खास ट्रेनिंग ले रहे हैं.
जापान के साथ चंद्रयान-5 मिशन की तैयारी
इसरो जापान की अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर चंद्रयान-5 मिशन पर काम करने की योजना बना रहा है. इस मिशन में करीब 350 किलोग्राम का रोवर चंद्रमा की सतह पर भेजा जाएगा. यह रोवर वहां 100 दिनों तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा. इस मिशन की लॉन्च तारीख और बाकी तैयारियों के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं दी गई है. इस मिशन का मकसद चंद्रमा की सतह पर वैज्ञानिक अध्ययन करना है.
कुल मिलाकर, इसरो आने वाले सालों में रॉकेट लॉन्च करने की सुविधाएं बढ़ाने, गगनयान मिशन की तैयारी पूरी करने और चंद्रमा पर नए मिशन भेजने की दिशा में काम कर रहा है. इसके साथ ही, निजी कंपनियों की मदद से भारत में अंतरिक्ष से जुड़े काम को भी बढ़ावा देने की योजना है.