scorecardresearch
 

बिना पेट्रोल दौड़ेंगी कारें! सरकार ने E100 फ्यूल वाली गाड़ियों का रास्ता किया साफ, जानें क्या बदलेगा

E100 Flex Fuel Vehicles: सरकार ने E85 और E100 इथेनॉल फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इसके लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है. यानी अब प्योर इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियों को मंजूरी दे दी गई है.

Advertisement
X
E100 यानी फ्लेक्स-फ्यूल वाली कारों में 100% इथेनॉल का इस्तेमाल होता है. Photo: ITG
E100 यानी फ्लेक्स-फ्यूल वाली कारों में 100% इथेनॉल का इस्तेमाल होता है. Photo: ITG

पेट्रोल प्राइस, कच्चे तेल की गणित और फ़्यूल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता. इस पूरी कहानी में इथेनॉल सबसे अहम किरदार बनकर उभरा है. E20 पेट्रोल को लेकर मचा घमासान अभी शांत ही हुआ था कि, अब सरकार ने E85 और E100 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों के लिए नियमों का रास्ता साफ कर दिया है. मतलब, आने वाले वक्त में कारों के इंजन प्योर या ब्लेंडेड पेट्रोल की जगह लगभग पूरी तरह इथेनॉल के भरोसे भी दौड़ सकते हैं. लेकिन कहानी में एक पेंच है. यह मत सोचिएगा कि कल सुबह उठकर अपनी मौजूदा पेट्रोल कार में E100 भरवा लेंगे. ऐसा सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में मुमकिन होगा, जिन्हें इस फ्यूल के लिए खास तौर पर बनाया गया है. आइये जानें सरकार के इस फैसले से क्या-क्या बदलेगा.

दरअसल, सरकार ने E85 और E100 इथेनॉल फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इसके लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स में संशोधन को मंजूरी दी गई है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 23 अक्टूबर 2026 को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है. इसके तहत E85 के साथ E100 फ्यूल को भी नियमों में शामिल किया गया है. इससे वाहन निर्माता कंपनियों के लिए खास तौर पर इथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को तैयार करने और बाजार में उतारने का कानूनी रास्ता साफ होगा.

यह भी पढें: इस दिवाली घर लाएं सस्ती 7-सीटर फैमिली कारें! कीमत 5.73 लाख

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी मौजूदा पेट्रोल कार में इथेनॉल की अधिक मात्रा वाला फ्यूल भरवा सकेंगे. इसके लिए गाड़ी का खास तौर पर डिजाइन और प्रमाणित होना जरूरी होगा.

Advertisement

नियमों में क्या हुआ है बदलाव

सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में नियम 115 के तहत एमिशन नॉर्म्स, फ्यूल की क्वॉलिटी और वाहनों की जांच से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है. अलग-अलग उप-नियमों में E85 के साथ E100 का भी उल्लेख किया गया है, ताकि 100 फीसदी बायो-इथेनॉल से चलने वाले वाहनों के टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के लिए स्पष्ट नियम बनाए जा सकें. यह कदम उन वाहन कंपनियों के लिए अहम है, जो भारतीय बाजार में E100 फ्यूल से चलने वाली कारें पेश करने की तैयारी कर रही हैं.

इस अधिसूचना में सिर्फ इथेनॉल फ्यूल से जुड़े नियम ही नहीं बदले गए हैं, बल्कि वाहनों के वजन की सीमा में भी बदलाव किया गया है. नियम 115 के सब-सेक्शन (18) में वाहन का कुल वजन यानी ग्रॉस व्हीकल वेट की सीमा 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी गई है. इसके अलावा, नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि E85 या E100 का इस्तेमाल केवल उन्हीं फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में होना चाहिए, जिन्हें OEM ने इसी फ्यूल के लिए तैयार किया है.

यह भी पढें: लॉन्च होते ही... Sold-out! बंद करनी पड़ी बाइक की बुकिंग

इस साल अप्रैल में सरकार ने इन प्रस्तावित बदलावों को लेकर रायशुमारी की थी. अब इस दिशा में आगे बढ़ने से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के मैन्युफैक्चरिंग और इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यह फैसला उन वाहन कंपनियों के लिए भी अहम है, जो आने वाले समय में E100 फ्यूल से चलने वाली कारों को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं.

Advertisement

क्या है E85 और E100 फ्यूल

E85 और E100 इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल हैं. E85 में करीब 85 फीसदी इथेनॉल और बाकी हिस्सा पेट्रोल होता है. वहीं, E100 में लगभग पूरी तरह इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे फ्यूल पर चलने के लिए गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को उसी हिसाब से तैयार करना पड़ता है. इसलिए E100 फ्यूल से चलने वाली कारें सामान्य पेट्रोल कारों से अलग होंगी.

क्या मौजूदा पेट्रोल कारों में डाल सकेंगे E100

सामान्य पेट्रोल या E20 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों में सीधे E85 या E100 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. E20 में अधिकतम 20 फीसदी इथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है. वहीं, E20 से ज्यादा और E100 तक इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें इसके लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया हो और जरूरी प्रमाणन मिला हो. यानी अपनी मौजूदा कार में अधिक इथेनॉल वाला फ्यूल डालने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि वह वाहन इसके अनुकूल है या नहीं.

यह भी पढें: नई छोड़िए... इस ब्रांड की पुरानी कारों पर टूटे लोग! बिकीं 65 लाख गाड़ियां

सरकार का यह कदम देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है. ऐसी गाड़ियों को अलग-अलग रेशियो वाले पेट्रोल और इथेनॉल ब्लेंडिंग पर चलने के लिए तैयार किया जाता है. E85 और E100 के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को मंजूरी मिलने के बाद वाहन कंपनियों के लिए इस तकनीक पर बेस्ड मॉडल तैयार करने का रास्ता आसान होगा. 

Advertisement
Maruti Wagon R Flex Fuel
Maruti Wagon R Flex Fuel को हाल ही में लॉन्च किया गया था. Photo: ITG

देश की पहली फ्लेक्स फ़्यूल कार

हाल ही में मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार के तौर पर Maruti Wagon R Flex Fuel को लॉन्च किया था. केंद्रीय सड़क और परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस कार से पर्दा उठाया था. लॉन्च के वक्त कंपनी का कहना था कि, ये कार E85 फ्यूल पर आसानी से दौड़ सकती है. जो फ्यूल रेगुलर पेट्रोल (102.12 रुपये प्रतिलीटर) से तकरीबन 20 रुपये सस्ता है. इस फ्यूल की दिल्ली में कीमत 82.12 रुपये प्रतिलीटर है. 

मारुति वैगनआर के फ्लेक्स फ्यूल वेरिएंट को बिजनेस टुडे द्वारा टेस्ट भी किया गया था. उस दौरान इस कार को दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों, फ्लाईओवर और खुले रास्तों पर करीब 30 किलोमीटर तक चलाया गया. इस दौरान सबसे बड़ा सरप्राइज यह रहा कि इसकी ड्राइविंग बिल्कुल सामान्य WagonR जैसी महसूस हुई. इंजन की स्मूदनेस में कोई खास अंतर नहीं दिखा. एक्सीलेरेशन सामान्य रहा और शहर में चलाते समय कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि कार किसी अलग तरह के फ्यूल पर चल रही है.

कितना देती है कार?

सबसे बड़ा सवाल यही था कि, आखिर ये कार कितना माइलेज देती है. टेस्ट ड्राइव के दौरान कार के मल्टी इंफॉर्मेशन डिस्प्ले (MID) पर औसत माइलेज 11.8 किलोमीटर प्रति लीटर दिखाई दिया. हालांकि इसे अंतिम रियल टाइम माइलेज नहीं माना जा सकता. क्योंकि टेस्ट के दौरान दिल्ली का भारी ट्रैफिक, कई बार रुकना, वीडियो शूटिंग, लंबे समय तक इंजन चालू रखना और बार-बार एक्सीलेरेशन जैसे कई कारण शामिल थे. वास्तविक माइलेज जानने के लिए लंबी और कंट्रोल्ड कंडिशन में अलग टेस्ट की जरूरत होगी.

मारुति वैगनआर के फ्लेक्स फ्यूल वर्जन की शुरुआती कीमत 7.24 लाख रुपये है. फ्लेक्स फ़्यूल वाली कारों को लेकर सबसे बड़ी विडम्बना ये है कि, इन कारों में इस्तेमाल होने वाला फ्यूल यदि सस्ता है तो इन कारों की कीमत ज्यादा है. मारुति ने जिस वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल वैरिएंट को लॉन्च किया था, वो मूल रूप से वैगनआर के ZXi वैरिएंट पर बेस्ड है. रेगुलर पेट्रोल मॉडल की तुलना में फ्लेक्स फ़्यूल वर्जन तकरीबन 85,000 रुपये महंगा है. इसके अलावा शुरुआती माइलेज चेक में भी कोई बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement