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200 साल से कोई नहीं पढ़ पाया नेपोलियन का गुप्त संदेश, AI ने 6 घंटे में सुलझाई पहेली

200 साल से एक गुप्त संदेश का राज कोई नहीं खोल पाया था. फिर AI ने सिर्फ 6 घंटे में ऐसी पहेली सुलझा दी, जिसने इतिहासकारों और कोड तोड़ने वालों को भी हैरान कर दिया. अब इतिहास के पुराने राज खुल रहे हैं.

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ये है पेरिस के विन्सेंस कैसल में रखा हुआ नेपोलियन बोनापार्ट का कोड जिसे AI ने डिकोड किया. (Photo: AFP)
ये है पेरिस के विन्सेंस कैसल में रखा हुआ नेपोलियन बोनापार्ट का कोड जिसे AI ने डिकोड किया. (Photo: AFP)

साल 1809 में फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट के आदेश पर एक गुप्त संदेश लिखा गया था. इस संदेश में फ्रांसीसी और उसके सहयोगी देशों की सेना की स्थिति के बारे में जानकारी थी. इसे खास कोड में लिखा गया था, जिसे समझना आसान नहीं था. करीब 200 साल से ज्यादा समय तक यह संदेश अनसुलझा रहा, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इसे सुलझा लिया गया है.

अमेरिका की साइबर सिक्योरिटी कंपनी सेंटिनलवन  में काम करने वाले 27 साल के AI इंजीनियर कार्टर चर्च ने ओपन AI के GPT-6 एस्ट्रा मॉडल की मदद से इस संदेश को करीब 6 घंटे में समझ लिया. यह संदेश एक ऑनलाइन अकादमिक आर्काइव में मौजूद था. इस घटना से पता चलता है कि AI अब पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों को समझने और उनसे जुड़ी जानकारी सामने लाने में भी मदद कर रहा है.

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1809 के गुप्त संदेश में क्या था?

यह संदेश 19वीं सदी का है. इसमें करीब दो दर्जन लाइनों में अलग-अलग निशान, नंबर और अक्षर लिखे गए थे. इनके जरिए सेना की स्थिति से जुड़ी जानकारी दी गई थी. उस समय युद्ध के दौरान दुश्मन से जरूरी जानकारी छिपाने के लिए ऐसे कोड का इस्तेमाल किया जाता था.

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AI Codebreaking, Napoleon Bonaparte

इस तरह के संदेशों को समझने के लिए आमतौर पर कोड तोड़ने की तकनीक और उस दौर के इतिहास की जानकारी की जरूरत होती है. इसमें काफी समय और मेहनत लग सकती है. इसी वजह से कई पुराने संदेश लंबे समय तक अनसुलझे रह जाते हैं.

AI ने कैसे सुलझाई 200 साल पुरानी पहेली?

कार्टर चर्च ने इस संदेश को समझने के लिए AI की मदद ली. उन्होंने कुछ शाम इस पर काम किया और फिर जापान के इंजीनियर सातोशी तोमोकीय से संपर्क किया. तोमोकीय पुराने और अब तक नहीं सुलझाए जा सके कोड की एक ऑनलाइन लिस्ट तैयार करते हैं. उन्होंने चर्च के नतीजे की जांच करने में मदद की.

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चर्च के मुताबिक, इस काम के लिए उन्हें कोड तोड़ने की तकनीक या उस दौर के इतिहास के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी हासिल करने की जरूरत नहीं पड़ी. AI ने कम समय में संदेश को समझने में मदद की. इस मामले में AI की सबसे बड़ी खासियत लगातार कोशिश करते रहना रही.

पुराने कोड सुलझाने में AI का बढ़ता इस्तेमाल

तोमोकीय के मुताबिक, सितंबर 2026 के मध्य से उनकी लिस्ट में मौजूद ज्यादातर गुप्त संदेश AI की मदद से सुलझाए गए हैं. उनका मानना है कि साल 2026 को ऐतिहासिक कोड सुलझाने के मामले में बड़े बदलाव के साल के रूप में याद किया जा सकता है.

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हालांकि, सभी कोड सुलझाना आसान नहीं है. कुछ संदेशों को समझने के लिए जरूरी जानकारी बहुत कम उपलब्ध है. ऐसे में AI के लिए भी सही जवाब तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है. तोमोकीय ने कहा कि पुराने सवालों के जवाब मिलने से वह खुश हैं, लेकिन उन्हें इस बात को लेकर मिले-जुले भाव भी महसूस हो रहे हैं कि AI उन मुश्किल पहेलियों को इतनी आसानी से सुलझा रहा है, जिन पर इंसान लंबे समय से काम कर रहे थे.

पुराने दस्तावेज पढ़ने में भी मदद कर रहा AI

AI का इस्तेमाल सिर्फ गुप्त संदेशों को समझने तक सीमित नहीं है. वैज्ञानिक पुराने दस्तावेजों और पांडुलिपियों को पढ़ने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इटली में शोधकर्ता विसुवियस ज्वालामुखी के साल 79 में फटने से जले हुए पुराने पेपर रोल को पढ़ने के लिए AI और एक्स-रे तकनीक की मदद ले रहे हैं. इन रोल को सीधे खोलने पर इनके टूटने का खतरा है. जून में शोधकर्ताओं ने एक रोल को डिजिटल तरीके से पूरा खोलने में सफलता हासिल की. इसमें नैतिकता से जुड़ा एक लेख मिला.

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1 करोड़ पन्नों और पुराने रिकॉर्ड पर भी काम

फ्रांस के पेरिस में शोधकर्ता यहूदी इतिहास और संस्कृति से जुड़े करीब 1 करोड़ पन्नों को डिजिटल रूप में पढ़ने और व्यवस्थित करने पर काम कर रहे हैं. इससे पुराने समय के लोगों, जगहों और विचारों के बीच संबंधों को समझने में मदद मिल सकती है.

वहीं, नोट्रे डेम कैथेड्रल के मध्यकालीन रिकॉर्ड के 14,600 लैटिन पन्नों को पढ़ने के लिए भी AI का इस्तेमाल किया गया है. इस काम में अक्षरों को पहचानने की इसकी क्षमता 88 से 94 प्रतिशत के बीच रही. इससे कैथेड्रल के पुराने कामकाज, निर्माण, कर्मचारियों और अनाथ बच्चों की देखभाल से जुड़ी जानकारी सामने आई है. इस तरह AI इतिहास से जुड़े दस्तावेजों को पढ़ने में लगने वाला समय कम कर रहा है. हालांकि, इनसे मिली जानकारी की जांच करना भी जरूरी है, ताकि पुराने रिकॉर्ड को सही तरीके से समझा जा सके.

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