पेरिस
पेरिस (Paris) फ़्रांस की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है (Capital of Franc). इसका क्षेत्रफल 105 वर्ग किलोमीटर है (Paris Area). 2015 तक इसकी आबादी 22,29,621 है (Paris Population). पेरिस, यूरोप में वित्त, वाणिज्य, फैशन और कला के प्रमुख केंद्रों में से एक है.
2012 में पेरिस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 649.6 अरब यूरो था, जो कि पूरे फ्रांस के सकल घरेलू उत्पाद का 30.4 प्रतिशत है. पेरिस को दुनिया के सबसे सुन्दर नगरों में से एक माना जाता है. इसे दुनिया की फैशन और ग्लैमर राजधानी भी कहा जाता है (Capital of Fashion and Glamor).
पेरिस सेन नदी के किनारे बसा हुआ है. पेरिस-चार्ल्स डी गॉल और पेरिस-ओरली सहित दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के साथ ही, रेल, राजमार्ग और हवाई-परिवहन का केंद्र है (Paris Transportation).
पेरिस में कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संस्थान हैं- लौवर संग्रहालय, मुसे डी'ओर्से, फ्रांसिस इंपीरियनिस्ट, पोम्पिडु-केंद्र म्यूसिक नेशनल डी'आर्ट मॉर्डेन शामिल है. सेन नदी के साथ शहर के केंद्रीय क्षेत्र को यूनेस्को विरासत स्थल कहा है, जिसमें नॉट्रे डेम कैथेड्रल, सैंट-चैपल, पुर्व यूनिवर्सल प्रदर्शनी ग्रैंड पैलेस, पेटिट पालिसी और आइफिल टावर सहित कई उल्लेखनीय स्मारक शामिल हैं. पेरिस दुनिया का शीर्ष पर्यटन स्थलों में से एक है (Paris Tourism).
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और खराब सरकारी सेवाओं के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए. शनिवार को इस प्रदर्शन में 3.2 लाख लोग शामिल हुए. पेरिस में मार्च का रास्ता प्रशासन ने बदला था. प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया.
फ्रांस में सड़कें जंग का मैदान बन चुकी हैं. आर्थिक बदहाली पर राजधानी पेरिस के मार्च में एक लाख 10 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए. पुलिस ने काबू पाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. प्रदर्शन के दौरान दुकानों में तोड़फोड़ की गई. मार्सिले और ल्योन समेत दूसरे शहरों में भी हिंसक प्रदर्शन हुआ. देखें दुनिया आजतक.
पेरिस में एक लाख लोग मार्च में शामिल हुए. दिनभर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद अंत में झड़पें शुरू हो गईं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने के लिए लाठियों, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.
फ्रांस में महंगाई, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 4.1 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि मजदूर संगठनों ने यह संख्या आठ लाख तक बताई. पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. सुरक्षा के लिए 70 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए.
यूरोप के कई देशों में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. फ्रांस, इटली और बेल्जियम समेत कई यूरोपीय देशों में बढ़ती महंगाई, असमानता और सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं. फ्रांस की राजधानी पेरिस में करीब 1.25 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. देश भर में लगभग 4 लाख से अधिक लोगों ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया. पेरिस में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया.
24 अक्टूबर को फ्रांस में महंगाई, बेरोजगारी, वेतन, पेंशन और स्कूलों की फंडिंग जैसे मुद्दों को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे।
पेरिस के पश्चिम में यवेलिन जिले के ट्रैप्स के पास चलती गाड़ी से गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हुई और कम से कम 4 लोग घायल हुए. एक संदिग्ध की गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी अभियोजक कार्यालय ने जांच शुरू की है, जबकि हमले का मकसद अभी साफ नहीं है.
बर्लिन में पीयूष गोयल ने यूरोप की ‘इक्वल ब्लेम’ यानी बराबर दोष वाली क्लाइमेट थ्योरी को खारिज कर दिया. भारत दुनिया की 17% आबादी रखने के बावजूद 3% से कम उत्सर्जन करता है, जबकि यूरोप 3-4% आबादी से 18% उत्सर्जन.
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और स्थानीय कर्फ्यू के बीच भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीयों और यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है. दूतावास ने प्रदर्शन वाली जगहों और भीड़ से दूर रहने तथा स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है. पेरिस, मार्से और लियोन में हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है.
यूरोप के कई देशों में बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली समेत कई मुद्दों पर लोगों का गुस्सा भड़क गया है...फ्रांस में हालात पर काबू के लिए जहां राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में कर्फ्यू का दौर जारी है, वहीं इटली में दंगा रोधी कड़े नियम को मंजूरी दी गई है. देखें...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की इमिग्रेशन नीति पर हमला बोलते हुए दावा किया है कि पेरिस जल्द मुस्लिम शहर बन जाएगा. उनके बयान ने पेरिस में प्रवास, धार्मिक पहचान और राष्ट्रीय संस्कृति को लेकर बहस तेज कर दी है. लेकिन क्या आंकड़े भी ट्रंप के दावे की पुष्टि करते हैं? पेरिस और उसके उपनगरों में बढ़ती मुस्लिम आबादी का सच क्या है?
फ्रांस और यूरोप के कई शहरों में हिंसा, आगजनी और लूटपाट का दौर जारी है. पेरिस समेत 10 शहरों में उपद्रवियों ने कोहराम मचा रखा है, जिसके बाद प्रशासन ने कर्फ्यू लागू कर दिया है. महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ 6 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस ने अब तक 2,000 से अधिक दंगाइयों को गिरफ्तार किया है, जबकि झड़पों में सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं.
हालात कितने भी बिगड़ जाएं, कुछ लोग अपना सुकून नहीं छोड़ते. पेरिस से सामने आया एक वायरल वीडियो कुछ ऐसा ही नजारा दिखाता है. शहर की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान आग और हिंसा का माहौल था, लेकिन कुछ ही दूरी पर एक कपल कैफे में बैठकर आराम से ड्रिंक पीता और बातचीत करता नजर आया.
फ्रांस में वीकेंड पर हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं हुईं. इसके बाद सरकार ने पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में पाबंदियां लगा दीं. कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है. सार्वजनिक सभाओं पर भी रोक लगाई गई है. हिंसा के दौरान करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
यूरोप के कई देशों में इन दिनों हिंसा और बवाल जारी है... इनमें सबसे ज्यादा फ्रांस का माहौल बिगड़ रहा है... पेरिस समेत करीब 10 शहरों में विरोध प्रदर्शन, हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ जारी है... नकाबपोश दंगाई बड़े बड़े शोरूम में लूटपाट कर रहे हैं... दंगाइयों पर आपराधिक मामले दर्ज कर फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मैक्रों ने ऐलान कर दिया है कि, लूटपाट और तोड़फोड़ करने वाले दंगाइयों से ही हर्जाना वसूला जाएगा... आज पीएम सेबेस्टियन ने कहा कि, दंगा प्रभावित शहरों में कर्फ्यू लगाया जाएगा. देखें...
फ्रांस में वीकेंड पर हुए हिंसक प्रदर्शनों और लूटपाट के बाद सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने स्थानीय अधिकारियों से प्रभावित इलाकों में आंशिक कर्फ्यू लगाने को कहा है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आपातकाल भी लागू किया जा सकता है. राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और लूटपाट के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकरा दिया है. उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक पर जवाब मांगा है.
फ्रांस की राजधानी पेरिस में विरोध प्रदर्शनों ने सड़कों पर तनाव बढ़ा दिया है. आगजनी, आंसू गैस, पुलिस के साथ झड़प और जले हुए वाहनों की तस्वीरें डरा देने वाली हैं. बैनर और नारों के साथ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश प्रशासन के लिए चुनौती बनता दिख रहा है.
प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं फ्रांस में सामने आई हैं. अधिकारियों का कहना है कि प्रोटेस्ट कर रहे करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया. लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए शांति की अपील की है.
फ्रांस में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं. कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं. करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए. हिंसा से कारोबार भी प्रभावित हुआ है. वीडियो में जानें क्या है पूरा मामला.
वेंस ने कहा कि वेस्टर्न लिबरल्स ने डाइवर्सिटी और करुणा के नाम पर फ्रांस और अन्य देशों में 'तीसरी दुनिया' (थर्ड वर्ल्ड) को इम्पोर्ट किया. उन्होंने एसिमिलेशन और कंपैटिबिलिटी के बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया.