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Janmashtami 2026: कल या परसों, जन्माष्टमी कब है? ज्योतिषविद ने पंचांग देखकर बताई सही तिथि

ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक भादो कृष्ण अष्टमी तिथि रहेगी. चूंकि जन्माष्टमी भादो कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्य रात्रि के संयोग में मनाई जाती है. इसलिए इस बार जन्माष्टमी का पर्व 4 सिंबर को ही मनाया जाएगा.

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ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने पंचांग देखकर जन्माष्टमी की तारीख बता दी है. (Photo: ITG)
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने पंचांग देखकर जन्माष्टमी की तारीख बता दी है. (Photo: ITG)

हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है. कोई 4 सितंबर तो कोई 5 सितंबर को पर्व मनाने की बात कह रहा है. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र ने पंचांग देखकर जन्माष्टमी की सही तारीख बता दी है. आइए जानते हैं कि जन्माष्टमी की सही तारीख क्या है और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का मुहूर्त क्या रहने वाला है.

कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी?
ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, 4 सितंबर की रात 11:57 बजे से 5 सितंबर की रात 12:43 बजे तक भादो कृष्ण अष्टमी तिथि रहेगी. चूंकि जन्माष्टमी भादो कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्य रात्रि के संयोग में मनाई जाती है. इसलिए इस बार जन्माष्टमी का पर्व 4 सिंबर को ही मनाया जाएगा. इसी दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक और पूजा की जाती है. जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का समय विशेष माना जाता है. इसी समय भक्त भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं. पूजा में पंचामृत से अभिषेक, नए वस्त्र पहनाना, तिलक लगाना और आरती करने की परंपरा है.

पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन दोपहर के समय पूजा करने के लिए अभिजीत मुहूर्त रहेगा जिसका समय सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहने वाला है. इसके बाद रात्रिकाल में पूजा का मुहूर्त निशिता काल में रहेगा. इस दिन निशीता काल रात 11.57 बजे से रात 12.43 बजे तक रहने वाला है.

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अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग
इस बार जन्माष्टमी को खास बनाने वाला एक प्रमुख कारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एकसाथ होना है. 4 सितंबर की मध्यरात्रि में जब जन्मोत्सव मनाया जाएगा, उस समय यह संयोग रहेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में भगवान कृष्ण के जन्म के समय भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग था.

पारण का समय
ज्योतिषविद के अनुसार, रात में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पूरा होने के तुरंत बाद व्रत खोलना उचित नहीं माना गया है. व्रत रखने वाले भक्त 5 सितंबर को सुबह 6:05 बजे के बाद पारण कर सकते हैं. रात में जन्मोत्सव के बाद फल और दूध आदि ग्रहण करने की बात कही गई है. अगले दिन भगवान को भोग लगाने के बाद प्रसाद लेकर व्रत का पारण किया जा सकता है.

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