भगवान शिव का प्रिय श्रावण मास कल से शुरू हो रहा है. इस साल सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त तक रहने वाला है. सावन में भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा है. कहते हैं कि इस पावन महीन में शिवलिंग का जलाभिषेक करने से महादेव व्यक्ति की हर मनोकामना पूर्ण कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर चढ़ाते वक्त ज्यादातर भक्त बड़ी गलतियां कर देते हैं. अधिकांश लोगों को शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही प्रक्रिया तक नहीं पता है. आइए आज आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं.
सिहोर के जाने-माने कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही तरीका बताया है. उन्होंने बड़ी ही सरल भाषा में शिवलिंग की व्याख्या भी की है, जिससे भक्तों को समझ आए कि आखिर शिवलिंग है क्या. उन्होंने बताया कि शिवलिंग में भगवान शिव के अलावा उनका परिवार और 33 करोड़ देवी-देवता समाए हैं. इसलिए इसका पूजन और जलाभिषेक श्रद्धापूर्वक सही विधि से करना जरूरी होता है.
शिवलिंग क्या है?
कथावाचक ने बताया कि जिस स्थान पर शिवलिंग रखा हुआ है, वो माता पार्वती का हस्त कमल है और वो उन्हीं का स्थान है. शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद जल जिस जलाधारी से निकलता है, उसे गौमुख कहते हैं. मान्यता है कि उस जलाधारी के बीच में महादेव की पुत्री अशोक सुंदरी का स्थान होता है. जलाधारी के दाएं हिस्से में भगवान गणेश और बाएं हिस्से में भगवान कार्तिकेय विराजमान होते हैं. इसके अलावा, शिवलिंग पर जो जल गिर रहा है, वहां शिवजी की पांच पुत्रियां जया, विषहरा, शामलीबारी, देव और दौतलि विराजमान होती हैं. जलाधारी से निकलकर जिस स्थान से जल मंदिर से बाहर जा रहा है वो 33 कोटि के देवी-देवताओं का स्थान है.
शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विधि क्या है?
सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने वाले अगर सही विधि से जल चढ़ाएं तो उत्तम परिणाम मिलेंगे. सबसे पहले शिवलिंग के जलाधारी वाले स्थान पर दाईं तरफ अपनी मनोकामना कहते हुए जल चढ़ाएं. इसके बाद बाईं तरफ परिवार को रोग मुक्त रखने की कामना से जल चढ़ाएं. फिर धनधान्य और सुख-समृद्धि के लिए अशोक सुंदरी के स्थान पर जल चढ़ाएं. इसके बाद माता पार्वती के जिस हस्त कमल पर शिवलिंग रखा हुआ है, उस पर जल चढ़ाएं. इसके बाद शिवलिंग के ऊपर जल चढ़ाएं. शिवलिंग के जलाभिषेक की सबसे सही प्रक्रिया यही है.