Navratri 2026: शारदीय नवरात्र में सप्तमी, अष्टमी और नवमी की पूजा का विशेष महत्व है. इन दिनों भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं. कोई सप्तमी का व्रत रखता है, तो कई भक्त अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और हवन करते हैं. हालांकि, इस बार तिथियों की गणना के कारण व्रत की तारीखों को लेकर असमंजस है. सप्तमी तिथि दो सूर्योदय तक रहने के कारण सवाल उठ रहा है कि सप्तमी व्रत 17 अक्टूबर को रखा जाएगा या 18 अक्टूबर को. वहीं, महाष्टमी और महानवमी की तारीख भी जानना जरूरी है.
कब है सप्तमी तिथि? 17 या 18 अक्टूबर को रखें व्रत
पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 18 अक्टूबर, रविवार को सुबह 8 बजकर 28 मिनट तक रहेगी. इस कारण 17 और 18 अक्टूबर, दोनों दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहेगी.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. सामान्य नवरात्र पूजा परंपरा के अनुसार, सप्तमी की पूजा और व्रत 17 अक्टूबर को किया जाएगा. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में व्रत के नियम भिन्न हो सकते हैं.
कब है महाष्टमी? जानें सही तारीख
शारदीय नवरात्र में महाष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी.
अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है. इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और कन्या पूजन करते हैं. कुछ परिवारों में अष्टमी की पूजा और कन्या पूजन की परंपरा अलग होती है. ऐसे में अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा.
19 अक्टूबर को ही क्यों है महानवमी?
इस साल महाष्टमी और महानवमी की तिथियां 19 अक्टूबर को पड़ रही हैं. अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट के आसपास समाप्त होगी. इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी.
महानवमी पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस दिन हवन, कन्या पूजन और व्रत से जुड़े अनुष्ठान किए जाते हैं. हालांकि, अष्टमी और नवमी के व्रत तथा पूजा का समय परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय किया जा सकता है.
नवरात्र में कन्या पूजन कब करें?
नवरात्र के दौरान अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन करने की परंपरा है. भक्त छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन करते हैं. उन्हें भोजन कराया जाता है और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा दी जाती है.
जो लोग अष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं, वे अपनी परंपरा के अनुसार 19 अक्टूबर को पूजा कर सकते हैं. वहीं, नवमी पर कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग और नवमी पूजा की परंपरा के अनुसार समय तय करना चाहिए.
नवरात्र में मां कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाती हैं. उनका स्वरूप उग्र होने के बावजूद भक्तों के लिए कल्याणकारी माना जाता है.
आठवें दिन मां महागौरी की आराधना होती है. उन्हें शांति, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. मान्यता है कि उनकी उपासना से भक्तों को सिद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है.
कब होगा दशहरा?
शारदीय नवरात्र के बाद 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस दिन भगवान राम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय को याद किया जाता है. कई जगहों पर इस अवसर पर रावण दहन, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.