गणेश महोत्सव 14 सितंबर से शुरू होने वाला है. इसे लेकर देशभर में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं. गुजरात के सूरत में भी गणेशोत्सव को भव्य और यादगार बनाने के लिए तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है. शहर के वेसू इलाके में इस बार गणेश उत्सव का एक बेहद भव्य आयोजन होने जा रहा है. यहां लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति की ओर से विशाल महल के स्वरूप में गणेश पंडाल तैयार किया जा रहा है. इस विशाल पंडाल का निर्माण करीब 40 हजार वर्ग वार क्षेत्रफल में किया जा रहा है.
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत भगवान गणेश की विशाल और आकर्षक प्रतिमा होगी. इस बार यहां करीब 22 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की जाएगी. खास बात यह है कि इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 700 किलोग्राम टिश्यू पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है. टिश्यू पेपर से प्रतिमा तैयार करने का उद्देश्य इसे अपेक्षाकृत हल्का और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है. विशाल प्रतिमा और भव्य पंडाल गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहने वाले हैं. वेसू इलाके में तैयार हो रहा यह पंडाल अपने विशाल आकार और महलनुमा डिजाइन के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है. पंडाल के निर्माण में आयोजक और कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं.
आयोजकों का कहना है कि इस बार सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहते हुए गणेश उत्सव को धर्म के साथ सेवा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया गया है. गणेश उत्सव के 10 दिनों के दौरान पंडाल में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा. अलग-अलग गायकों को आमंत्रित कर धार्मिक गीत और भजनों की संगीतमय प्रस्तुतियां भी कराई जाएंगी. इससे श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन के साथ भक्ति और संगीत का भी अनुभव मिलेगा. इसके साथ ही समिति की ओर से सामाजिक गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. गणेश उत्सव के दौरान वृद्धाश्रम और शेल्टर होम में रहने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनका सम्मान किया जाएगा. आयोजकों का उद्देश्य समाज के उन लोगों तक भी उत्सव की खुशियां पहुंचाना है, जो किसी कारणवश अपने परिवार से दूर रह रहे हैं.
टिश्यू पेपर की मूर्ति बनाने का ख्याल कैसे आया?
लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति की आयोजक पूजा ने बताया कि गणेश उत्सव हम सब मिलकर पहली बार कर रहे हैं. गणपति हमारे राजा हैं तो राजा के लिए उनका दरबार ही सजना चाहिए. तो हमारी थीम राजा के दरबार की थीम है. और हमारी जो मूर्ति है, वो 22 फीट की इको-फ्रेंडली टिश्यू पेपर की मूर्ति है. उन्होंने कहा कि हम 10-11 दिन उनकी पूजा करते हैं. लेकिन जब हम विसर्जन करते हैं तो वे कहीं न कहीं वो प्रतिमा खंडित हो जाती हैं. इससे भगवान का अपमान होता है. इसलिए हमारे मंडल ने मिलकर यह सोचा कि बाप्पा की प्रतिमा इको-फ्रेंडली और टिश्यू पेपर की रहेगी, जिससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहे.