Ravan Dahan 2026: दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व आज मनाया जा रहा है. इस दिन रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था. तभी से दशहरे पर रावण दहन की परंपरा चली आ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण दहन के लिए प्रदोष काल को ही क्यों खास माना जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता.
प्रदोष काल में क्यों होता है रावण दहन?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में रावण दहन करना शुभ माना जाता है. यह सूर्यास्त के आस-पास का समय होता है. सामान्यत: प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक रहता है. मान्यता है कि इसी समय रावण दहन करने से बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश मिलता है.
प्रदोष काल को क्यों माना जाता है खास?
प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास का समय पूजा-पाठ के लिए खास माना जाता है. इसे गोधूलि वेला भी कहा जाता है. दशहरे पर इस समय रावण दहन करके बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है. कुछ मान्यताओं में सूर्यास्त के बाद के समय को नकारात्मक शक्तियों से भी जोड़ा जाता है.मान्यता है कि रात होने के साथ नकारात्मक शक्तियों का असर बढ़ने लगता है. इसी कारण इनका प्रभाव बढ़ने से पहले ही प्रदोष काल में रावण दहन किया जाता है, ताकि बुरी शक्तियों को हावी होने से रोका जा सके.
रावण दहन 2026 शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजकर 47 मिनट से रात 8 बजकर 23 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय रावण दहन करना शुभ माना जाता है. वहीं, रात में विशेष पूजा के लिए निशीथ काल रात 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.