इस साल दीपावली के दिन तीन प्रमुख ग्रह अपनी नीच राशि में रहेंगे. सूर्य तुला, मंगल कर्क और शुक्र कन्या राशि में स्थित रहेंगे. खास बात यह है कि धन, वैभव और सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह शुक्र भी इस दिन उल्टी चाल चलेगा. दूसरी ओर इस दिन बुधादित्य और शुक्रादित्य राजयोग भी बन रहा है. ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की ऐसी स्थिति को विशेष माना जा रहा है. इसका असर लोगों के आर्थिक जीवन, करियर, पारिवारिक संबंधों और सुख-सुविधाओं पर देखने को मिल सकता है. आइए जानते हैं कि यह दुर्लभ संयोग सभी राशियों के लिए कैसा रहने वाला है.
मेष: साझेदारी और दांपत्य संबंधों में संयम रखने का समय रहेगा. सूर्य सातवें भाव में होने से जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदार के साथ विचारों में मतभेद हो सकते हैं. शुक्र छठे भाव में और शनि से दृष्ट होने से सुख-सुविधाओं और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ सकता है. हालांकि राहु ग्यारहवें भाव में होने से आमदनी के नए अवसर मिल सकते हैं. पुराने विवाद सुलझाने का प्रयास लाभकारी रहेगा.
वृषभ: नौकरी और प्रतिस्पर्धा से जुड़े मामलों में सक्रियता बढ़ सकती है. सूर्य छठे भाव में होने से विरोधियों पर दबाव बनाने और लंबित कार्यों को पूरा करने के अवसर मिलेंगे. शुक्र पांचवें भाव में शनि से दृष्ट, नीच और वक्री होने से प्रेम संबंधों, संतान की शिक्षा और निवेश के मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने होंगे. घर और संपत्ति से जुड़े मामलों में गुरु का सहयोग मिल सकता है.
मिथुन: आर्थिक और पारिवारिक मामलों में सावधानी रखनी होगी. सूर्य पांचवें भाव में होने से शिक्षा, संतान और निवेश से जुड़े विषय महत्वपूर्ण रहेंगे. मंगल दूसरे भाव में होने से वाणी में कठोरता और पारिवारिक खर्च बढ़ने की आशंका रहेगी. शनि से दृष्ट और नीच शुक्र शुक्र चौथे भाव में वक्री होने से वाहन, मकान, साज-सज्जा और घरेलू सुख-सुविधाओं पर सोच विचार कर ही खर्च करें.
कर्क: मंगल लग्न में नीच का होने से क्रोध, जल्दबाजी और निर्णयों में अस्थिरता से बचना होगा. सूर्य चौथे भाव में होने से घर-परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में व्यस्तता रहेगी. शुक्र तीसरे भाव में होने से संचार, संपर्क और छोटी यात्राओं पर खर्च हो सकता है. गुरु दूसरे भाव में होने से आर्थिक मामलों में सहयोग मिलने की संभावना रहेगी.
सिंह: खर्च और आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देना होगा. सूर्य तीसरे भाव में होने से साहस और प्रयासों में वृद्धि होगी. मंगल बारहवें भाव में होने से अचानक खर्च, यात्रा और भागदौड़ बढ़ सकती है. शनि से दृष्ट शुक्र दूसरे भाव में नीच और वक्री होने से धन संचय, पारिवारिक खर्च और वाणी से जुड़े मामलों में सतर्कता जरूरी होगी. गुरु प्रथम भाव में होने से आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को बल मिलेगा.
कन्या: आपके लिए शुक्र की स्थिति सबसे अधिक महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि शुक्र इसी राशि में नीच और वक्री होगा. प्रथम भाव में शुक्र होने से व्यक्तित्व, आकर्षण और सुख-सुविधाओं को लेकर असंतोष महसूस हो सकता है. सूर्य दूसरे भाव में होने से धन और पारिवारिक मामलों में जिम्मेदारी बढ़ेगी. मंगल ग्यारहवें भाव में होने से आय के नए अवसर बन सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी में निवेश से बचना होगा.
तुला: आपकी लग्न में ही नीच सूर्य का गोचर रहेगा. इससे आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र में लापरवाही न करें. शुक्र बारहवें भाव में वक्री होने से विलासिता, यात्रा और सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है. हालांकि राहु पांचवें भाव में होने से नए विचार और रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ सकती है. घर में संयम पूर्ण व्यवहार रखें. नीच के मंगल की चौथे भाव पर सीधी दृष्टि घर का माहौल बिगाड़ सकती है.
वृश्चिक: आय और सामाजिक संपर्क महत्वपूर्ण रहेंगे. सूर्य बारहवें भाव में होने से खर्च बढ़ सकता है और विदेश या दूरस्थ स्थानों से जुड़े कार्यों में व्यस्तता रह सकती है. किसी अनैतिक कार्य को करने से बचें. मंगल नौवें भाव में होने से भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय अपने प्रयासों पर ध्यान देना होगा. पिता के स्वास्थ का खयाल रखें. शुक्र ग्यारहवें भाव में नीच और वक्री होने से आय, मित्रों और लाभ के पुराने मामलों की समीक्षा करनी पड़ सकती है.
धनु: आपके लिए आमदनी और कार्यक्षेत्र दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे. सूर्य ग्यारहवें भाव में होने से आय के नए अवसर और सामाजिक संपर्क बढ़ सकते हैं. मंगल आठवें भाव में होने से अचानक खर्च, वाहन और संपत्ति से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी होगी. शुक्र दसवें भाव में वक्री होने से नौकरी, कारोबार और कार्यस्थल पर पुराने निर्णयों में बदलाव की स्थिति बन सकती है. महिला कर्मियों के साथ व्यवहार को अच्छा रखें. गुरु नौवें भाव में होने से भाग्य और ज्ञान का सहयोग मिलेगा.
मकर: नौकरी और व्यावसायिक मामलों में धैर्य रखना होगा. सूर्य दसवें भाव में होने से कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां और प्रतिष्ठा से जुड़े विषय महत्वपूर्ण होंगे. मंगल सातवें भाव में नीच का होने से साझेदारी और दांपत्य जीवन में विवाद से बचना होगा. कार्यक्षेत्र और व्यापार में कोई निर्णय लेने फिलहाल लेने से बचें. शुक्र नौवें भाव में वक्री होने से यात्रा, धार्मिक कार्यों और उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों के प्रति सोच समझकर निर्णय लें.
कुंभ: भाग्य, धन और व्यक्तिगत निर्णय महत्वपूर्ण रहेंगे. सूर्य नौवें भाव में होने से पिता, गुरु और उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों में सक्रियता बढ़ सकती है. मंगल छठे भाव में होने से प्रतियोगिता और विरोधियों से जुड़े मामलों में संघर्ष के बाद सफलता मिलने की संभावना रहेगी. शुक्र आठवें भाव में वक्री होने से अचानक खर्च और संयुक्त धन से जुड़े मामलों में सतर्कता रखनी होगी. अचानक कोई समस्या खड़ी हो सकती है. या कोई रुका धन प्राप्त हो सकता है.
मीन: आर्थिक और पारिवारिक मामलों में विशेष सावधानी रखनी होगी. सूर्य आठवें भाव में होने से अचानक परिस्थितियों और पुराने मामलों पर ध्यान देना पड़ सकता है. मंगल पांचवें भाव में होने से संतान, शिक्षा और निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. शुक्र सातवें भाव में नीच और वक्री होने से दांपत्य और व्यावसायिक साझेदारी में मतभेद की आशंका रहेगी. शनि प्रथम भाव में होने से जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और काम में धैर्य की आवश्यकता होगी.