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जन्म के बाद बच्चे को विटामिन K का इंजेक्शन नहीं लगा तो बढ़ सकता है ब्लीडिंग का खतरा, 52 लाख बच्चों पर हुई रिसर्च में खुलासा

52 लाख से अधिक नवजात बच्चों पर हुई रिसर्च में पाया गया कि जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन न लेने वाले बच्चों में शुरुआती छह महीनों के दौरान ब्लीडिंग का खतरा 47% ज्यादा होता है. इस रिसर्च में यह भी सामने आया कि ऐसे बच्चों में दिमाग के अंदर खून बहने का खतरा 2.4 गुना तक बढ़ जाता है.

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बच्चे के लिए जरूरी है विटामिन k का इंजेक्शन
बच्चे के लिए जरूरी है विटामिन k का इंजेक्शन

बच्चे के जन्म के बाद अस्पताल में उसे कई जरूरी टीके और इंजेक्शन दिए जाते हैं. इन्हीं में से एक है विटामिन K का इंजेक्शन भी है. कई बार कुछ माता-पिता जानकारी की कमी के कारण इसको लगवाने के लिए मना कर देते हैं. वहीं. कुछ छोटे अस्पतालों में ये टीका लगाया ही नहीं जाता है. लेकिन ऐसा करना नवजात की सेहत के लिए भारी पड़ सकता है. 52 लाख से ज्यादा नवजात बच्चों पर हुई एक नई रिसर्च में सामने आया है कि जन्म के समय जिन बच्चों को विटामिन K का इंजेक्शन नहीं दिया गया, उनमें शुरुआती छह महीनों के दौरान ब्लीडिंग यानी खून बहने का खतरा ज्यादा रहा. इस रिसर्च को मेडिकल जर्नल JAMA में प्रकाशित किया गया है.

अमेरिका में हुई इस रिसर्च में जनवरी 2017 से दिसंबर 2025 के बीच अमेरिका के 50 राज्यों के अस्पतालों और हेल्थ सिस्टम में जन्मे 52,40,780 बच्चों के रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया. रिसर्च में देखा गया कि जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन लेने और नहीं लेने वाले बच्चों में खून बहने की समस्या कितनी बार सामने आई.

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विटामिन K का इंजेक्शन नहीं लेने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी से ज्यादा

रिसर्च के मुताबिक, अमेरिका में जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन नहीं लेने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2017 में जहां 3.1 प्रतिशत नवजात बच्चों को यह इंजेक्शन नहीं मिला था, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गया. इसी दौरान इन बच्चों में ब्लीडिंग के मामले भी बढ़े थे. 

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इंजेक्शन नहीं लेने पर ब्लीडिंग का खतरा 47% ज्यादा 

रिसर्च में पाया गया कि जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन नहीं लेने वाले बच्चों में शुरुआती छह महीनों के दौरान ब्लीडिंग का खतरा इंजेक्शन लेने वाले बच्चों के मुकाबले 47 % ज्यादा था. इतना ही नहीं, दिमाग के अंदर खून बहने यानी इंट्राक्रेनियल ब्लीडिंग का खतरा भी ऐसे बच्चों में करीब 2.4 गुना ज्यादा पाया गया. जन्म के समय अस्पताल में ब्लीडिंग के साथ मौत का जोखिम भी इंजेक्शन नहीं लेने वाले बच्चों में ज्यादा पाया गया.

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आखिर नवजात को क्यों जरूरी है विटामिन K?

विटामिन K शरीर में खून का थक्का जमाने में मदद करता है. जब शरीर में कहीं चोट लगती है या खून निकलता है, तो उसे रोकने के लिए क्लॉटिंग की प्रक्रिया जरूरी होती है. विटामिन K इसी में अहम भूमिका निभाता है. नवजात बच्चों में जन्म के समय विटामिन K की मात्रा कम होती है. मां के दूध में भी इसकी मात्रा कम होती है. इसके अलावा, बच्चे की आंतों में जन्म के शुरुआती दिनों में ऐसे बैक्टीरिया नहीं होते जो विटामिन K बनाने में मदद करते हैं. इस वजह से उनमें विटामिन K की कमी से होने वाली ब्लीडिंग का खतरा रहता है. 

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