सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने 7 नवंबर, 2026 से एक नया सेटलमेंट फ्रेमवर्क लागू कर दिया है, जिससे योग्य लोग और एंटिटी एक स्ट्रक्चर्ड सिस्टम के ज़रिए खास रेगुलेटरी कार्रवाई को सुलझा सकेंगे. बदले हुए नियमों में ऑनलाइन एप्लीकेशन, एक सेटलमेंट अमाउंट कैलकुलेटर और कुछ मामलों के तेजी से सेटलमेंट के नियम भी शामिल हैं.
8 अक्टूबर को SEBI ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया था. यह नियम (एडमिनिस्ट्रेटिव और सिविल प्रोसीडिंग्स का सेटलमेंट रेगुलेशन 2026), ट्रांज़िशनल और सेविंग प्रोविज़न के तहत 2018 के सेटलमेंट फ्रेमवर्क की जगह लेगा. आइए जानते हैं इस नियम के तहत क्या-क्या बदल जाएगा...
ऑनलाइन सेटमेंट सर्विस
एप्लीकेशन प्रोसेस को आसान बनाने के लिए, SEBI ने एक ऑनलाइन सेटलमेंट एप्लीकेशन सुविधा, एक सेटलमेंट अमाउंट कैलकुलेटर, अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) और एक डेडिकेटेड हेल्प डेस्क शुरू किया है. रेगुलेटर ने एक समझाने वाला वीडियो भी जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि एप्लिकेंट सेटलमेंट अमाउंट कैसे कैलकुलेट कर सकते हैं.
SEBI ने कहा कि योग्य व्यक्ति सेटलमेंट रेगुलेशन, 2026 के अनुसार सेटलमेंट के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इस फ्रेमवर्क के तहत, एलिजिबल एप्लिकेंट अलग-अलग स्टेज पर तय कार्रवाई के सेटलमेंट की मांग कर सकते हैं, बशर्ते वे तय शर्तें पूरी करें.
आवेदन शुल्क और सेटमेंट अमाउंट
नियमों के मुताबिक, आम लोगों के लिए ₹25,000 और दूसरे एप्लिकेंट्स के लिए ₹35,000 की नॉन-रिफंडेबल एप्लीकेशन फीस रखी गई है. पहली बार अप्लाई करने वालों के लिए मिनिमम सेटलमेंट अमाउंट 3 लाख रुपये और दूसरे अप्लाई करने वालों के लिए 7 लाख रुपये तय किया गया है.
लेकिन, फ़ाइनल अमाउंट कई फ़ैक्टर्स पर निर्भर करेगा, जिसमें बेस अमाउंट, कार्रवाई का स्टेज, कहे गए वायलेशन का नेचर और सीरियसनेस, रेगुलेटरी एक्शन और लागू होने वाले गंभीर या कम करने वाले हालात शामिल हैं. SEBI के सामने पेंडिंग कार्यवाही से जुड़े एप्लीकेशन आम तौर पर शो-कॉज़ नोटिस या सप्लीमेंट्री शो-कॉज़ नोटिस मिलने के 120 दिनों के अंदर जमा करने होते हैं, लेकिन, यह डेडलाइन सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल या सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग खास कार्रवाई पर लागू नहीं होती है.
फास्ट-ट्रैक सेटमेंट सिस्टम
नए नियम वायलेशन-बेस्ड और मॉनेटरी थ्रेशहोल्ड-बेस्ड फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट प्रोसीजर शुरू करते हैं. मॉनेटरी थ्रेशहोल्ड मैकेनिज्म के तहत, ₹10 लाख तक के सेटलमेंट अमाउंट वाले एप्लीकेशन जल्दी प्रोसेसिंग के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं, बशर्ते इसमें कोई डिस्गॉर्जमेंट, सुधार के उपाय या एक्स्ट्रा रेगुलेटरी शर्तें शामिल न हों.
कौन से मामले सुलझाए नहीं जा सकते?
कुछ गंभीर उल्लंघन सेटलमेंट फ्रेमवर्क से बाहर हैं. इनमें विलफुल डिफॉल्टर्स, फ्रॉड करने वाले कर्जदार और भगोड़े आर्थिक अपराधियों से जुड़े मामले शामिल हैं. रेगुलेटरी नियमों के आधार पर, मार्केट-वाइड नतीजों, इन्वेस्टर के बड़े नुकसान या मार्केट की ईमानदारी को खतरे वाली कार्रवाई को भी बाहर रखा जा सकता है.
गोपनीयता और अप्रूवल प्रॉसेस
नियम इसके अलावा, जांच या ऑडिट में अच्छी मदद देने वाले एप्लिकेंट को कुछ शर्तों के साथ कॉन्फिडेंशियलिटी बेनिफिट के साथ सेटलमेंट की भी इजाज़त देते हैं. सेटलमेंट एप्लीकेशन की जांच एक इंटरनल कमिटी और एक हाई पावर्ड एडवाइजरी कमिटी करेगी, जो सही शर्तों की सिफारिश करेगी. SEBI के होल टाइम मेंबर्स का एक पैनल बाद में तय करेगा कि एप्लीकेशन को स्वीकार किया जाए या रिजेक्ट किया जाए. बदले हुए फ्रेमवर्क का मकसद सिक्योरिटीज़ मार्केट के गंभीर उल्लंघनों के खिलाफ सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए रेगुलेटरी सेटलमेंट को आसान बनाना है.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)