श्री जगन्नाथ जी, जिन्हें भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है, उनकी आरती और दर्शन करने से भक्तों को असीम आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मनोबल की प्राप्ति होती है. सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रभु की आराधना करने से जीवन के दुख, कष्ट और नकारात्मकता दूर होती है.
ॐ जय जगन्नाथ हरे, स्वामी! जय जगन्नाथ हरे।
भक्तन के हितकारी, भक्तन के हितकारी।
कष्ट सदा ही टरे॥ ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
रत्न सिंहासन सुंदर, धुर-धुर छवि छाई।
सुर-मुनि जन की मोहन, सुर-मुनि जन की मोहन,
सबकी सुध बिसराई॥ ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
ब्रह्मादिक शिव नारद, करत स्तुति भारी।
भक्तन की पीड़ा हरने, भक्तन की पीड़ा हरने,
महिमा है तुम्हारी॥ ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
कमल नयन चतुर्भुज, पीतांबर सोहे।
गरुड़ वाहन पर बैठे, गरुड़ वाहन पर बैठे,
देखत मन मोहे॥ ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
जगन्नाथ स्वामी जी की, आरती जो कोई गावै।
प्रेम सहित मन भावे, प्रेम सहित मन भावे,
वांछित फल पावै॥ ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
-------समाप्त-------