ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, राहु देव की आरती करने से कुंडली में राहु से जुड़े दोषों का प्रभाव कम करने में सहायता मिलती है. नियमित पूजा और आरती से मानसिक तनाव, भ्रम और जीवन की बाधाओं से राहत मिलने की मान्यता है. पूजा के दौरान नवग्रह आरती का भी विशेष महत्व माना जाता है.
जय राहु देवा, जय राहु देवा।
सिर पर मुकुट विराजे, तुम हो प्रभु देवा॥
असुर कुल में जनमे, सिंहिका के लाला।
छल कपट के ज्ञाता, तुम हो विकराला॥
हाथ में ध्वजा सोहे, चक्र और गदा।
दुष्टन को तुम डराओ, काटो सब बाधा॥
काल के समान तुम हो, बलवान महाबली।
ज्ञान बुद्धि के दाता, सब जग के प्रतिपली॥
दानव रूप धरे तुम, देवों के संग में।
छाया ग्रह कहलाते, नवग्रह के रंग में॥
भक्त जो नित गावे, राहु की आरती।
कष्ट उसके मिटावे, संकट को हरती॥
जो कोई श्रद्धा से राहु जी का ध्यान करे।
उसका बेड़ा पार प्रभु, सब जग कल्याण करे॥
जय राहु देवा, जय राहु देवा।
-------समाप्त-------