केतु देव की पूजा, मंत्र जाप और आरती करने से कुंडली में केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव को शांत करने की मान्यता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे मानसिक शांति मिलती है, आध्यात्मिक उन्नति होती है, अज्ञात भय कम होता है और जीवन में आने वाली अचानक बाधाओं व दुर्घटनाओं से सुरक्षा की कामना की जाती है.
जय केतु महराजा, जय सुखकारी।
दुःख हरो संताप हमारे, प्रभु भयहारी॥
तुम हो ग्रह बलवान, जगत में महिमा भारी।
भक्त जनों के कष्ट हरो, तुम संकट तारी॥
सिर पर शोभित मुकुट, तन है छवि प्यारी।
दुष्टन को भय देत हो, सज्जन हितकारी॥
राहु और चंद्र की जब युति हो बन आती।
केतु देव की कृपा से, विपदा कट जाती॥
जो नर टेके शीश, चरणों में बलिहारी।
उसकी सब ही आस, करो प्रभु पूरी हमारी॥
करत आरती तेरी, सब जग के स्वामी।
दीन दयाल कृपालु, अंतर्यामी॥
जय केतु महराजा, जय सुखकारी।
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