राजस्थान के मेनाल से चित्तौड़गढ़ की तरफ जाने वाले एनएच-27 का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में करीब 20 से 25 लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हुए नजर आ रहे हैं. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि लोगों ने हाईवे को ब्लॉक कर सड़क के बीच बैठकर खाना खाया. वीडियो को लेकर तरह-तरह के कमेंट भी किए जा रहे हैं. लेकिन आजतक की पड़ताल में वीडियो की कहानी कुछ और सामने आई. वीडियो बनाने वाले शिव प्रकाश ने बताया कि उनका परिवार हाईवे को रोककर नहीं बैठा था. परिवार के लोग हाईवे के रेस्ट एरिया और पार्किंग में बैठकर खाना खा रहे थे.
शिव प्रकाश चित्तौड़गढ़ के रहने वाले हैं. उन्होंने बताया कि 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या के मौके पर परिवार के साथ मेनाल वॉटरफॉल घूमने गए थे. उनके साथ परिवार के करीब 20 से 25 लोग थे. घूमने के बाद जब परिवार वापस चित्तौड़गढ़ की तरफ लौट रहा था, तो एनएच-27 पर मेनाल से चित्तौड़गढ़ की ओर आते समय उन्होंने हाईवे के बाईं तरफ बने रेस्ट एरिया और पार्किंग में गाड़ियां खड़ी कीं. यहीं परिवार के लोग कुछ देर के लिए रुके और खाना खाया. इसी दौरान शिव प्रकाश ने वीडियो बनाया. बाद में उन्होंने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो को अलग तरीके से पेश किया गया. वीडियो के साथ यह दावा किया जाने लगा कि हाईवे को ब्लॉक करके लोग सड़क पर बैठकर खाना खा रहे हैं.
परिवार मेनाल वॉटरफॉल से लौटते समय रुका था
वीडियो वायरल होने के बाद जब इस पर सवाल उठने लगे तो आजतक ने वीडियो बनाने वाले शिव प्रकाश से बातचीत की. उन्होंने बताया कि परिवार के लोग हाईवे पर नहीं बैठे थे. वे हाईवे के किनारे बने रेस्ट एरिया में रुके थे. उन्होंने यह भी बताया कि वहां परिवार करीब 15 मिनट तक रुका था. शिव प्रकाश के मुताबिक परिवार के लोग मेनाल वॉटरफॉल घूमने गए थे और वापसी के दौरान पार्किंग एरिया में रुककर खाना खाया था. उनका कहना है कि न तो हाईवे को रोका गया था और न ही सड़क पर बैठकर खाना खाया गया था. वीडियो को सोशल मीडिया पर जिस तरह से पेश किया गया, उससे गलत संदेश गया.
शिव प्रकाश ने यह भी बताया कि मेवाड़ क्षेत्र में हरियाली अमावस्या के दिन लोग परिवार के साथ घूमने जाते हैं. इसी परंपरा के तहत उनका परिवार भी मेनाल वॉटरफॉल घूमने गया था. लौटते समय परिवार के लोगों ने हाईवे के रेस्ट एरिया में रुककर खाना खाया. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग दावे कर रहे थे. कुछ लोगों को लगा कि सड़क के बीच बड़ी संख्या में लोग बैठकर खाना खा रहे हैं. लेकिन वीडियो की पड़ताल करने और इसे बनाने वाले व्यक्ति से बात करने के बाद तस्वीर साफ हुई कि लोग हाईवे की मुख्य सड़क पर नहीं बैठे थे.
इस मामले में एनएचएआई के अधिकारी ने भी वीडियो की जगह और स्थिति को लेकर जानकारी दी. उदयपुर एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अनिल चौधरी ने बताया कि वीडियो कोटा-चित्तौड़गढ़ हाईवे का है. उन्होंने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहे लोग पार्किंग एरिया में बैठकर खाना खा रहे हैं. अनिल चौधरी के मुताबिक यह जगह लोगों के रुकने और आराम करने के लिए बनाई गई है. इसके साथ ही यहां ट्रकों की पार्किंग की भी व्यवस्था है. यानी वीडियो में दिखाई दे रहा स्थान हाईवे की मुख्य सड़क नहीं, बल्कि रेस्ट और पार्किंग एरिया है.
वीडियो कोटा-चित्तौड़गढ़ हाईवे के पार्किंग एरिया का
इस तरह सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर जो दावा किया जा रहा था, उसकी तस्वीर अलग सामने आई. वीडियो में परिवार के 20 से 25 लोग खाना खाते हुए जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वीडियो बनाने वाले शिव प्रकाश और एनएचएआई अधिकारी के मुताबिक यह हाईवे की मुख्य सड़क पर नहीं, बल्कि पार्किंग और रेस्ट एरिया में हुआ था. वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर जिस तरह की चर्चा शुरू हुई, उससे यह गलत संदेश गया कि परिवार ने हाईवे को रोककर सड़क पर खाना खाया. जबकि वीडियो बनाने वाले शख्स ने बताया कि परिवार ने अपनी गाड़ियां रेस्ट एरिया में खड़ी की थीं और करीब 15 मिनट रुककर खाना खाया था. मेनाल से चित्तौड़गढ़ की ओर जाने वाले एनएच-27 पर सामने आए इस वीडियो की पड़ताल में अब वीडियो का दूसरा पक्ष सामने आया है. एक तरफ वायरल वीडियो के साथ किए गए दावे थे, वहीं वीडियो बनाने वाले शिव प्रकाश और एनएचएआई अधिकारी ने बताया कि लोग पार्किंग और रेस्ट एरिया में बैठे थे.