उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के बड़े रैकेट का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों की पड़ताल अब राजस्थान तक पहुंच गई है. इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड राजस्थान के अलवर जिले के खेड़ली का रहने वाला भूपेंद्र शर्मा बताया जा रहा है. जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पहले भी नकली दवाओं की सप्लाई के मामले में गिरफ्तार हो चुका था और बाद में उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी. इसके बाद उसने कथित तौर पर अपने नेटवर्क का विस्तार कई राज्यों तक कर लिया.
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था. राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी नकली एलोपैथिक दवाओं की सप्लाई की जा रही थी. मामले के खुलासे के बाद राजस्थान के ड्रग कंट्रोल विभाग ने पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.
यह भी पढ़ें: मकान की EMI भरने के लिए 'अंकल' का मर्डर, अलवर में बुजुर्ग की हत्या का 12 घंटे में खुलासा
उत्तर प्रदेश के लखनऊ और गोंडा में हुई कार्रवाई के दौरान भूपेंद्र शर्मा का नाम सामने आया. जांच एजेंसियों का दावा है कि राजस्थान कनेक्शन के जरिए वह सस्ती नकली दवाओं का कारोबार संचालित करता था और मांग के अनुसार अलग-अलग राज्यों में उनकी सप्लाई कराता था.
लखनऊ-गोंडा कार्रवाई में खुला नेटवर्क
इस मामले में अलवर जिले के खेड़ली निवासी भूपेंद्र शर्मा समेत 7 से 8 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि आरोपी बिना बिल के बेहद कम कीमत पर नकली एलोपैथिक दवाएं खरीदते थे और उन्हें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित अन्य राज्यों के बाजारों में सप्लाई करते थे.
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि ये नकली दवाएं उत्तराखंड के सोलन स्थित एक प्लांट से खरीदी जाती थीं. इसके बाद मांग के अनुसार इन्हें अलग-अलग राज्यों और शहरों में भेजा जाता था. जांच एजेंसियां अब इस पूरी सप्लाई चेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं.
अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है. इसलिए यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी मात्रा में नकली दवाएं बाजार तक पहुंच चुकी हैं और किन-किन लोगों की इसमें भूमिका रही है.
पैकिंग में मिलीं कई गड़बड़ियां, बिल और लाइसेंस भी नहीं
ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि जब्त की गई दवाओं की पैकिंग में कई स्पेलिंग और प्रिंटिंग संबंधी गंभीर त्रुटियां मिली हैं. इसके अलावा आरोपियों के पास दवाओं की खरीद से जुड़े वैध बिल और लाइसेंस भी नहीं मिले.
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि राजस्थान से इस पूरे नेटवर्क का संचालन कैसे किया जा रहा था. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि नकली दवाएं किन-किन स्थानों से लाई जाती थीं और उनकी सप्लाई किन राज्यों तक की जाती थी.
फिलहाल, इस पूरे मामले में कई पहलुओं पर जांच जारी है. अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और सप्लाई चेन की जांच से इस नेटवर्क के और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
लखनऊ में नकली दवाओं की बरामदगी के बाद राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग ने प्रदेशभर के फील्ड अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. विभाग ने Telma, Flozen-AA, Pantop-40, RIOPOD CV और MOXYZIDE-CV 625 LB समेत कई दवाओं की विशेष निगरानी करने को कहा है.
निर्देशों में साफ कहा गया है कि यदि बाजार, मेडिकल स्टोर या सप्लाई चेन में इन दवाओं को लेकर कोई भी संदेहास्पद गतिविधि या स्थिति सामने आती है तो तत्काल जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए. अधिकारियों को संबंधित दवाओं के बैच नंबर, स्रोत और गुणवत्ता की भी गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं.
ड्रग कंट्रोल विभाग का कहना है कि नकली दवाओं का कारोबार सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला है. ऐसे में पूरे प्रदेश में निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.