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राजस्थान चुनाव में नहीं उड़ेगी ओवैसी की 'पतंग', जानिए AIMIM को क्यों नहीं मिला सिंबल?

राजस्थान निकाय चुनाव से ठीक पहले हाईकोर्ट ने AIMIM को उनका आधिकारिक निशान 'पतंग' आवंटित करने की मांग को स्वीकार नहीं किया. इसके चलते ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवारों को अब अलग-अलग सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरना पड़ेगा.

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राजस्थान में AIMIM प्रत्याशी निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे (Photo-AIMIM)
राजस्थान में AIMIM प्रत्याशी निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे (Photo-AIMIM)

राजस्थान में सियासी ज़मीन तलाशने में जुटे ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की नजर राज्य के मुस्लिम समुदाय पर है. सूबे के शहरी निकाय चुनाव में किस्मत आजमा रही ओवैसी की पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. निर्वाचन आयोग के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने भी AIMIM के उम्मीदवारों को उनका आधिकारिक चुनाव निशान 'पतंग' आवंटित करने की मांग खारिज कर दी है.

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान शहरी निकाय चुनाव में ओवैसी की 'पतंग' नहीं उड़ पाएगी.य ऐसे में अब AIMIM के प्रत्याशियों को निर्दलीय के तौर पर ही चुनावी मैदान में उतरना पड़ेगा. इतना ही नहीं, पार्टी के प्रत्याशियों को अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग चुनाव चिह्नों के साथ किस्मत आज़मानी होगी.

बता दें कि राजस्थान निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) गठबंधन करके मैदान में उतरी हैं. इन दोनों दलों का एक साथ आना राज्य की राजनीति में 'तीसरे विकल्प' के रूप में एक बड़े राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है.

राजस्थान में AIMIM को 'पतंग' सिंबल क्यों नहीं मिला?

राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैय नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य चुनाव आयोग उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा. प्रत्याशियों को 4 सितंबर को अपने चुनाव चिन्ह प्राप्त होने की उम्मीद है, जहां भाजपा के प्रत्याशियों को 'कमल' और कांग्रेस कैंडिडेट्स को 'हाथ का पंजा' सिंबल मिलेगा, वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के उम्मीदवारों को 'पतंग' निशान आवंटित नहीं होगा.

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राज्य निर्वाचन आयोग ने तेलंगाना में राज्य स्तरीय मान्यता होने का हवाला देते हुए AIMIM को राजस्थान में 'पतंग' सिंबल देने से इनकार कर दिया था. चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ AIMIM ने अदालत का रुख किया था. सोमवार को जयपुर हाईकोर्ट के जस्टिस मनीष शर्मा की एकल पीठ ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है. तब तक निकाय चुनाव की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, इसलिए इस चुनाव में उम्मीदवारों के लिए पार्टी सिंबल के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं.

निर्दलीय के रूप में किस्मत आजमाएंगे प्रत्याशी

चुनाव आयोग के बाद अदालत से झटका लगने के बाद अब AIMIM के उम्मीदवारों को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना होगा. उन्हें 'पतंग' के बजाय अन्य चुनाव निशानों पर चुनाव मैदान में उतरना पड़ेगा.

राजस्थान निकाय चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए हाथ की चक्की, ऊंट, पलंग, चप्पल, जूता, कैंची, सिलाई मशीन और हारमोनियम जैसे 40 सिंबल तय किए गए हैं. AIMIM के प्रत्याशियों को इन्हीं में से किसी एक सिंबल का चयन करना होगा. AIMIM के प्रवक्ता और अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद के मुताबिक, पार्टी अगली सुनवाई में संशोधित अर्जी दाखिल कर आगामी पंचायत चुनावों में सिंबल आवंटित करने का आदेश जारी करने की अपील करेगी.

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जाट-मुस्लिम समीकरण बनाने की तैयारी

शहरी निकाय चुनाव में ओवैसी की पार्टी सांसद हनुमान बेनीवाल की RLP के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. 6 सितंबर को जयपुर के शास्त्री नगर में असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल एक बड़ी साझा महारैली करके शक्ति प्रदर्शन करेंगे. दोनों दलों का प्लान जाट-मुस्लिम समीकरण बनाकर चुनाव लड़ने का है, लेकिन पार्टी सिंबल न मिलने से इस रणनीति को बड़ा झटका लगा है.

AIMIM को 'पतंग' सिंबल न मिलने के कारण जहां उसके प्रत्याशियों को निर्दलीय या वैकल्पिक चुनावी निशानों पर लड़ना पड़ रहा है, वहीं इसका सीधा फायदा RLP को मिल सकता है, जिसके प्रत्याशी अपने पंजीकृत सिंबल पर चुनाव लड़ रहे हैं. शीर्ष स्तर पर ओवैसी और बेनीवाल का मिलाप भले ही आसान दिख रहा हो, लेकिन स्थानीय निकायों और वार्ड स्तर पर जाट और मुस्लिम समुदायों का एक-दूसरे के प्रत्याशी को एकमुश्त वोट ट्रांसफर करा पाना इस गठबंधन की सबसे बड़ी परीक्षा होगी.

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