गरीबों के घर के नाम पर भ्रष्टाचार और सियासत का बेरहम चेहरा जयपुर के राजीव नगर में देखा जा सकता है. 100 बीघा में 300 करोड़ रुपये खर्च कर 2008 से 2013 के बीच गहलोत सरकार ने राजीव नगर बनाया था. मगर भ्रष्टाचार की वजह से बने घटिया मकान किसी ने लिए नहीं और सरकार चली गई. दूसरी बार गहलोत सरकार लौटी तो राजीव नगर भूतिया बस्ती बन चुका था. अब यह नशेड़ियों और अपराधियों का अड्डा बन गया है.
जयपुर के बेहद खूबसूरत इलाके किशनबाग में बना यह राजीव नगर है. 2009 में जयपुर की झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए करीब 100 बीघा में 300 करोड़ रुपये खर्च कर तीन जगहों पर चार हजार मकान राजीव गांधी नगर योजना के तहत बनाए गए थे. 2013 में सभी मकानों की लॉटरी निकली, लेकिन आवंटन से पहले ही गहलोत सरकार चली गई. बीजेपी सरकार आने के बाद योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. पानी, बिजली और सड़क की व्यवस्था भी नहीं हो पाई थी. चोर खिड़कियां, दरवाजे और सरिया तक उखाड़ ले गए. योजना में 30 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही थी. 2014 में केंद्र में सरकार बदलते ही केंद्र सरकार ने भी यह योजना बंद कर दी.
ज्यादातर मकान मुस्लिम समुदाय के लोगों को आवंटित हुए थे. गहलोत सरकार 2018 में वापस लौटी तो मकान रहने लायक नहीं बचे थे. निर्माण इतना घटिया था कि मकान ढहने लगे थे. लिहाजा, जिन लोगों को सवा दो लाख रुपये में आवंटन होना था, उन्होंने इन्हें लेने से मना कर दिया.
इन सूने पड़े मकानों में पुराने कपड़ों के बदले बर्तन बेचने वाले गुजरात से आए कुछ परिवार अवैध रूप से रह रहे हैं. उनका कहना है कि स्थानीय विधायक ने कहा था कि जाकर वहां रह लो, लेकिन न पानी है और न बिजली. खुले में शौच जाना पड़ता है. दिनभर अफीम और ड्रग्स लेने वालों का डेरा रहता है. डर लगता है, लेकिन यहां रह लेते हैं क्योंकि किराया नहीं देना पड़ता.
अपराधियों का यह ऐसा अड्डा बन चुका है कि पाकिस्तान से जुड़े आतंकी खरगोश ने जयसिंह खोर के इन्हीं मकानों में रहकर समय बिताया और अपने दस्तावेज बनवाए.
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बीजेपी सरकार ने यहां अवैध कब्जा किए मुसलमानों को हटा दिया है. स्थानीय विधायक बालमुकुंदाचार्य का कहना है कि उन्होंने किसी को भी यहां रहने के लिए नहीं कहा, बल्कि यह कांग्रेस सरकार द्वारा एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए बनाई गई योजना थी.
वहीं कांग्रेस विधायक रफीक खान का कहना है कि बीजेपी ने जानबूझकर गरीबों की इस योजना को फेल किया. जयपुर में ऐसे चार हजार मकान बनाए गए थे, जिनमें से तीन हजार खाली पड़े हैं और अब खंडहर बन चुके हैं.
सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया है क्योंकि इतने मकानों को तोड़ने और नए सिरे से मरम्मत करने में फिर से सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होंगे. शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि इन मकानों को ठीक करने में भारी धनराशि की जरूरत होगी, जिसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
मगर बड़ा सवाल यह है कि गरीब आज भी झुग्गियों में रह रहे हैं, जबकि उनके नाम पर हजारों करोड़ रुपये की सरकारी जमीन और सैकड़ों करोड़ रुपये जनता का पैसा बर्बाद हो चुका है. अब इन जगहों की सुरक्षा पर भी पैसा खर्च होगा. सरकार ने तय किया है कि इन इलाकों में अपराधियों का जमावड़ा न हो, इसके लिए स्थानीय पुलिस चौकी खोली जाएगी.