राजस्थान के धौलपुर जिले से होकर गुजरने वाली चम्बल नदी के सीने पर अब ड्रोन और पुलिस का पहरा है. कभी अवैध बजरी खनन और परिवहन के लिए चर्चा में रहने वाली इस नदी में अब निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है. राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य को बचाने और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन कराने के लिए शासन और प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है. नदी के संवेदनशील घाटों पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है, वहीं आधुनिक कैमरों के जरिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है.
इसका उद्देश्य साफ है. चम्बल नदी के प्राकृतिक वातावरण और यहां रहने वाले जलीय जीवों के आवास को सुरक्षित रखना. इसी दिशा में राजस्थान के मुख्य सचिव के विशेष निर्देशों के बाद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने धौलपुर पहुंचकर अभयारण्य का उच्चस्तरीय निरीक्षण किया. इस दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक पवन कुमार उपाध्याय और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसी अरुण प्रसाद ने नदी के विभिन्न संवेदनशील घाटों का जायजा लिया.
ड्रोन से नदी के घाटों का हवाई सर्वेक्षण
राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य में अवैध खनन और बजरी के परिवहन पर रोक लगाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों ने ड्रोन की मदद से नदी के अलग-अलग घाटों का हवाई सर्वेक्षण किया. इसका मकसद संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति को करीब से देखना और निगरानी व्यवस्था का आकलन करना था. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा इंतजामों की भी जांच की. सुप्रीम कोर्ट की स्वप्रेरित रिट याचिका में दिए गए आदेशों का जमीन पर कितना पालन हो रहा है, इसे भी निरीक्षण का अहम हिस्सा बनाया गया. अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया.
ड्रोन सर्वेक्षण के साथ अधिकारियों ने नदी के घाटों पर लगाए जा रहे आधुनिक PTZ कैमरों के इंस्टॉलेशन स्थलों का भी निरीक्षण किया. इन कैमरों को निगरानी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है. अधिकारियों ने इनके इंस्टॉलेशन और संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की. उन्होंने निर्देश दिए कि कैमरों को जल्द से जल्द पूरी क्षमता के साथ चालू किया जाए, ताकि नदी के संवेदनशील घाटों पर निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सके. ड्रोन, पुलिस और आधुनिक कैमरों के जरिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, जिससे अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाई जा सके.
टास्क फोर्स की बैठक में सख्ती पर जोर
निरीक्षण के बाद जिला स्तरीय टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन कराने, अलग-अलग प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और प्रवर्तन एवं निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी करने पर चर्चा हुई. बैठक में स्पष्ट किया गया कि चम्बल नदी का अनूठा पारिस्थितिक तंत्र और यहां रहने वाले जलीय जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहना चाहिए. इसके लिए अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने पर जोर दिया गया. इस उच्चस्तरीय निरीक्षण और बैठक के दौरान डीएफओ वाइल्डलाइफ तेजस विष्णु पाटिल, डीएफओ टेरीटोरियल वी चेतन कुमार, एसीएफ वाइल्डलाइफ राजीव शर्मा और एसीएफ टेरीटोरियल चेतराम मीणा सहित अन्य प्रमुख प्रशासनिक और वन अधिकारी मौजूद रहे.
धौलपुर जिले में अवैध बजरी और पत्थर खनन तथा परिवहन के खिलाफ वर्ष 2025 में व्यापक कार्रवाई की गई थी. इस दौरान कुल 246 मामले दर्ज किए गए और 275 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. कार्रवाई के दौरान 260 वाहन जब्त किए गए. इसके अलावा 10 हजार 40 टन प्रतिबंधित चम्बल बजरी भी जब्त की गई. ये आंकड़े बताते हैं कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन को बड़े स्तर पर कार्रवाई करनी पड़ी. चम्बल नदी और उसके आसपास के अभयारण्य क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी रखा गया.
2026 में 11 अक्टूबर तक 109 मामले दर्ज
वर्ष 2026 में भी पुलिस ने अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की. 1 जनवरी से 11 अक्टूबर तक कुल 109 मामले दर्ज किए गए. इस दौरान 150 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 129 वाहन जब्त किए गए. पुलिस ने 600 टन बजरी भी बरामद की. महीनेवार आंकड़ों में दर्ज मामलों की संख्या में कमी नजर आती है. मई 2026 में चार मामले दर्ज किए गए थे. जून में यह संख्या घटकर तीन रह गई. जुलाई में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ. अगस्त में केवल एक मामला सामने आया. इसके बाद सितंबर में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया. 11 अक्टूबर तक भी कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था.
हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अवैध खनन और परिवहन पूरी तरह बंद हो गया है, लेकिन दर्ज मामलों की संख्या में आई कमी प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण है. चम्बल नदी में अवैध बजरी खनन का मामला पहले भी गंभीर रूप ले चुका है. पूर्व में मध्य प्रदेश के मुरैना और राजस्थान के धौलपुर जिले में बजरी माफिया ने दो वनकर्मियों पर हमला कर दिया था. इस हमले में दोनों वनकर्मियों की मौत हो गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि बजरी के उत्खनन और परिवहन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए.
दो वनकर्मियों की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट सख्त
अब इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन निगरानी और कार्रवाई पर जोर दे रहा है. ड्रोन से हवाई सर्वेक्षण, आधुनिक PTZ कैमरों की स्थापना, पुलिस की कार्रवाई और विभागों के बीच समन्वय इसी प्रयास का हिस्सा हैं. चम्बल नदी के संरक्षण के लिए अब चुनौती सिर्फ कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन और बजरी का परिवहन दोबारा शुरू न हो. प्रशासन की सख्ती और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है, यह आने वाले समय में साफ होगा.